केरल में अरुणाचल प्रदेश के 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र की मौत, मिला सुसाइड नोट, ईयर-बैक सिस्टम पर उठे सवाल

पुलिस ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के 20 साल के इंजीनियरिंग छात्र को शनिवार शाम को कोठामंगलम के पास कोझीपिल्ली में किराए के मकान में फर्श पर पड़ा हुआ पाया गया, जहां वह अपने कॉलेज के साथियों के साथ रहता था. उसके गले में रस्सी बंधी हुई थी और कमरे से तीन पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है. 

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 20 साल के इंजीनियर ने दी जान.(Photo: ITG) 20 साल के इंजीनियर ने दी जान.(Photo: ITG)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:45 AM IST

केरल के कोठामंगलम में अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले 20 साल के इंजीनियरिंग छात्र की मौत का मामला सामने आया है. छात्र का शव शनिवार शाम को उसके किराए के मकान में मिला. घटना के बाद केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने मामले की विस्तृत जांच कराने का भरोसा दिया है. मृतक की पहचान अरुणाचल प्रदेश के पापुम पारे जिले के नाहरलागुन निवासी मिची मार्पू के रूप में हुई है. वह कोठामंगलम स्थित एमए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बीटेक का छात्र था. पुलिस के मुताबिक, मार्पू कोझिप्पिल्ली इलाके में अपने कॉलेज के साथियों के साथ किराए के मकान में रह रहा था. शनिवार शाम वह कमरे में फर्श पर पड़ा मिला और उसके गले में रस्सी बंधी हुई थी. उसे तत्काल कोतमंगलम तालुक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. 

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कम क्रेडिट बना मौत की वजह 

पुलिस को आशंका है कि छात्र कम अकादमिक क्रेडिट स्कोर के कारण एक साल पीछे होने की आशंका से परेशान था. घटना के बाद कॉलेज के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. छात्रों का आरोप है कि कॉलेज में न्यूनतम क्रेडिट की अनिवार्यता राज्य के अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की तुलना में अधिक है. कॉलेज में एसएफआई और केएसयू से जुड़े छात्र नेताओं ने बताया कि एमए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एक ऑटोनॉमस संस्थान है और यहां न्यूनतम क्रेडिट आवश्यकता 22 क्रेडिट तय की गई है. इसके मुकाबले केरल टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (KTU) से संबद्ध कॉलेजों में यह सीमा 18 क्रेडिट बताई गई है. ऐसे में छात्र संगठनों का आरोप है कि KTU द्वारा ईयर-बैक सिस्टम को निलंबित किए जाने के बावजूद एमए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में इसे लागू रखा गया. 

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जांच में इन बातों का शक 

पुलिस को शुरुआती जांच में आशंका है कि छात्र ने कमरे की छत से फंदा लगाने की कोशिश की थी लेकिन रस्सी टूट गई और वह नीचे गिर गया. उसके कमरे से अंग्रेजी और हिंदी में लिखा तीन पन्नों का एक नोट भी बरामद हुआ है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक नोट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है. 

छात्रों के विरोध के बाद मैनेजमेंट से हुई बातचीत

विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कॉलेज प्रबंधन के साथ बातचीत की. छात्रों के मुताबिक,  प्रबंधन ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है. इनमें ईयर-बैक सिस्टम को निलंबित करना, सप्लीमेंट्री परीक्षाएं आयोजित करना और सप्लीमेंट्री परीक्षा की फीस कम करने जैसी चीजों को शमिल किया गया है. कॉलेज के प्रिंसिपल बॉस मैथ्यू जोस ने भी कहा कि छात्रों की मांगों पर विचार किया जाएगा और आगे जरूरी कदम उठाए जाएंगे. 

पुलिस ने बताया कि मृतक के माता-पिता रविवार शाम को पहुंचे. उनके पहुंचने के बाद सोमवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा. कोतमंगलम पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. 

मेंटल प्रेशर ने ले ली जान 

केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की गहन जांच करेगी और विभागीय स्तर पर भी विश्वविद्यालय से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और परिवार की मौजूदगी में इनक्वेस्ट और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. उन्होंने बताया कि छात्र को हॉस्टल से निकाल दिया गया था और ईयर-बैक सिस्टम से प्रभावित होने के बाद उसे कैंपस के बाहर पेइंग गेस्ट के तौर पर रहना पड़ रहा था. मंत्री के मुताबिक, इसी कॉलेज में करीब 20 अन्य छात्र भी ईयर-बैक की स्थिति का सामना कर रहे हैं. 

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जॉन ने आगे कहा कि ऐसी परिस्थितियां छात्रों के भविष्य को सीधे प्रभावित करती हैं और कॉलेजों को ऐसे मामलों में ज्यादा संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए. यदि कोई छात्र इस तरह की स्थिति में है तो कॉलेज को उसकी काउंसलिंग कराने, अभिभावकों से संपर्क करने और परिवार को स्थिति की जानकारी देने समेत सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए ताकि छात्र को किसी गंभीर स्थिति में पहुंचने से रोका जा सके. 

2024 में लागू हुआ था ईयर-बैक का फैसला

मंत्री ने बताया कि ईयर-बैक सिस्टम को 2024 में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान KTU के तत्कालीन बोर्ड ऑफ स्टडीज के फैसले के बाद पेश किया गया था. इसके तहत पांचवें सेमेस्टर में जरूरी क्रेडिट हासिल नहीं करने वाले छात्र को एक साल पीछे किया जाना था. यह फैसला 2026 से लागू होना था और इसी साल पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश करने वाले छात्रों पर इसका प्रभाव पड़ा. जॉन के अनुसार, मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद यह मुद्दा उसके संज्ञान में आया.  बोर्ड ऑफ स्टडीज के पुनर्गठन के बाद KTU की सिंडिकेट बैठक में इस साल ईयर-बैक सिस्टम को टालने या लागू नहीं करने का फैसला लिया गया. 

हालांकि, एमए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग स्वायत्त संस्थान होने के कारण अपने अकादमिक काउंसिल के अधिकारों के तहत ईयर-बैक सिस्टम को जारी रखने का फैसला कर सकता था. मंत्री ने कहा कि कॉलेज के छात्रों ने उनसे संपर्क किया था और उन्होंने कॉलेज प्रशासन से भी इस व्यवस्था पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था लेकिन कॉलेज ने इसे वापस लेने पर सहमति नहीं जताई. 

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‘अकादमिक फैसले मानवीय होने चाहिए’

मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अकादमिक मामलों में स्वायत्तता हासिल है और सरकार हर फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती लेकिन उन्होंने जोर दिया कि अकादमिक फैसलों में छात्रों के भविष्य, उनकी उम्र और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय या कॉलेज का हर फैसला छात्रों की जिंदगी और सुरक्षा को ध्यान में रखकर और मानवीय दृष्टिकोण के साथ लिया जाना चाहिए. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. छात्र की मौत की वास्तविक परिस्थितियां और इसके पीछे की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. 

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