ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. ईरान ने हाल ही में जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला किया. फिर अमेरिका ने ईरान के अंदर जवाबी हमले किए. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सीधा टकराव और बढ़ गया है.
अब बड़ा सवाल यह है कि जब ईरान और अमेरिका दोनों ही बड़ी जंग नहीं चाहते, तो फिर ईरान लगातार तनाव क्यों बढ़ा रहा है? जानकारों के मुताबिक, ईरान ऐसी रणनीति अपना सकता है जिसमें वह पूरी तरह युद्ध में न जाए, लेकिन अमेरिका पर दबाव बनाए रखे. तेहरान को लगता है कि सीमित संघर्ष के जरिए वह अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है.
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई सिर्फ मिसाइल हमलों तक सीमित नहीं है. इसके पीछे दोनों देशों की अपनी-अपनी रणनीति है. ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है. उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है और सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान ने उसकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं.
अगर अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी जंग शुरू होती है तो ईरान को भारी नुकसान हो सकता है. इसलिए ईरान शायद ऐसी स्थिति बनाए रखना चाहता है जिसमें वह अमेरिका को चुनौती भी देता रहे और पूरी तरह युद्ध में भी न फंसे. वहीं अमेरिका भी किसी बड़े युद्ध से बचना चाहता है. मध्य पूर्व में बड़ी लड़ाई होने पर तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अमेरिकी सेना पर भी ज्यादा दबाव आ सकता है.
तेल और समुद्री रास्तों से दबाव बनाने की कोशिश
ईरान के पास एक बड़ा फायदा उसकी भौगोलिक स्थिति है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्तों में से एक है. दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और जहाजों की आवाजाही महंगी हो सकती है. ईरान इसी दबाव का इस्तेमाल अपनी बात मनवाने के लिए कर सकता है.
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शांति से ज्यादा तनाव क्यों फायदेमंद लग सकता है?
ईरान के लिए सिर्फ युद्ध रोक देना भी आसान नहीं है. अगर सीजफायर हो जाता है, तब भी अमेरिका के प्रतिबंध जारी रह सकते हैं और ईरान की आर्थिक मुश्किलें बनी रह सकती हैं. ऐसे में तेहरान को लग सकता है कि तनाव बनाए रखने से अमेरिका और दूसरे देशों पर दबाव बना रहेगा. इससे फ्यूचर में होने वाली बातचीत में ईरान अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है.
ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक समस्याएं लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. ऐसे हालात में बाहरी खतरे का मुद्दा उठाकर सरकार लोगों का ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा की तरफ मोड़ने की कोशिश कर सकती है. हालांकि, इससे ईरान की आर्थिक समस्याएं खत्म नहीं होंगी, लेकिन सरकार को अंदरूनी दबाव संभालने में मदद मिल सकती है.
बड़ी जंग का खतरा बना हुआ है
ईरान की यह रणनीति खतरे से खाली नहीं है. छोटा संघर्ष कभी भी बड़े युद्ध में बदल सकता है. अगर अमेरिका को लगता है कि ईरान लगातार उसके हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो वह ज्यादा सख्त कार्रवाई कर सकता है. मध्य पूर्व के कई देश अभी इस संघर्ष से दूर रहना चाहते हैं, लेकिन अगर तेल और व्यापार पर असर बढ़ा तो हालात बदल सकते हैं.
ईरान अभी ऐसी स्थिति चाहता दिख रहा है जहां वह न तो पूरी तरह युद्ध में जाए और न ही पूरी तरह पीछे हटे. वह सीमित संघर्ष के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाए रखना चाहता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह तनाव कब तक नियंत्रण में रहेगा, क्योंकि एक छोटी सी गलती पूरे क्षेत्र में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है.
ऋचीक मिश्रा