ट्रांसजेंडर पहचान बताई तो परिवार ने ठुकराया! जान‍िए ट्रांसवुमन डॉक्टर की द‍िल को छू लेने वाली कहानी

गरीबी, परिवार का विरोध और नौकरी में भेदभाव का सामना करने के बाद से अब कोय्याला रूथ जॉन पॉल ने हैदराबाद में इमरजेंसी मेडिसिन में पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी कर ली है. उनकी इस सफलता की कहानी में तेलंगाना के हाईकोर्ट के एक आदेश ने सबसे बड़ा रोल निभाया है. 

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उन्हें परिवार और नौकरी से ठुकराया गया: तेलंगाना की एक ट्रांस महिला ने कैसे MD की डिग्री हासिल की (Image: Facebook/Mitr Clinic - Hyderabad) उन्हें परिवार और नौकरी से ठुकराया गया: तेलंगाना की एक ट्रांस महिला ने कैसे MD की डिग्री हासिल की (Image: Facebook/Mitr Clinic - Hyderabad)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

तेलंगाना की रहने वाली कोय्याला रूथ जॉन पॉल की कहानी हर उस इंसान को प्रोत्साहित कर रही है, जो अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. हालात कितने ही खराब क्यों न हो जाए, वह कभी हार नहीं मानते हैं. कोय्याला ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया, मां ने मजदूरी करके परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभाली. पढ़ाई में हमेशा से ही अच्छी रहने और लगातार मेहनत करने के दम पर रूथ ने मेडिकल की पढ़ाई भी पूरी कर ली.

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लेकिन जब  उन्होंने अपने परिवार को  खुद के ट्रांसजेंडर होने की बात बताई, तो उन्हें इसके बाद कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. एमबीबीएस पूरा करने के बाद भी कई अस्पतालों ने उन्हें ट्रांसजेंडर होने की वजह से नौकरी देने से मना कर दिया. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. केवल मेडिकल के फील्ड में अपनी जगह ही नहीं बनाई बल्कि नौकरी और एडमिशन में होने वाली भेदभाव को लेकर तेलंगाना का दरवाजा भी खटखटाया. इसके बाद से उन्हें हैदराबाद के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से इमरजेंसी मेडिसिन में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हासिल कर ली. 

बचपन से पढ़ाई में थीं आगे

कोय्याला रूथ जॉन पॉल तेलंगाना के खम्मम जिले की रहने वाली हैं. बचपन में ही सिर से पिता का हाथ उठ जाने की वजह से उन्हें और उनके परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा.परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई, जो दिहाड़ी मजदूरी करके घर चलाती थीं. आर्थिक मुश्किलों के बावजूद रूथ ने पढ़ाई जारी रखी और 12वीं कक्षा तक अपनी क्लास में अच्छा प्रदर्शन किया. उनकी पढ़ाई को देखते हुए उन्हें 11वीं और 12वीं की पढ़ाई मुफ्त करने के साथ NEET की तैयारी के लिए भी मुफ्त कोचिंग मिली. इसके बाद उन्होंने हैदराबाद के एक निजी मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की. 

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परिवार ने किया विरोध, नौकरी मिलने में भी आई मुश्किल

रूथ की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने 20 साल की उम्र में अपने परिवार को अपने ट्रांसजेंडर होने के बारे में बताया. उस समय वब एमबीबीएस के तीसरे वर्ष में थीं. उन्हें लगा ये बात जानकर परिवार उनका साथ देगा लेकिन परिवार ने साथ देने के बजाय उनसे दूरी बना ली. इतना ही नहीं परिवार ने तो उन्हें घर आने से भी मना कर दिया. लेकिन इसका असर उन्होंने कभी अपने पढ़ाई पर पड़ने नहीं दिया. इसके बाद भी उन्होंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई जारी रखी और इसमें सफलता हासिल की. 

हाईकोर्ट के आदेश से मिली आगे पढ़ने की राह

पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिला लेते समय रूथ को एक और समस्या का सामना करना पड़ा.उस समय ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के दाखिले को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं थे.ऐसे में उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया. अदालत के अनुकूल आदेश के बाद उनके लिए पोस्टग्रेजुएट मेडिकल की पढ़ाई का रास्ता खुला. दाखिले के दौरान ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की कैटेगरी तय करने के तरीके पर भी उन्होंने सवाल उठा.खुद को महिला मानने वाली रूथ ने इस मुद्दे को नजरअंदाज करने के बजाय चुनौती देने का फैसला किया. 

समाज से भेदभाव खत्म करने की अपील

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रूथ का कहना है कि ट्रांसजेंडर लोगों को भी अपनी मेहनत और काबिलियत के आधार पर आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलने चाहिए.उनकी कहानी सिर्फ मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने की उपलब्धि नहीं है, बल्कि शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलने की जरूरत को भी सामने लाती है. आर्थिक तंगी, परिवार के विरोध और नौकरी पाने में आई मुश्किलों के बावजूद रूथ ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपना सफर जारी रखा.अब इमरजेंसी मेडिसिन में पोस्टग्रेजुएट डिग्री पूरी करना उनके लंबे संघर्ष की एक अहम उपलब्धि है. 

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