साउथ ब्लॉक से खत्म होने जा रहा रिश्ता, शौर्य भवन में शिफ्ट होंगे सेना अधिकारी

साउथ ब्लॉक से सेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी नवंबर के अंत तक नए परिसरों में शिफ्ट हो सकते हैं. सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ शौर्य भवन जाएंगे. यह बदलाव भारत के रक्षा प्रशासन के पुनर्गठन का महत्वपूर्ण चरण होगा.

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अब सेना और नौसेना के बड़े अधिकारी साउथ ब्लॉक (बाएं) से कर्तव्य भवन के शौर्य भवन (दाएं) में शिफ्ट होंगे. अब सेना और नौसेना के बड़े अधिकारी साउथ ब्लॉक (बाएं) से कर्तव्य भवन के शौर्य भवन (दाएं) में शिफ्ट होंगे.

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST

दिल्ली के ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से भारतीय सेना और नौसेना के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की विदाई होने जा रही है. यह बदलाव केवल दफ्तरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारत के सैन्य और रक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है. 

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, उप सेना प्रमुख और सात प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर्स (PSO) नवंबर के अंत तक दिल्ली कैंट स्थित नवनिर्मित शौर्य भवन में अपना कामकाज शुरू कर सकते हैं. इसके साथ ही सेना और नौसेना के प्रमुखों तथा उनके वरिष्ठ अधिकारियों के साउथ ब्लॉक से काम करने की लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था समाप्त हो जाएगी.

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साउथ ब्लॉक लंबे समय से देश के रक्षा और सरकारी प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. यहां सेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी रक्षा मंत्रालय के साथ एक ही परिसर में काम करते रहे हैं. अब सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के साथ उप-सेना प्रमुख और सात वरिष्ठ अधिकारी शौर्य भवन में शिफ्ट होंगे. 

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, उप-नौसेना प्रमुख और नौसेना के प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर्स के भी साउथ ब्लॉक छोड़ने की तैयारी है. इस बदलाव से सेना और नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के कामकाज का भौतिक केंद्र बदल जाएगा.

वॉर रूम और सैन्य ऑपरेशन से जुड़े कार्यालय भी होंगे शिफ्ट

इस बदलाव का असर केवल सेना और नौसेना प्रमुखों के कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा. सेना का वॉर रूम और डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) का कार्यालय भी साउथ ब्लॉक से शिफ्ट किया जाएगा. ये कार्यालय सैन्य अभियानों और रणनीतिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं. 

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इसलिए इनके स्थानांतरण में सुरक्षित संचार व्यवस्था और तकनीकी सुविधाओं की अहम भूमिका होगी. हालांकि, नौसेना के वॉर रूम को कहां शिफ्ट किया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. इसकी वजह यह है कि नौसेना के वॉर रूम को बड़े स्तर के बुनियादी ढांचे, सुरक्षित संचार नेटवर्क और आधुनिक तकनीक की जरूरत होती है. गौरतलब है कि नौसेना 2024 में ही दिल्ली कैंट स्थित नौसेना भवन में अपना मुख्यालय शिफ्ट कर चुकी है.

फिलहाल रक्षा मंत्रालय कार्तव्य भवन-II से काम कर रहा है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का कार्यालय भी अभी वहीं स्थित है और वह इस परिसर में मौजूद एकमात्र वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व का पद है. सेना प्रमुख के शौर्य भवन पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकों के लिए उन्हें कार्तव्य भवन-II जाना होगा. 

इससे स्पष्ट है कि सैन्य मुख्यालयों और रक्षा मंत्रालय के कार्यालयों को अलग-अलग परिसरों में व्यवस्थित किया जा रहा है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों के बीच समन्वय समाप्त हो जाएगा. बल्कि भविष्य में बैठकों, संचार और प्रशासनिक तालमेल के लिए अलग व्यवस्थाओं की जरूरत होगी.

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कार्तव्य भवन-6 और 7 में बनेगा नया प्रशासनिक ढांचा

आगे चलकर रक्षा मंत्रालय कार्तव्य भवन-6 और 7 में शिफ्ट होगा. इन इमारतों में मंत्रालय के साथ-साथ तीनों सेनाओं के प्रमुखों के अतिरिक्त कार्यालयों को भी जगह दी जाएगी. इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग (DMA) के अधिकारी और डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के महानिदेशक (DG DIA) भी साउथ ब्लॉक छोड़कर नए परिसरों में जा सकते हैं.

इस पूरी प्रक्रिया का पहला चरण अप्रैल में शुरू हुआ था, जब रक्षा मंत्री और उनका सचिवालय कार्तव्य भवन-II में शिफ्ट हुए. इसके बाद रक्षा मंत्रालय के अन्य कार्यालयों, सेवा जनसंपर्क अधिकारियों (PROs) और संबंधित शाखाओं को चरणबद्ध तरीके से शिफ्ट किया गया.

केवल पता नहीं, रक्षा प्रशासन की कार्यशैली में भी बदलाव

साउथ ब्लॉक से सैन्य अधिकारियों का जाना भारत के रक्षा प्रशासन के पुनर्गठन का महत्वपूर्ण चरण है. नए भवनों में कार्यालयों को व्यवस्थित करने का उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और अलग-अलग विभागों के लिए निर्धारित स्थान तैयार करना है. 

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इस बदलाव की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सैन्य मुख्यालयों, रक्षा मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय कितना प्रभावी बना रहता है. खासकर सैन्य अभियानों से जुड़े कार्यालयों के लिए सुरक्षित संचार और त्वरित निर्णय लेने की व्यवस्था बेहद जरूरी होगी. इस तरह साउथ ब्लॉक का सैन्य अध्याय भले ही समाप्त होने जा रहा है, लेकिन नए परिसरों में रक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की चुनौती अब सामने होगी.

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