सारा काम AI करेगा, तो सीनियर कौन बनेगा? माइक्रोसॉफ्ट के बायआउट के बाद बढ़ी चिंता

फ्रेशर्स को कोई दिक्कत होती है तो वह सीनियर के पास उसका हल मांगने के लिए जाते हैं. लेकिन अगर वहीं काम AI कर देगा तो सीनियर कौन बनेगा? यह सवाल ऐसे समय में सामने आया है जब माइक्रोसॉफ्ट में करीब 60 हजार कर्मचारियों को बायआउट ऑफर दिया है.

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सब कर देगा AI, तो कैसे सीनियर पोस्ट पर पहुंचेंगे युवा. सब कर देगा AI, तो कैसे सीनियर पोस्ट पर पहुंचेंगे युवा.

रौशनी चक्रवर्ती

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:06 AM IST

सोचिए कि आज आप अपनी पहली नौकरी जॉइन करते हैं. आपका मैनेजर आपसे एक रिपोर्ट तैयार करने को कहता है और आप इसे मिनटों में पूरा करने के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं. आप घंटों डीबग किए बिना कोड लिखते हैं. आप स्प्रेडशीट में लाइन-बाय-लाइन काम किए बिना डेटा को एनालाइज करते हैं. आप जल्दी काम खत्म करते हैं, आपकी कंपनी का समय बचता है और ऐसा लगता है कि हर कोई जीत रहा है. लेकिन इस बीच जो सवाल उठ रहा है, वह ये है कि अगर आपका सारा काम AI ही कर दे रहा है, तो कंपनी को आपकी जरूरत क्यों है?

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माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व कर्मचारी मेरिल फर्नांडो ने 27 अक्टूबर को कहा था कि कंपनी को बेहतर तरीके से काम करने के लिए कम लोगों और ज्यादा एआई एजेंटों की जरूरत है. तीन महीने पहले माइक्रोसॉफ्ट छोड़कर अपनी कंपनी शुरू करने वाले फर्नांडो के मुताबिक, मैनेजमेंट की कई परतों और संगठन के अलग-अलग हिस्सों के कारण काम की रफ्तार धीमी हो रही थी.

फर्नांडो की बात माइक्रोसॉफ्ट के कामकाज को लेकर थी. इससे यह साबित नहीं होता कि कंपनी का बायआउट कार्यक्रम एआई के कारण शुरू हुआ. हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब कंपनियां यह देख रही हैं कि एआई की मदद से छोटी टीमें कितना काम कर सकती हैं.

जो काम देता है एक्सपीरियंस, वह कर रहा है AI

कोई भी काम के पहले दिन एक्सपर्ट नहीं बन जाता है. एक युवा एनालिस्ट स्प्रेडशीट बनाकर, गलतियां ढूंढकर और यह पता लगाकर सीखता है कि नंबर क्यों नहीं जुड़ रहे हैं. 

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वहीं, दूसरा सॉफ्टवेयर इंजीनियर कोड लिखकर, चीजों को तोड़कर और बग ढूंढने में घंटों लगाकर सीखता है.  एक मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव फेल होने वाले कैंपेन को टेस्ट करके सीखता है. एक जर्नलिस्ट कॉल करके, डॉक्यूमेंट्स चेक करके और यह पता लगाकर सीखता है कि कहानी का पहला पैरा अक्सर गलत होता है. 

इसमें से ज्यादातर काम बार-बार होने वाला होता है. यह फ्रस्ट्रेटिंग भी हो सकता है लेकिन यहीं पर लोग जजमेंट डेवलप करते हैं. आप सीखते हैं कि कौन से नंबर शक वाले लगते हैं, कौन से सवाल पूछने चाहिए, कब कोई सोर्स भरोसे लायक नहीं होता और क्यों सही लगने वाला जवाब समझ में नहीं आता.

आप पैटर्न पहचानने लगते हैं क्योंकि आपने खुद उसे सॉल्व करने में अपना दिमाग लगाया है. अब सोचिए कि AI उस काम को तब तक कर दे जब तक किसी नए व्यक्ति को मौका न मिल जाए. 

रिपोर्ट पहले से ही तैयार है. कोड पहले से ही लिखा हुआ है. डेटा का एनालिसिस पहले से ही किया जा चुका है. नए कर्मचारी के शुरू करने का तरीका समझने से पहले ही पहला ड्राफ्ट तैयार है, तो क्या? 

जूनियर पोस्ट की नौकरियों पर उठ रहे हैं सवाल 

ऐसे में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों में काम करने का तरीका भी बदल रहा है. कई काम एआई की मदद से किए जा रहे हैं, जो पहले जूनियर कर्मचारी संभालते थे. इससे कंपनियों को कम लोगों के साथ काम करने में मदद मिल रही है, लेकिन नई नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं के लिए ये परेशानी बढ़ सकती है.

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गोल्डमैन सैक्स के एशिया प्रशांत क्षेत्र के अध्यक्ष केविन स्नीडर ने अक्टूबर में कहा था कि युवा कर्मचारी अब एआई एजेंटों को संभालते हुए अपना करियर शुरू कर रहे हैं. उनके क्षेत्र में जापान शामिल नहीं है. पहले कर्मचारी शुरुआती स्तर के काम करते हुए अनुभव हासिल करते थे और फिर धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचते थे. अब यह तरीका बदल रहा है.

क्या एआई की वजह से कम हो रही जूनियर्स की संख्या? 

क्लॉड एआई बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक की अक्टूबर 2026 की रिसर्च के मुताबिक, कंपनी के तकनीकी कर्मचारियों में जूनियर कर्मचारियों की हिस्सेदारी 2025 की शुरुआत के 21% से घटकर 14% रह गई. वहीं, जूनियर तकनीकी भर्तियों की हिस्सेदारी 27% से घटकर 9% तक पहुंच गई है.

हालांकि, इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि इस गिरावट की वजह सिर्फ एआई है. कंपनियों की भर्ती और कारोबारी जरूरतें भी बदलती रहती हैं. फिर भी इससे यह सवाल उठता है कि जब शुरुआती स्तर के काम कम होंगे, तो युवाओं को अनुभव हासिल करने का मौका कैसे मिलेगा. जूनियर नौकरियां सिर्फ पहली सैलरी पाने का जरिया नहीं होतीं. इन्हीं कामों से कर्मचारी सीखते हैं और आगे चलकर इंजीनियर, विश्लेषक और मैनेजर जैसी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होते हैं.

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स्टार्टअप भी छोटी टीमों से चला रहे काम

एआई का क्षेत्र सीमित नहीं रह गया है. वह हर फील्ड में अपनी पहचान बना रहा है. स्टार्टअप के क्षेत्र में भी इसका असर अब दिखाई देने लगा है. एलिवेशन कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 52% सीईओ कुछ विभागों में भर्ती रोक रहे थे या टीमों का आकार घटा रहे थे. इनमें इंजीनियरिंग, मार्केटिंग, ग्राहक सहायता और संचालन जैसे विभाग शामिल थे.
एआई की मदद से छोटी टीमें भी कोड लिखने, जानकारी का विश्लेषण करने, कंटेंट तैयार करने और ग्राहकों के सवालों के जवाब देने जैसे काम कर सकती हैं. इससे स्टार्टअप को कम लोगों के साथ काम शुरू करने और खर्च घटाने में मदद मिल सकती है.

लेकिन अगर कई कंपनियां ऐसा करती हैं, तो फ्रेशर्स के लिए शुरुआती नौकरियों के मौके कम हो सकते हैं. इसका असर आगे चलकर भी दिख सकता है, क्योंकि आज कम लोगों को अनुभव मिलेगा तो भविष्य में अनुभवी कर्मचारियों की कमी की चुनौती पैदा हो सकती है.

नए कर्मचारी कैसे हासिल करेंगे अनुभव? 

अब सवाल यही है कि अगर कोई युवा एक्सपीरियंस ही हासिल नहीं कर पाएगा तो, वह सीनियर पद तक कैसे पहुंचेगा? एआई कई काम तेजी से कर सकता है, लेकिन कर्मचारियों को यह समझना भी जरूरी है कि उसका दिया जवाब सही है या नहीं. काम के दौरान गलतियों से सीखना, समस्याओं को समझना और मुश्किल फैसले लेना अनुभव का हिस्सा है.

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ऐसे में कंपनियों को नए कर्मचारियों को सीखने के मौके देने होंगे. वे एआई से तैयार काम की जांच कर सकते हैं, मुश्किल मामलों को समझ सकते हैं और ग्राहकों के साथ सीधे काम करके अनुभव हासिल कर सकते हैं. मैनेजरों को भी उन्हें यह समझाना होगा कि कोई समाधान क्यों सही है और एआई पर कब भरोसा करना चाहिए.

एआई के दौर में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितनी नौकरियां खत्म होंगी. एक बड़ी चिंता यह भी है कि अगर शुरुआती स्तर के काम एआई करने लगेगा, तो युवा कर्मचारी अपने करियर के लिए जरूरी अनुभव कहां से हासिल करेंगे. कंपनियों को काम में एआई का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को सीखने और आगे बढ़ने का रास्ता भी देना होगा.

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