सोचिए जरा आप अपने करियर की शुरुआत हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा कमाने का मौका मिले, दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिले, साथ ही यूरोप, एशिया और अमेरिका के अलग-अलग जगहों पर भी घूमने का मौका मिले. मर्चेंट नेवी में काम करने वाले कई अधिकारियों के लिए यह सपना नहीं बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी है. हालांकि, यह नौकरी सिर्फ सफर और अच्छी कमाई तक सीमित नहीं है. इसमें महीनों तक समुद्र में रहकर काम करना पड़ता है और कई चुनौतियों का सामना भी करना होता है.
दुनिया भर में इसका काम बहुत बड़ा है. इसमें करीब 19 लाख नाविक काम करते हैं. वहीं, 1 लाख से ज्यादा मालवाहक जहाज समुद्र के रास्ते दुनिया के 80 से 90 प्रतिशत सामान को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाते हैं. यही वजह है कि मर्चेंट नेवी दुनिया के व्यापार में अहम भूमिका निभाती है.
क्या है खास बात?
लेकिन इस करियर में दिलचस्प बात यह है कि जहाज पर काम करने वाले सभी लोग हमेशा उसी देश के नहीं होते, जिस देश का झंडा जहाज पर लगा होता है. उदाहरण के लिए किसी जहाज में भारतीय कप्तान, फिलिपिनो इंजीनियर और यूक्रेनी अधिकारी एक साथ काम कर सकते हैं, भले ही वह जहाज किसी दूसरे देश में रजिस्टर्ड हो. भारतीय नाविकों की अच्छी तकनीकी जानकारी, अंग्रेजी भाषा पर पकड़ और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाणपत्रों की वजह से उनकी दुनिया भर में काफी मांग है. कई भारतीय नाविक बड़े-बड़े जहाजों पर कप्तान और मुख्य अभियंता जैसे बड़े पदों तक पहुंचते हैं.
अब सवाल यह है कि आखिर मर्चेंट नेवी में करियर बनाने के लिए क्या करना होता है? आइए जानते हैं.
क्या करते हैं अधिकारी?
मर्चेंट नेवी के अधिकारी उन बड़े जहाजों को चलाने और संभालने की जिम्मेदारी निभाते हैं, जो दुनिया भर में तेल, कंटेनर, वाहन, खाद्य सामग्री, रसायन और दूसरे सामानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं. भारतीय नौसेना देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाली सैन्य ताकत है, जबकि मर्चेंट नेवी एक व्यावसायिक क्षेत्र है, जिसका काम समुद्र के रास्ते सामानों का परिवहन करना होता है.
डेक अधिकारी
डेक अधिकारी जहाज के डायरेक्शन तय करने, रास्ते की प्लानिंग बनाने, माल की देखभाल करने और जहाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं.
समुद्री इंजीनियर
समुद्री इंजीनियर जहाज के इंजन, मशीनों, जनरेटर और चलाने वाली प्रणालियों की देखरेख और मरम्मत का काम करते हैं.
तकनीकी अधिकारी (ETO)
ETO जहाज की बिजली व्यवस्था, ऑटोमेशन सिस्टम और संचार उपकरणों को संभालते हैं.
मर्चेंट नेवी में अधिकारी बनने के लिए क्या करना होता है?
मर्चेंट नेवी में एक नए अधिकारी का करियर अनुभव, ट्रेनिंग और जरूरी परीक्षाएं पास करने के बाद धीरे-धीरे आगे बढ़ता है. एक डेक अधिकारी का सफर आमतौर पर इस तरह होता है-
प्रशिक्षु कैडेट → तृतीय अधिकारी → द्वितीय अधिकारी → मुख्य अधिकारी → कप्तान
इसी तरह समुद्री इंजीनियर भी अनुभव और योग्यता के आधार पर आगे बढ़ते हुए मुख्य इंजीनियर के पद तक पहुंचते हैं. यह जहाज के सबसे जिम्मेदार और अच्छे सैलरी वाले पदों में से एक माना जाता है.
कौन-कौन से होने चाहिए स्किल?
सिर्फ पढ़ाई और डिग्री होना ही मर्चेंट नेवी में सफल होने के लिए काफी नहीं है. शिपिंग कंपनियां ऐसे अधिकारियों को पसंद करती हैं, जो मुश्किल हालात में भी सही फैसले ले सकें. इस दौरान उम्मीदवारों में कई खूबियां देखी जाती हैं-
आपात स्थिति में शांत रहकर काम करने की क्षमता.
अलग-अलग देशों के लोगों के साथ अंग्रेजी में बेहतर बातचीत करना.
लंबे समय तक काम करने के बावजूद ध्यान और जिम्मेदारी बनाए रखना.
तकनीकी समस्याओं को जल्दी समझकर हल करना.
सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन करना.
अलग-अलग संस्कृतियों और समुद्र में रहने की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना.
भविष्य में टीम को संभालने और नेतृत्व करने की क्षमता.
प्रायोजन (Sponsorship) चयन के दौरान इंटरव्यू में अक्सर इन्हीं बातों और उम्मीदवार की सोच, व्यवहार और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता को परखा जाता है.
क्यों होती है भारतीयों की नियुक्ति?
भारतीय अधिकारी मर्चेंट नेवी में अपनी मेहनत और काबिलियत के लिए दुनियाभर में पहचान रखते हैं. इसके पीछे कई वजहें हैं—
भारत में मिलने वाली अच्छी समुद्री शिक्षा और ट्रेनिंग .
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणपत्र और ट्रेनिंग, जो हर पेशेवर नाविक के लिए जरूरी होती है.
अंग्रेजी भाषा में बेहतर संवाद करने की क्षमता.
दुनिया भर की शिपिंग कंपनियों के लिए उनकी अच्छी कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धी लागत.
अलग-अलग देशों के जहाजों पर काम करने का लंबा अनुभव.
इन्हीं खूबियों की वजह से भारतीय नाविकों और अधिकारियों की वैश्विक मर्चेंट नेवी उद्योग में काफी मांग रहती है.
कैसे करते हैं आवेदन?
12वीं कक्षा के बाद मर्चेंट नेवी में अधिकारी बनने के लिए छात्रों को कुछ जरूरी योग्यताएं पूरी करनी होती हैं. इसके लिए आमतौर पर 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स (PCM) और अंग्रेजी विषय होना जरूरी होता है. छात्र की पढ़ाई किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड जैसे CBSE, CISCE या अन्य मान्य बोर्ड से होनी चाहिए.
अधिकांश संस्थान PCM और अंग्रेजी में न्यूनतम अंकों की मांग करते हैं. इसके अलावा उम्मीदवार की उम्र और मेडिकल फिटनेस भी तय मानकों के अनुसार होनी चाहिए.
मेडिकल फिटनेस में मुख्य रूप से शामिल हैं-
अच्छी नजर (दृष्टि मानक कोर्स के अनुसार अलग हो सकते हैं).
रंगों की पहचान करने की क्षमता.
शारीरिक रूप से फिट होना.
सुनने की क्षमता सही होना
जहाजरानी महानिदेशालय से मान्यता प्राप्त डॉक्टर से मेडिकल जांच करवाना.
वहीं, कॉमर्स या आर्ट्स स्ट्रीम से 12वीं करने वाले छात्र आमतौर पर मर्चेंट नेवी के अधिकारी बनने वाले कोर्स के लिए पात्र नहीं होते. हालांकि, उनके लिए कुछ अन्य पदों के विकल्प अलग नियमों के साथ उपलब्ध हो सकते हैं.
करना चाहिए कौन सा कोर्स?
मर्चेंट नेवी में अधिकारी बनने के लिए 12वीं के बाद कई तरह के कोर्स किए जा सकते हैं. इनमें कुछ प्रमुख कोर्स शामिल हैं-
बीएससी नॉटिकल साइंस – यह कोर्स डेक अधिकारी बनने के लिए किया जाता है. इसमें जहाज चलाने, नेविगेशन और समुद्री संचालन की ट्रेनिंग दी जाती है.
डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस (DNS) – यह भी डेक अधिकारी बनने का एक रास्ता है. समुद्री सेवा पूरी करने के बाद इसे डिग्री में बदला जा सकता है.
बीई/बीटेक मरीन इंजीनियरिंग – यह कोर्स जहाज के इंजन और मशीनरी की देखभाल करने वाले समुद्री इंजीनियर बनने के लिए होता है.
ग्रेजुएट मरीन इंजीनियरिंग (GME) – यह उन छात्रों के लिए है, जिन्होंने पहले से मैकेनिकल इंजीनियरिंग या इससे जुड़े विषयों में डिग्री पूरी कर ली है.
इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर (ETO) कोर्स- इसमें जहाज की बिजली व्यवस्था, ऑटोमेशन और संचार सिस्टम को संभालने की ट्रेनिंग दी जाती है.
कर सकते हैं इतनी कमाई?
| पद | सैलरी |
| डेक कैडेट | ₹30,000 से ₹80,000 तक (वजीफा) |
| तृतीय अधिकारी | ₹1 लाख से ₹3 लाख तक |
| द्वितीय अधिकारी | ₹2 लाख से ₹4 लाख तक |
| मुख्य अधिकारी | ₹4 लाख से ₹8 लाख तक |
| कप्तान | ₹6 लाख से ₹10 लाख या उससे अधिक |
| जूनियर मरीन इंजीनियर | ₹1 लाख से ₹3 लाख तक |
| मुख्य अभियंता | ₹6 लाख से ₹10 लाख या उससे अधिक |
| इलेक्ट्रो टेक्निकल ऑफिसर (ETO) | ₹2 लाख से ₹5 लाख तक |
आजतक एजुकेशन डेस्क