स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क ने एक दिलचस्प और चौंकाने वाला किस्सा साझा किया है. उन्होंने बताया कि स्पेसएक्स की स्थापना से पहले 2001 और 2002 के आसपास वे मॉस्को गए थे ताकि रूसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें यानी आईसीबीएम खरीद सकें.
मस्क का मकसद इन मिसाइलों को परमाणु हथियार के रूप में इस्तेमाल करना नहीं बल्कि अंतरिक्ष यात्रा के लिए रॉकेट बनाना था. उन्होंने कहा कि यह अनुभव काफी रोमांचक और अजीब था. रूसी सैन्य उच्च अधिकारियों से मिलकर मिसाइल खरीदने की बातचीत करना किसी साहसिक कहानी जैसा लगता है.
मस्क ने बताया कि वे रूस गए थे क्योंकि हथियार कटौती के चलते रूस को अपनी कई बड़ी परमाणु मिसाइलों को नष्ट करना पड़ रहा था. उन्होंने सोचा कि क्यों न इनमें से दो मिसाइलें ली जाएं, उनमें से परमाणु हिस्सा हटा दिया जाए और मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त अपर स्टेज जोड़ दिया जाए.
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उनका लक्ष्य सस्ते और प्रभावी रॉकेट हासिल करना था जो अंतरिक्ष खोज में मदद कर सकें. उस समय मस्क ने स्पेसएक्स शुरू नहीं किया था. वे पेपाल बेचने के बाद अपनी संपत्ति से अंतरिक्ष के सपने को साकार करने की कोशिश कर रहे थे. रूसी आईसीबीएम खरीदने का विचार उनके लिए एक व्यावहारिक और किफायती रास्ता लगता था क्योंकि नई मिसाइल या रॉकेट विकसित करने में बहुत समय और पैसा लगता.
यह योजना सुनने में अजीब लगती है लेकिन उस दौर के संदर्भ में समझ में आती है. शीत युद्ध खत्म होने के बाद रूस के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें थीं जिन्हें नष्ट करना था. कई पश्चिमी कंपनियां और उद्यमी इनका शांतिपूर्ण उपयोग करने के बारे में सोच रहे थे. मस्क ने साफ कहा कि उनका इरादा किसी पर हमला करने का नहीं था बल्कि सिर्फ रॉकेट तकनीक हासिल करने का था.
मॉस्को में बातचीत का अनुभव
मस्क ने उस अनुभव को ट्रिप्पी यानी अजीब और सपनों जैसा बताया. 2001 में मॉस्को में रूसी सैन्य कमांड से मिलकर आईसीबीएम खरीदने की बातचीत करना आसान नहीं था. उन्होंने कहा कि रूसी अधिकारी कीमत बढ़ाते जा रहे थे जो सामान्य बातचीत के उलटा था. आमतौर पर बातचीत में कीमत घटती है लेकिन यहां उल्टा हो रहा था.
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यह बातचीत सफल नहीं हुई. कीमत बहुत ज्यादा हो गई. अन्य कारणों से सौदा नहीं हो सका. इसके बाद मस्क ने फैसला किया कि वे खुद रॉकेट बनाएंगे. यही सोच स्पेसएक्स की नींव बनी. रूसी सैन्य अधिकारियों से सीधे बातचीत करना उस समय के राजनीतिक माहौल में भी जोखिम भरा कदम था. फिर भी मस्क ने इसे आजमाया.
यह असफल कोशिश बाद में स्पेसएक्स की सफलता की कहानी का हिस्सा बन गई. जब मिसाइल खरीदने का प्लान फेल हो गया तो मस्क ने अपनी कंपनी बनाई और खुद रॉकेट विकसित करने का फैसला किया. आज स्पेसएक्स पुन: उपयोगी रॉकेट, स्टारशिप और उपग्रह इंटरनेट जैसे क्षेत्रों में अग्रणी है.
मस्क अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि अंतरिक्ष खोज के लिए सस्ता और विश्वसनीय तरीका खोजना जरूरी है. रूसी आईसीबीएम वाली कहानी उनके शुरुआती संघर्ष और दृढ़ संकल्प को दिखाती है. इस खुलासे से एक बात साफ होती है कि बड़े सपने देखने वाले लोग कभी-कभी असामान्य रास्ते अपनाते हैं.
मस्क की यह कोशिश विफल रही लेकिन इससे उन्हें सबक मिला कि निर्भर रहने के बजाय खुद तकनीक विकसित करना बेहतर है. आज जब स्पेसएक्स नियमित रूप से रॉकेट लॉन्च कर रहा है. मंगल मिशन की तैयारी कर रहा है तो यह कहानी और भी दिलचस्प लगती है.
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सुरक्षा और नैतिक पहलू
हालांकि मस्क ने साफ कहा कि परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का कोई इरादा नहीं था लेकिन ऐसे प्रयासों पर सुरक्षा संबंधी सवाल भी उठते हैं. किसी निजी व्यक्ति का सैन्य मिसाइल खरीदने की कोशिश करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा मुद्दा है.
उस समय के हथियार कटौती समझौतों के तहत मिसाइलों का शांतिपूर्ण उपयोग संभव था लेकिन प्रक्रिया जटिल होती. मस्क का यह अनुभव दिखाता है कि निजी क्षेत्र अब अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में कितनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है. कुल मिलाकर एलन मस्क का यह खुलासा उनके करियर की शुरुआती जद्दोजहद और साहसिक सोच को उजागर करता है. स्पेसएक्स से पहले मॉस्को की यात्रा एक दिलचस्प अध्याय है जो बताता है कि कैसे एक असफल प्रयास ने इतिहास बदलने वाली कंपनी को जन्म दिया.
आजतक साइंस डेस्क