NVS-03 सैटेलाइट ने कर दिया काम, भारतीय जीपीएस NAVIC हुआ एक्टिव

इसरो ने NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च कर NAVIC सिस्टम को चार सैटेलाइटों के स्तर पर बहाल किया. स्वदेशी रूबिडियम क्लॉक और एल1 सिग्नल से विदेशी निर्भरता घटेगी. 12 साल सेवा. ट्रेन ट्रैकिंग और सुरक्षा में उपयोगी है.

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इसरो ने 30 अक्टूबर को एनवीएस-03 सैटेलाइट लॉन्च किया था. (Photo: ISRO) इसरो ने 30 अक्टूबर को एनवीएस-03 सैटेलाइट लॉन्च किया था. (Photo: ISRO)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अक्टूबर 30, 2026 को श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए NVS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया. तीन सटीक मैन्यूवर्स के बाद यह सैटेलाइट 111.75 डिग्री पूर्वी देशांतर पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित हो गया. 

इस सफलता से भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम NAVIC यानी नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन फिर से कम से कम चार सैटेलाइटों की व्यवस्था पर आ गया है. इससे पूरे भारत और सीमा से 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में विश्वसनीय पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं सही हो सकेंगी. यह उपलब्धि देश की अंतरिक्ष क्षमता को और मजबूत बनाती है.

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NVS-03 में भारत का तीसरा स्वदेशी रूबिडियम एटॉमिक क्लॉक लगा है जो बेहद सटीक समय मापने में मदद करता है. साथ ही इसमें एल1 बैंड सिग्नल्स भी उपलब्ध हैं जो नागरिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं. सैटेलाइट कम से कम 12 साल तक काम करेगा. इसका इस्तेमाल ट्रेन ट्रैकिंग जैसे नागरिक कार्यों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के लिए भी होगा. पहले NAVIC सिस्टम में कुछ सैटेलाइटों की विफलता या उम्र पूरी होने के कारण सेवा प्रभावित हो रही थी. NVS-03 के आने से कमी दूर हो गई है. विश्वसनीयता बढ़ गई है.

विदेशी निर्भरता में कमी और क्षेत्रीय महत्व

इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि यह सैटेलाइट विदेशी नेविगेशन सिस्टम पर निर्भरता कम करेगा. जीपीएस जैसे विदेशी सिस्टम पर पूरी तरह भरोसा करने के बजाय भारत अब अपना मजबूत नेटवर्क विकसित कर रहा है. NAVIC सिस्टम सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाता है. 

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सीमा क्षेत्रों, समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता बहुत ज्यादा है. भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है जो देश की तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने पेश करता है.

NAVIC सिस्टम को चार सैटेलाइटों के न्यूनतम स्तर पर वापस लाना रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है. इससे देश की सुरक्षा और नागरिक सुविधाएं दोनों मजबूत होंगी. स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक का विकास भारत की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है. 

आने वाले समय में और सैटेलाइटों के जुड़ने से NAVIC और अधिक सटीक तथा व्यापक हो जाएगा. कुल मिलाकर NVS-03 का सफल संचालन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की निरंतर सफलता और आत्मनिर्भरता की मिसाल है जो भविष्य में और बड़ी उपलब्धियों का आधार बनेगा.

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