भारतीय सेना को अब एक ऐसा घातक हथियार मिल गया है जो दुश्मन के सबसे मजबूत टैंकों को भी पलभर में नष्ट कर सकता है. नागपुर स्थित कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने अक्टूबर में सेना को स्वदेशी नागास्त्र-1 एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की 450 यूनिट की पहली खेप सौंप दी है. यह ड्रोन आसमान में घंटों तक मंडराकर दुश्मन पर नजर रखता है और सही मौके पर कामिकेज अटैक कर देता है.
साल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर में इसी कंपनी की लोइटरिंग म्यूनिशन सुविधा का उद्घाटन किया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए नागास्त्र-1 का इस्तेमाल किया था. यह साइलेंट किलर है जो दुश्मन को बिना आवाज किए तबाह कर देता है.
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नागास्त्र-2 की तकनीकी ताकत और परीक्षण
अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इसके सभी तकनीकी परीक्षण सफल रहे. नागास्त्र-1 की रेंज रिकवर-एंड-रियूज मोड में 25 किलोमीटर और फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 किलोमीटर है. यह 60 मिनट तक हवा में रह सकता है. नागास्त्र-2 में 4 किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वॉरहेड लगा है जो 650 मिलीमीटर तक मोटे आरएचए कवच को चीर सकता है.
इसमें दिन-रात काम करने वाले हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और ईसीसीएम तकनीक है, जिससे जैमिंग और स्पूफिंग के बावजूद यह अपना लक्ष्य नहीं छोड़ता. कंपनी के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल के अनुसार यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है. पहले 450 नागास्त्र-1आर का ऑर्डर भी इसी कंपनी को मिला था जिसके परीक्षण लद्दाख से बबीना तक हुए थे. अब एलएसी से एलओसी तक दुश्मन के टैंकों के लिए यह काल बनकर उभरेगा.
पिनाका रॉकेट का अपग्रेड और निर्यात सफलता
जब दुश्मन पर सटीक और ताबड़तोड़ वार की जरूरत हो तो भारतीय सेना का नाम पिनाका सबसे पहले आता है. यह मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर एक साथ दर्जनों रॉकेट दागकर दुश्मन के बंकरों को नष्ट कर देता है. पहले आर्डिनेंस फैक्ट्री इसे बनाती थी लेकिन अब सोलर डिफेंस जैसी निजी कंपनी भी बना रही है.
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कंपनी ने 6,000 करोड़ रुपये के विशाल ऑर्डर के साथ इसका निर्माण और सफल परीक्षण किया है. शुरुआत में रेंज 37.5 किलोमीटर थी जो अब 45, 75 और गाइडेड वर्जन में 120 किलोमीटर तक पहुंच गई है. आधुनिक गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम ने इसे आम रॉकेट से सटीक मिसाइल बना दिया है. पोखरण के हालिया टेस्ट ने इसकी विश्वस्तरीय क्षमता साबित की है.
रक्षा निर्यात और आत्मनिर्भरता का प्रमाण
रक्षा मंत्रालय ने पिनाका लॉन्चर और गोला-बारूद के लिए सोलर इंडस्ट्रीज और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड के साथ 10,200 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनुबंध किए हैं. जनवरी 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर फैक्ट्री से अर्मेनियाई ग्राउंड फोर्सेज के लिए 700 गाइडेड पिनाका रॉकेटों के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई.
आर्मेनिया के बाद कई देश पिनाका खरीदने की कतार में हैं. कम कीमत, सटीक मार और भारत पर भरोसा इसकी सफलता का राज है. यह सिर्फ हथियार की बिक्री नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती वैश्विक धमक का सबूत है. नागपुर से मनजीत नेगी की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से साफ है कि देश की रक्षा क्षमता अब निजी क्षेत्र के सहयोग से नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है.
मंजीत नेगी