रॉकेट इंजन वाला ड्रोन शेषनाग... बॉर्डर में रहकर ही दुश्मन को कर देगा तबाह

न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ने शेषनाग-150 लॉइटरिंग म्यूनिशन का टेकऑफ टेस्ट किया. 150 किलोग्राम वाले इस ड्रोन की रेंज 1000 किलोमीटर से अधिक, 5 घंटे की उड़ान क्षमता और 25-40 किलोग्राम वॉरहेड है. यह भारत का पहला डीप अटैक करने वाला ड्रोन है.

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रॉकेट असिस्टेड टेक-ऑफ करते हुए शेषनाग ड्रोन. (Photo:X/@NS_FutureReady) रॉकेट असिस्टेड टेक-ऑफ करते हुए शेषनाग ड्रोन. (Photo:X/@NS_FutureReady)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:26 PM IST

न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज की ग्रिफॉनवर्क्स टीम ने शेषनाग-150 अटैक ड्रोन के लिए रॉकेट टेकऑफ का परीक्षण किया है. यानी ड्रोन का इंजन रॉकेट वाला है. यह परीक्षण भारत में डीप अटैक वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन का पहली बार ऐसा लॉन्च है. इससे पहले इसी ड्रोन ने पोखरण में 720 किलोमीटर की उड़ान भरी थी. 

अब रॉकेट असिस्टेड टेकऑफ की सफलता के बाद यह ड्रोन बिना तैयार रनवे वाले स्थानों से भी उड़ान भर सकता है. शेषनाग-150 लगभग 150 किलोग्राम वजन का लॉइटरिंग म्यूनिशन है. इसकी मारक क्षमता 1000 किलोमीटर से अधिक बताई गई है, जबकि यह हवा में पांच घंटे तक उड़ान भर सकता है. इसमें 25 से 40 किलोग्राम तक का वॉरहेड लगाने की व्यवस्था है, जिससे यह दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला कर सकता है. 

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लॉइटरिंग म्यूनिशन का मतलब है कि यह ड्रोन टारगेट एरिया में घूमता रहता है. स्थिति का आकलन करता है. फिर हमला करता है. रॉकेट असिस्टेड टेकऑफ सिस्टम इसे छोटे या कच्चे स्थानों से भी लॉन्च करने की सुविधा देता है. इससे सैनिकों को तैयार एयरस्ट्रिप की जरूरत नहीं पड़ती, जो युद्ध के मैदान में बड़ा फायदा साबित हो सकता है. कंपनी के अधिकारियों ने इसे भारतीय डीप अटैक क्षमताओं के लिए नया अध्याय बताया है.

स्वार्म ऑपरेशन के लिए बेहतरीन

यह परीक्षण सिर्फ एक ड्रोन के लॉन्च तक सीमित नहीं है. इससे स्वार्म ऑपरेशन यानी कई ड्रोनों को एक साथ समूह में चलाने की संभावना मजबूत होती है. अप्रोप्रेड सरफेस यानी बिना तैयार सतह से लॉन्च करने की क्षमता के कारण सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों शाखाओं के लिए इसका उपयोग हो पाएगा.  

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डीप अटैक वाले ऐसे सिस्टम सीमा पार या दुश्मन के पीछे के क्षेत्रों में टारगेट भेदने में मददगार हो सकते हैं. पहले के पोखरण परीक्षण में 720 किलोमीटर की उड़ान ने इसकी लंबी दूरी की क्षमता साबित की थी. अब रॉकेट लॉन्च के साथ यह और अधिक शानदार बन गया है. ऐसे स्वदेशी सिस्टम से भारत बाहरी निर्भरता कम कर सकता है. 

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न्यूस्पेस जैसी कंपनियां इसी दिशा में काम कर रही हैं. शेषनाग-150 जैसा सिस्टम न केवल तकनीकी उपलब्धि है बल्कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन आधारित युद्धकला के महत्व को भी रेखांकित करता है. रॉकेट-सहायता प्राप्त टेकऑफ से लॉन्च की प्रक्रिया तेज और सुरक्षित हो जाती है. 

कंपनी का दावा है कि यह प्रणाली सभी सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है. हालांकि, पूर्ण संचालन क्षमता हासिल करने के लिए और परीक्षणों की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन यह शुरुआत महत्वपूर्ण है. 

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