टीपू सुल्तान: 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों से जीता था पहला युद्ध

तमाम विवादों के बावजूद इतिहास के पन्नों से टीपू सुल्तान का नाम मिटा पाना असंभव है. 20 नवंबर 1750 में कर्नाटक के देवनाहल्ली में जन्मे टीपू का पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब था. आइए जानें उनके बारे में.

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Tipu Sultan Tipu Sultan

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:41 AM IST

टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवंबर 1750 में कर्नाटक के देवनाहल्ली में हुआ था. उनके पिता का नाम हैदर अली और मां का फखरुन्निसां था. उनके पिता मैसूर साम्राज्य के एक सैनिक थे लेकिन अपनी ताकत के बल पर वो 1761 में मैसूर के शासक बने. टीपू सुल्तान को इतिहास न केवल एक योग्य शासक और योद्धा के तौर पर देखता है बल्क‍ि वो विद्वान भी थे.

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उनकी वीरता से प्रभवित होकर उनके पिता हैदर अली ने ही उन्हें शेर-ए-मैसूर के खिताब से नवाजा था. अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए 4 मई 1799 को टीपू सुल्तान की मौत हो गई.  

जानें टीपू सुल्तान से जुड़ी ये खास बातें 

 

1. टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइल मैन माना जाता है. बीबीसी की एक खबर के मुताबिक, लंदन के मशहूर साइंस म्यूजियम में टीपू सुल्तान के रॉकेट रखे हुए हैं. इन रॉकेटों को 18वीं सदी के अंत में अंग्रेज अपने साथ लेते गए थे.

2. टीपू द्वारा कई युद्धों में हारने के बाद मराठों एवं निजाम ने अंग्रेजों से संधि कर ली थी. ऐसी स्थिति में टीपू ने भी अंग्रेजों को संधि का प्रस्ताव दिया. वैसे अंग्रेजों को भी टीपू की शक्ति का अहसास हो चुका था इसलिए छिपे मन से वे भी संधि चाहते थे. दोनों पक्षों में वार्ता मार्च, 1784 में हुई और इसी के फलस्वरूप 'मंगलौर की संधि' सम्पन्न हुई.

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3. टीपू ने 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के विरुद्ध पहला युद्ध जीता था.

4. 'पालक्काड कि‍ला', 'टीपू का कि‍ला' नाम से भी प्रसिद्ध है. यह पालक्काड टाउन के मध्य भाग में स्थित है. इसका निर्माण 1766 में किया गया था. यह कि‍ला भारतीय पुरातात्त्विक सर्वेक्षण के अंतर्गत संरक्षित स्मारक है.

5. टीपू सुल्तान खुद को नागरिक टीपू कहा करता था.

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क्यों उनके नाम पर होता है विवाद 

हिंदू संगठन दावा करते हैं कि टीपू धर्मनिरपेक्ष नहीं था, बल्कि एक असहिष्णु और निरंकुश शासक था. वह दक्षिण का औरंगजेब था जिसने लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया और बड़ी संख्या में मंदिरों को गिराया. साल 2015 में आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य में भी टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध में टीपू को दक्षिण का औरंगजेब बताया गया है, जिसने जबरन लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया.

19वीं सदी में ब्रिटिश गवर्मेंट के अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब 'मालाबार मैनुअल' में लिखा है कि कैसे टीपू सुल्तान ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू सुल्तान ने पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी और उनके बच्चों को उन्हीं के गले में बांध पर लटकाया गया. इस किताब में विलियम ने टीपू सुल्तान पर मंदिर, चर्च तोड़ने और जबरन शादी जैसे कई आरोप भी लगाए हैं. यहां 1964 में प्रकाशित किताब 'लाइफ ऑफ टीपू सुल्तान' में कहा गया है कि सुल्तान ने मालाबार क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा हिंदुओं और 70,000 से ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया.

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सांप्रदायिक दृष्टिकोण से भले ही उन पर आरोप लग रहे हैं, लेकिन टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइलमैन कहा जाता है. बीबीसी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के मिसाइल कार्यक्रम के जनक एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब 'विंग्स ऑफ़ फ़ायर' में लिखा है कि उन्होंने नासा के एक सेंटर में टीपू की सेना की रॉकेट वाली पेंटिग देखी थी. असल में टीपू और उनके पिता हैदर अली ने दक्षिण भारत में दबदबे की लड़ाई में अक्सर रॉकेट का इस्तेमाल किया था.

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