घर-गाड़ी का सपना हुआ पुराना, Gen Z ने बदली सक्सेस की परिभाषा!

जेन जी के लिए सफलता का मतलब अब सिर्फ पक्की नौकरी, अपना घर और गाड़ी नहीं है. ये पीढ़ी लंबी EMI और एक जगह बंधकर रहने के बजाय आजादी, घूमने-फिरने, मेंटल हेल्थ और काम-काज के बीच संतुलन को अहमियत दे रही है. किराए के घर से लेकर रिमोट वर्क तक, जानिए कैसे जेन जी सफलता के पुराने पैमानों को बदल रही है.

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सक्सेस के लिए क्या हैं जेन जी का पैमाना? सक्सेस के लिए क्या हैं जेन जी का पैमाना?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

पिछली पीढ़ियों, यानी मिलेनियल्स और जेन एक्स के लिए 30 की उम्र तक पक्की नौकरी, अच्छा बैंक बैलेंस, अपना घर और दरवाजे पर खड़ी कार सक्सेस का बड़ा पैमाना थे. लेकिन 2026 में 18 से 26 साल की जेन जी, यानी वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं ने इस सोच को खारिज कर दिया है.

आज का युवा 30 साल की उम्र में 20 साल का होम लोन लेने के बजाय किराए के फ्लैट में रहना और दुनिया घूमना ज्यादा पसंद कर रहा है. होम लोन की EMI और 9-5 की नौकरी से दूर ये पीढ़ी प्रॉपर्टी के मुकाबले अनुभव, दिमागी सुकून, काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन और अपनी शर्तों पर जीने को ज्यादा अहमियत दे रही है.

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30 साल की EMI बनाम आजादी, LID बनाम EMI

जेन जी ने अपने माता-पिता और बड़े भाई-बहनों को पूरी जवानी घर की EMI और गाड़ियों की किश्तें चुकाते देखा है. उसने ये भी देखा है कि प्रॉपर्टी खरीदने के चक्कर में लोग पूरी जिंदगी एक ही शहर और एक ही नौकरी से बंध जाते हैं.

आज का युवा 25-30 साल के होम लोन को वित्तीय सुरक्षा के बजाय एक तरह की मानसिक गुलामी मानता है. वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा किश्तों में देने के बजाय अनुभवों पर खर्च करना चाहता है. इनमें यात्रा करना, अपनी पसंद के काम करना और अपने पर्सनल ग्रोथ शामिल हैं.

संपत्ति के मालिक बनने से ज्यादा सदस्यता और किराए का मॉडल

यह पीढ़ी म्यूजीक सुनने के लिए सीडी नहीं खरीदती, बल्कि स्पॉटिफाई चुनती है. फिल्मों के लिए थिएटर के बजाय नेटफ्लिक्स और आने-जाने के लिए उबर या ओला का इस्तेमाल करती है. मालिकाना हक का विचार अब उसके लिए पहले जैसा अहम नहीं रहा है.

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जेन जी मानती है कि किराए के घर में रहना आर्थिक रूप से ज्यादा समझदारी भरा हो सकता है. इससे बचा पैसा शेयर बाजार, इक्विटी या म्यूचुअल फंड्स में लगाकर बेहतर रिटर्न पाने की कोशिश की जा सकती है. यह पीढ़ी मकान में पैसा फंसाने के बजाय हाथ में नकदी रखना पसंद करती है.

यह भी पढ़ें: "पैसा, नौकरी और सुकून: Gen Z जिंदगी से क्या चाहता है?

काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन और दिमागी सुकून पहली प्राथमिकता

पुरानी पीढ़ी के लिए हफ्ते में 70 घंटे काम करना और स्वास्थ्य की बलि देना गर्व की बात होती थी. जेन जी के लिए मेंटल हेल्थ सबसे ऊपर है. वह ऐसी सफलता नहीं चाहती जो उसे अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दे या 24 घंटे तनाव में रखे.

जेन जी ने क्वाइट क्विटिंग और लाउड बजटिंग जैसे तरीकों से साफ किया है कि अगर कोई नौकरी या जीवनशैली उसका सुकून छीन रही है, तो वह उसे तुरंत छोड़ देगी. वहां कितना भी बड़ा पैकेज क्यों न मिल रहा हो, उसके लिए दिमागी शांति ज्यादा अहम है.

घर से काम और डिजिटल घुमंतू कल्चर

कोविड के बाद घर से काम और दूर रहकर की जाने वाली नौकरियों ने काम करने का तरीका बदल दिया है. आज के 20-22 साल के लड़के और लड़कियां लैपटॉप लेकर हिमाचल, गोवा या किसी भी शहर से काम कर रहे हैं. जब करियर ही एक जगह टिका नहीं है, तब एक शहर में पक्का मकान खरीदकर खुद को बांधना उन्हें बेवकूफी जैसा लगता है.

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जेन जी के लिए सफलता का मतलब अब बैंक खाते में बड़ी रकम या घर की चाबियां नहीं हैं. उसके लिए सफलता का मतलब आजादी, दिमागी सुकून, नया सीखने का मौका और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना है. यही वजह है कि यह पीढ़ी घर और गाड़ी के पुराने पैमाने से हटकर अनुभवों, आर्थिक आजादी और मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता दे रही है.

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