रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. DRDO ने ULPGM-V3 (Unmanned Aerial Vehicle Launched Precision Guided Missile-V3) नाम की प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल के अंतिम विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं. ये परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास डीआरडीओ टेस्ट रेंज में किए गए. इस मिसाइल को दोनों मोड - एयर-टू-ग्राउंड (जमीन पर हमला) और एयर-टू-एयर (हवा में हवा) में सफलतापूर्वक परीक्षित किया गया है.
ULPGM-V3 मिसाइल क्या है?
ULPGM-V3 एक स्वदेशी प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल है जो ड्रोन (UAV) से लॉन्च की जा सकती है. यह मिसाइल दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद वाहनों, हेलीकॉप्टरों, दूसरे ड्रोनों और हवाई टारगेट्स पर सटीक निशाना बनाकर नष्ट कर सकती है. यह मिसाइल हाई टेक्नोलॉजी वाली है. बेहद सटीक हमला करने में सक्षम है.
यह भी पढ़ें: अचानक इतनी गर्मी कैसे पड़ने लगती है मई-जून में? क्यों सूरज के सामने झुक जाती है धरती
परीक्षण के दौरान एक एडवांस ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (GCS) का इस्तेमाल किया गया, जिसमें ऑटोमैटिक रेडीनेस और लॉन्च की सुविधा है. इससे मिसाइल को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.
किन-किन संगठनों ने किया विकास?
यह मिसाइल हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) की अगुवाई में विकसित की गई है. इसके अलावा DRDO की अन्य लैब्स - डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) हैदराबाद, टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) चंडीगढ़ और हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) पुणे ने भी इसमें योगदान दिया है.
उत्पादन के लिए दो प्रमुख कंपनियों - भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) हैदराबाद और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी लिमिटेड हैदराबाद के साथ साझेदारी की गई है. परीक्षण के लिए बेंगलुरु की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी कंपनी के UAVs का इस्तेमाल किया गया.
यह भी पढ़ें: भारत की SSBN शक्ति का दुर्लभ दृश्य: विशाखापट्टनम में एक साथ नजर आईं चारों अरिहंत पनडुब्बियां
पूरी तरह स्वदेशी और आत्मनिर्भर
DRDO का कहना है कि इस मिसाइल का पूरा विकास और उत्पादन भारतीय रक्षा इकोसिस्टम में हुआ है. इसमें बड़ी संख्या में MSMEs और छोटी-बड़ी भारतीय कंपनियों ने भाग लिया है. परीक्षणों से साबित हो गया है कि भारत अब इस मिसाइल को बड़े पैमाने पर बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
ULPGM-V3 मिसाइल भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी. यह ड्रोन से लॉन्च होने वाली होने के कारण सैनिकों को खतरे में डाले बिना दूर से दुश्मन के लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता देगी.
खासकर आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा पर हमले और आधुनिक युद्ध में यह मिसाइल बहुत प्रभावी होगी. यह सफलता भारत को उन कुछ देशों में शामिल करती है, जो UAV लॉन्च प्रिसीजन मिसाइल बना सकते हैं. इससे विदेशी आयात पर निर्भरता भी कम होगी और रक्षा निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी.
शिवानी शर्मा