नई नौकरी मिलना किसी भी कर्मचारी के लिए राहत और उत्साह दोनों लेकर आता है. नई कंपनी, नई टीम और नई जिम्मेदारियों के बीच एक शब्द बार-बार सुनने को मिलता है- प्रोबेशन पीरियड. शुरुआत के कुछ महीने कर्मचारी के लिए भी खुद को साबित करने के होते हैं और कंपनी के लिए यह समझने का समय होता है कि नया कर्मचारी काम और टीम के साथ कितना बेहतर तालमेल बैठा पा रहा है.
लेकिन इसी दौरान कई कर्मचारियों के मन में एक सवाल भी रहता है कि अगर प्रोबेशन के दौरान कंपनी को काम पसंद नहीं आया तो क्या नौकरी जा सकती है? क्या कंपनी बिना नोटिस के बाहर कर सकती है? और प्रोबेशन पूरा होने के बाद क्या नौकरी अपने आप पक्की हो जाती है? इन सवालों को लेकर अक्सर कर्मचारी के बीच दुविधा होती है. ऐसे में चलिए समझते हैं कि आखिर प्रोबेशन पीरियड क्या होता है, इस दौरान कर्मचारी के क्या अधिकार होते हैं और किन परिस्थितियों में कंपनी नौकरी खत्म कर सकती है.
क्या होता है प्रोबेशन पीरियड?
नौकरी की शुरुआत में प्रोबेशन का मतलब समझे तो, परीक्षण या आकलन की अवधि है. मान लीजिए जब कोई कर्मचारी नई कंपनी में नौकरी शुरू करता है तो कंपनी शुरुआती कुछ समय में उसके काम को परखती है. इस दौरान कंपनी यह देख सकती है कि कर्मचारी अपना काम ठीक से कर रहा है या नहीं, उसकी परफॉर्मेंस कैसी है, वह टीम के साथ कैसे काम करता है और कंपनी की जिम्मेदारियों के हिसाब से खुद को ढाल पा रहा है या नहीं. हालांकि, प्रोबेशन की अवधि कंपनी और नौकरी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. इसकी जानकारी आमतौर पर अपॉइंटमेंट लेटर में दी जाती है.
क्या कंपनी दिखा सकती है बाहर का रास्ता?
जो सवाल नए फ्रेशर्स के बीच हमेशा उठता है, वह ये है कि क्या कंपनी प्रोबेशन के दौरान कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखा सकती है. अगर अपॉइंटमेंट लेटर में ऐसी शर्त दी गई है कि प्रोबेशन के दौरान कंपनी कर्मचारी की सेवा खत्म कर सकती है, तो कंपनी उस शर्त के अनुसार कार्रवाई कर सकती है? तो इसका जवाब है हां. अदालतों ने भी कई मामलों में माना है कि probationer की नियुक्ति परीक्षण के आधार पर की जाती है और अगर उसका काम उम्मीदों के हिसाब से नहीं पाया जाता तो सेवा खत्म की जा सकती है.ऐसा सिर्फ काम खराब होने पर ही हो, यह जरूरी नहीं है. कंपनी की तय शर्तों के अनुसार परफॉर्मेंस, suitability या probation के दौरान कर्मचारी के overall work assessment को भी देखा जा सकता है.
क्या प्रोबेशन में नोटिस देना जरूरी है?
इसका जवाब हर नौकरी के लिए एक जैसा नहीं है. अगर अपॉइंटमेंट लेटर में इस बात का जिक्र किया गया है कि प्रोबेशन के दौरान सेवा बिना नोटिस खत्म की जा सकती है, तो ऐसी स्थिति में कंपनी उस शर्त के अनुसार कार्रवाई कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई मामलों में नियुक्ति पत्र की ऐसी शर्तों को महत्व दिया गया है. लेकिन वहीं, अगर अपॉइंटमेंट लेटर में नोटिस की अवधि तय है तो कंपनी को उस शर्त और लागू नियमों को देखना होगा. इसलिए नौकरी ज्वाइन करते समय कर्मचारी अपॉइंटमेंट लेटर में नोटिस पीरियड, प्रोबेशन पीरियड और टर्मिनेशन की शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी है.
क्या प्रोबेशन खत्म होते ही जॉब हो जाती है पक्की?
कर्मचारी को कई बार ऐसा भी लगता है कि 60 दिन या 90 दिन में जब उनका प्रोबेशन खत्म होता है, तो उनकी नौकरी पक्की हो जाती है लेकिन ये जरूरी नहीं. कई नियुक्ति पत्रों में साफ कर दिया जाता है कि प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद उन्हें कंपनी का कंफर्म मेंबर माना जाता है लेकिन जब तक कंपनी की ओर से लिखित में पुष्टि नहीं आ जाती, तब तक नौकरी पक्की नहीं मानी जाती. ऐसे मामलों में सिर्फ प्रोबेशन की अवधि पूरी हो जाने से ऑटोमैटिक कन्फर्मेशन नहीं माना जाता. ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ मामलों में कंपनी प्रोबेशन की अवधि बढ़ा भी सकती है, अगर अपॉइंटमेंट लेटर या लागू सर्विस रूल्स इसकी अनुमति देते हैं.
किन वजहों से बढ़ सकता है प्रोबेशन?
अब सवाल ये है कि आखिर कंपनी किस वजह से प्रोबेशन पीरियड बढ़ा सकती है? इन मामलों में अगर कंपनी को लगता है कि कर्मचारी का प्रदर्शन अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है, तो कंपनी की शर्तों के अनुसार प्रोबेशन बढ़ा सकती है. उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी को छह महीने के प्रोबेशन पर रखा गया है और कंपनी उसके काम का पूरी तरह आकलन नहीं कर पाती या प्रदर्शन में सुधार की जरूरत महसूस होती है, तो applicable terms के तहत प्रोबेशन बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, इसकी कोई एक तय अवधि सभी कंपनियों पर लागू नहीं होती. इसके लिए अपॉइंटमेंट लेटर और कंपनी के नियम देखना जरूरी है.
आजतक एजुकेशन डेस्क