भारत में तैयार होगी जैवलिन मिसाइल, अमेरिकी कंपनी के साथ टाटा की बड़ी डील

भारत में जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम की फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन की तैयारी शुरू हो गई है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने जैवलिन जॉइंट वेंचर के साथ समझौता किया है. इस जॉइंट वेंचर में रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन शामिल हैं. समझौते के तहत भारत में मिसाइल के कंपोनेंट उत्पादन की क्षमता भी विकसित की जाएगी

Advertisement
जैवलिन मिसाइल को लेकर कंपनियों के बीच MoU साइन हो चुका है. (Photo-lockheedmartin) जैवलिन मिसाइल को लेकर कंपनियों के बीच MoU साइन हो चुका है. (Photo-lockheedmartin)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:57 PM IST

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत ने बड़ा कदम उठाया है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड यानी टीएएसएल ने जैवलिन जॉइंट वेंचर के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू किया है. इस जॉइंट वेंचर में रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन शामिल हैं. समझौते के तहत भारत में जैवलिन ऑल अप राउंड एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम की फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी स्थापित करने की संभावना तलाश की जाएगी.

Advertisement

जैवलिन जॉइंट वेंचर ने कई कंपनियों की क्षमता और विशेषज्ञता का मूल्यांकन करने के बाद भविष्य में भारत में को-प्रोडक्शन के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को अपना प्रमुख साझेदार चुना है. इसके तहत भारत में मिसाइल के कुछ कंपोनेंट बनाने की क्षमता भी विकसित की जाएगी.

यह भी पढ़ें: पहाड़ हो या मैदान... पाकिस्तान के टैंक पर कहीं से भी होगा अटैक, भारत खरीदेगा ये खतरनाक वेपन

जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल पर भारत में क्या काम होगा?

इस को-प्रोडक्शन मॉडल के तहत लॉकहीड मार्टिन की ट्रॉय, अलबामा स्थित फैसिलिटी में तैयार होने वाली सब-असेंबली किट और रेथियॉन की टक्सन, एरिजोना स्थित फैसिलिटी में बनने वाली गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट भारत भेजी जाएंगी. इसके बाद इनका फाइनल इंटीग्रेशन भारत में किया जाएगा.

कंपनियों के मुताबिक, इस साझेदारी से भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को मजबूत करने और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग व टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. साथ ही अमेरिका में डिफेंस सेक्टर की नौकरियों को बनाए रखने में भी यह मॉडल मदद करेगा.

Advertisement

भारत में फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी बनेगी

जैवलिन जॉइंट वेंचर के मुताबिक, अब तक 55 हजार से ज्यादा जैवलिन मिसाइलें और 12 हजार से ज्यादा री-यूजेबल कमांड लॉन्च यूनिट्स बनाई जा चुकी हैं. बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में भारत में यह पहल अहम है.

यह भी पढ़ें: भारत को S-400 की टेक्नॉलजी ट्रांसफर करेगा रूस, देश में ही बनेंगे 2 मिसाइल डिफेंस सिस्टम

जैवलिन जॉइंट वेंचर के वाइस प्रेसिडेंट रिच लिशन ने कहा कि भारत में फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन फैसिलिटी स्थापित करना इस महत्वपूर्ण एंटी-टैंक हथियार की सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत बनाएगा.

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के सीईओ और एमडी सुकर्ण सिंह ने कहा कि भारत में जैवलिन की लोकल असेंबली से ऑपरेशनल रेडीनेस बढ़ेगी और भारतीय सशस्त्र बलों को इस कॉम्बैट-प्रूवन सिस्टम की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »