भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk-1A कार्यक्रम में लंबे समय से चली आ रही इंजन सप्लाई की समस्या अब धीरे-धीरे कम होने लगी है. रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि साल के अंत तक भारत को GE एयरोस्पेस के 12 और F404 इंजन मिलने की उम्मीद है.
यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास पहले से 27 तेजस Mk-1A एयरफ्रेम तैयार पड़े हैं. अब तक 10 इंजन मिल चुके हैं. बाकी एयरफ्रेम को टेस्ट या रिजर्व इंजन से उड़ाया जा रहा है. अंतिम इंटीग्रेशन और वैलिडेशन का काम जारी है.
GE एयरोस्पेस ने हर महीने चार इंजन देने का वादा किया है. इससे सरकार का लक्ष्य पूरा होने में मदद मिलेगी कि 2026 के अंत तक कम से कम एक पूरा तेजस Mk-1A स्कॉड्रन इंडक्ट हो जाए. तेजस Mk-1A कार्यक्रम में सबसे बड़ी रुकावट इंजन की कमी रही है. HAL ने एयरफ्रेम बना लिए लेकिन इंजन न मिलने से विमान तैयार नहीं हो पा रहे थे. अब रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार GE की सप्लाई नियमित होने वाली है.
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साल के अंत तक 12 अतिरिक्त इंजन आने से मौजूदा तैयार एयरफ्रेम को पूरा करने में तेजी आएगी. HAL चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के ने पहले कहा था कि 27 एयरफ्रेम तैयार हैं लेकिन अंतिम डिलीवरी टेस्टिंग और इंटीग्रेशन पर निर्भर है.
खासकर रडार और हथियार सिस्टम के इंटीग्रेशन से जुड़ी तकनीकी समस्याएं अब भी हल की जा रही हैं. इंजन मिलने के साथ ये काम भी पूरा होने पर विमान संचालन के लिए तैयार हो सकेंगे. यह बदलाव कार्यक्रम को गति देने वाला साबित हो सकता है.
180 विमानों का बड़ा ऑर्डर और स्वदेशीकरण की दिशा
भारतीय वायुसेना के पास तेजस Mk-1A के कुल 180 विमानों के ऑर्डर हैं. पहला कॉन्ट्रैक्ट फरवरी 2021 में 83 विमानों का हुआ था. दूसरा कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त विमानों के लिए साइन हुआ. इसमें 68 फाइटर और 29 ट्विन-सीटर शामिल हैं. इसकी लागत कर छोड़कर 62,370 करोड़ रुपये से ज्यादा है.
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दूसरे कॉन्ट्रैक्ट की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होकर छह साल में पूरी होनी है. इस ऑर्डर में स्वदेशी सामग्री और बढ़ाई गई है. विमान में 64 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट होगा. पहले वाले Mk-1A की तुलना में 67 अतिरिक्त आइटम जोड़े गए हैं. इनमें स्वदेशी उत्तम AESA रडार, स्वयं रक्षा कवच और स्वदेशी कंट्रोल-सरफेस एक्चुएटर्स शामिल हैं. यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है
दूसरे ऑर्डर के 97 विमानों के लिए HAL ने नवंबर 2025 में GE एयरोस्पेस के साथ अलग समझौता किया है. इसमें 113 F404-GE-आईएन20 इंजन और संबंधित सपोर्ट पैकेज शामिल हैं. ये इंजन 2027 से 2032 के बीच मिलने वाले हैं. इससे लंबी अवधि की सप्लाई सुनिश्चित हो जाएगी.
HAL अपने प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है. कंपनी का लक्ष्य सालाना करीब 24 विमान बनाने का है. फिलहाल प्राथमिकता बची हुई इंटीग्रेशन और टेस्टिंग समस्याओं को हल करना तथा इंजनों की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करना है. 27 एयरफ्रेम पहले से तैयार होने के कारण इंजन उपलब्धता और रडार-हथियार वैलिडेशन की गति ही तय करेगी कि विमान कितनी तेजी से ऑपरेशनल इंडक्शन की ओर बढ़ते हैं.
कार्यक्रम का महत्व और आगे की राह
तेजस Mk-1A भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है. इंजन बाधा कम होने से न सिर्फ मौजूदा तैयार विमान जल्दी मिल सकेंगे बल्कि पूरे फ्लीट निर्माण में विश्वास बढ़ेगा. सरकार 83 और 97 विमानों के संयुक्त ऑर्डर से Mk-1A फ्लीट तैयार कर रही है.
दूसरी खेप 2033 तक धीरे-धीरे डिलीवर होगी. तकनीकी मुद्दों को जल्द हल करना और इंजन सप्लाई बनाए रखना अब सबसे जरूरी है. अगर यह लय बनी रही तो वायुसेना को समय पर आधुनिक स्वदेशी लड़ाकू विमान मिल सकेंगे. कुल मिलाकर इंजन सप्लाई में सुधार तेजस कार्यक्रम के लिए सकारात्मक संकेत है और आने वाले महीनों में इसकी प्रगति पर नजर रखनी होगी.
शिवानी शर्मा