काला सागर में एक अभूतपूर्व घटना घटी है. यूक्रेनी नौसेना और रक्षा खुफिया यूनिट्स ने रूसी मानवरहित सतह पोत यानी समुद्री ड्रोन बोट्स को नष्ट कर दिया. यूक्रेनी सारगन 3000 नामक ड्रोन ने रूसी ड्रोन को डुबोया. यह दुनिया का पहला ऐसा युद्ध बताया जा रहा है जिसमें दो मानवरहित सतह पोत यानी ड्रोन बोट्स आमने-सामने भिड़े.
2022 से यूक्रेन काला सागर में रूसी बेड़े को चुनौती दे रहा है. ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. यूक्रेनी बलों ने रूसी ड्रोन को स्पॉट किया. यह संभवतः सुधारी गई ओर्कान टाइप का था. सारगन 3000 नजदीक पहुंचा. इस पर नॉर्वेजियन कोंग्सबर्ग का 12.7 मिमी प्रोटेक्टर गन लगा था.
वीडियो में दिखता है कि एम2 ब्राउनिंग .50 कैलिबर जैसी तोप से करीब एक हजार मीटर दूर से फायरिंग की गई. गोलियों की बौछार से रूसी ड्रोन क्षतिग्रस्त होकर डूब गया. यूक्रेनी नौसेना ने इसे मानवरहित नौसैनिक जहाजों के बीच पहला युद्ध करार दिया.
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सारगन 3000 की क्षमता और भूमिका
सारगन 3000 यूक्रेन का बहुउद्देश्यीय समुद्री ड्रोन है. इसे सीवूल्फ भी कहा जाता है. नॉर्डेक्स द्वारा निर्मित यह ड्रोन कोंग्सबर्ग के रिमोट वेपन स्टेशन से लैस है. यह सतह के लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है. पहले भी इसने रूसी जहाजों पर सफल हमले किए हैं. इसकी रेंज और पेलोड क्षमता इसे प्रभावी बनाती है.
रिमोट कंट्रोल से संचालित होने के कारण इसमें इंसानों के हताहत होने का खतरा नहीं होता. रूसी ड्रोन ओर्कान टाइप का था जो आक्रामक हमलों के लिए डिजाइन किया गया लगता है. इसमें रैमिंग चार्ज जैसी व्यवस्था हो सकती है. लेकिन यूक्रेनी ड्रोन की फायर पावर ने उसे पहले ही नष्ट कर दिया. यह घटना दिखाती है कि ड्रोन सिर्फ हमलावर नहीं बल्कि बचाव और इंटरसेप्शन के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं.
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काला सागर संघर्ष में ड्रोन की बढ़ती भूमिका
2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन ने सस्ते और प्रभावी समुद्री ड्रोन विकसित किए. मैगुरा जैसे ड्रोनों ने रूसी जहाजों को नुकसान पहुंचाया. रूसी काला सागर बेड़ा को अपने अड्डों की ओर पीछे हटना पड़ा. नोवोरोस्सिय्स्क जैसे बंदरगाह अब खतरे में हैं. रूस भी अपने यूएसवी विकसित कर रहा है लेकिन यूक्रेनी तकनीक ने बढ़त बनाए रखी है.
यह डुएल नई रणनीति की ओर इशारा करती है. अब सिर्फ बड़े जहाजों पर हमला नहीं बल्कि दुश्मन के ड्रोनों को भी निशाना बनाया जा रहा है. इससे समुद्री युद्ध का स्वरूप बदल रहा है. मानवरहित सिस्टम सस्ते, तेज और कम जोखिम वाले हैं. भविष्य में ऐसे और मुकाबले देखने को मिल सकते हैं.
कोंग्सबर्ग प्रोटेक्टर टर्रेट नाटो जहाजों पर भी इस्तेमाल होता है. 12.7 मिमी मशीन गन सटीक और शक्तिशाली है. एक हजार मीटर की दूरी से लक्ष्य भेदना ड्रोन के सेंसर और कंट्रोल सिस्टम की मजबूती दिखाता है. यूक्रेनी खुफिया इकाइयों ने पहले लक्ष्य का पता लगाया फिर ड्रोन को निर्देशित किया. यह समन्वय महत्वपूर्ण था.
यह घटना नौसैनिक युद्ध के इतिहास में मील का पत्थर है. पहले ड्रोन हवाई क्षेत्र में भिड़ते थे. अब समुद्र में भी ऐसा हुआ. यूक्रेन ने साबित किया कि छोटी लेकिन स्मार्ट तकनीक बड़ी ताकत को चुनौती दे सकती है. रूस के लिए यह चेतावनी है कि उसके ड्रोन भी असुरक्षित हैं.
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भविष्य की चुनौतियां
ऐसे युद्ध बढ़ने से काउंटर-ड्रोन तकनीक की जरूरत बढ़ेगी. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, जैमिंग और एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करने होंगे. दोनों पक्ष अपनी क्षमताएं बढ़ा रहे हैं. यूक्रेन के लिए यह मनोबल बढ़ाने वाली सफलता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवरहित युद्ध के नियम और नैतिक सवाल भी उठ सकते हैं.
काला सागर में तनाव जारी है. ड्रोन युद्ध अब नई सामान्य स्थिति बनता जा रहा है. सारगन 3000 की यह जीत यूक्रेनी नवाचार और साहस का प्रतीक है. यह दिखाती है कि आधुनिक संघर्ष में तकनीक कैसे निर्णायक भूमिका निभाती है. आगे और ऐसी घटनाओं की संभावना बनी हुई है जो समुद्री सुरक्षा की धारणा को बदल देंगी.
ऋचीक मिश्रा