ईरान ने हाल ही में अपनी एक नई अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी का खुलासा किया है. इसके बाद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार कर दी. यह घटनाक्रम मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा रहा है. ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े बैलिस्टिक मिसाइल भंडार है.
ईरान लंबे समय से अपनी मिसाइलों को दुश्मन के हमलों से बचाने के लिए पहाड़ों और जमीन के अंदर विशाल सुरंगों का जाल बुन रहा है. मार्च 2025 में ईरानी मीडिया ने वीडियो जारी किया जिसमें आर्म्ड फोर्सेज के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मोहम्मद बागेरी और आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स कमांडर अमीर अली हाजीजादेह एक लंबी, अंधेरी सुरंग में गाड़ी पर बैठकर मिसाइलों का निरीक्षण करते दिख रहे थे. इसे मिसाइल सिटी कहा गया.
यह भी पढ़ें: रुद्रम-2 का टेस्ट सफल... चीन-पाक के डिफेंस सिस्टम और रडार को करेगा तबाह
इस सिटी में हजारों मिसाइलें, लॉन्चर और सपोर्ट सिस्टम छिपे हुए हैं. ईरान का दावा है कि ऐसी सैकड़ों मिसाइल सिटी पूरे देश में फैली हुई हैं, खासकर जाग्रोस पर्वत श्रृंखला और दक्षिणी इलाकों में. ये सुरंगें इतनी गहरी और मजबूत हैं कि सामान्य बमों या मिसाइलों से आसानी से नष्ट नहीं हो सकतीं. उद्देश्य साफ है - अमेरिका, इजरायल या किसी भी दुश्मन के एयर स्ट्राइक के बावजूद मिसाइल हमले जारी रखना.
हालांकि 2026 के संघर्ष में अमेरिका और इजरायल ने इन सुरंगों के प्रवेश द्वारों को निशाना बनाया. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि कई जगहों पर प्रवेश बंद कर दिए गए थे, लेकिन ईरान ने तेजी से बुलडोजर और मशीनों से 50 से ज्यादा सुरंगें दोबारा खोल लीं. इससे साबित होता है कि ईरान की यह रणनीति पूरी तरह नाकाम नहीं हुई है.
यह भी पढ़ें: आ रहा है खतरनाक अल-नीनो, कमजोर होगा मॉनसून- WMO की चेतावनी
अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल बरसाने की घटनाएं
2025-26 के दौरान ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंचा. ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. ईरान ने अल उदीद एयर बेस (कतर), अली अल सलेम (कुवैत), अल धाफरा (यूएई) और बहरीन में फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय समेत कई अमेरिकी बेस पर हमले किए.
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली. कुछ मिसाइलें इंटरसेप्ट हो गईं, लेकिन कई ने नुकसान पहुंचाया. अमेरिकी पक्ष ने भी ईरान के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस और कमांड सेंटर्स पर हमले किए. इस संघर्ष में ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई, लेकिन उसका पूरा भंडार खत्म नहीं हुआ. ईरान अब भी सैकड़ों मिसाइलें लॉन्च करने की क्षमता रखता है.
ईरान के पास अभी कौन-कौन सी मिसाइलें बची हैं?
ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार है. अनुमान के मुताबिक उसके पास 3000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, हालांकि हालिया हमलों के बाद संख्या कम हुई होगी. ये मिसाइलें छोटी, मध्यम दूरी की हैं. कुछ हाइपरसोनिक तकनीक वाली भी हैं.
यह भी पढ़ें: धरती पर इन चार पहाड़ों पर छिपे हैं एलियन बेस- CIA के पूर्व स्पाई का खुलासा
छोटी दूरी की मिसाइलें (SRBM - 300 से 1000 किमी)
फतह-110 परिवार ईरान की रीढ़ है. फतेह-110 की रेंज 300 किमी है, जबकि इसके एडवांस वेरिएंट जैसे फतेह-313, जुल्फागार (700 किमी), खलीज फारस (एंटी-शिप) और हज कासेम (1400 किमी तक) बहुत सटीक हैं. ये ठोस ईंधन वाली हैं, जिससे इन्हें जल्दी लॉन्च किया जा सकता है. छिपाकर रखना आसान है. ये मिसाइलें सड़क पर चलने वाले लॉन्चर से छोड़ी जाती हैं.
मध्यम दूरी की मिसाइलें (MRBM - 1000 से 2000+ किमी)
शाहाब-3 परिवार पुराना लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण है. शाहाब-3, गद्र-1, एमाद और खोर्रमशहर मिसाइलें 1700-2000 किमी तक मार सकती हैं. ये लिक्विड फ्यूल वाली हैं. सेज्जिल ठोस ईंधन और 2000 किमी रेंज वाली है. खैबर शेकन भी बेहद सटीक और शक्तिशाली मानी जाती है.
यह भी पढ़ें: दोस्ती, "दोस्ती, दुश्मनी ETC... ट्रंप को कब-कब चुभे नेतन्याहू? दोस्ती में क्यों दिख रही दरार
हाइपरसोनिक और एडवांस मिसाइलें
ईरान फतह-1 और फतह-2 जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों का दावा करता है. ये 1400 किमी तक जा सकती हैं और 18522 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचती हैं. इनकी गति और मैन्यूवरिंग क्षमता एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में मदद करती है.
इसके अलावा ईरान के पास क्रूज मिसाइलें जैसे सौमार भी हैं, जिनकी रेंज 2000-2500 किमी तक बताई जाती है. ड्रोन जैसे शाहेद सीरीज भी मिसाइल हमलों के साथ इस्तेमाल होते हैं.
मिसाइलों की क्षमता और सटीकता
ईरान की नई पीढ़ी की मिसाइलें बेहतर गाइडेंस सिस्टम वाली हैं. पुरानी शाहाब सीरीज की सटीकता कम थी (सीईपी 500-1000 मीटर), लेकिन खैबर शेकन, फतेह और फतह जैसी मिसाइलों की सटीकता 100 मीटर या उससे बेहतर बताई जाती है. ये पारंपरिक वॉरहेड (500-1000 किलो विस्फोटक) ले जा सकती हैं.
यह भी पढ़ें: दिल्ली का कूलिंग सिस्टम खत्म! रात और दिन की गर्मी को लेकर ये रिपोर्ट डराने वाली
ईरान की रणनीति सैल्वो अटैक यानी एक साथ बड़ी संख्या में मिसाइलें छोड़ना है, ताकि दुश्मन के डिफेंस सिस्टम ओवरलोड हो जाएं. मिसाइल सिटी इस रणनीति को मजबूत करती है क्योंकि लॉन्चर छिपे रहते हैं.
क्या ईरान की ताकत अब भी खतरनाक है?
हालिया हमलों में अमेरिका-इजरायल ने ईरान की कई लॉन्च साइट्स, उत्पादन यूनिट्स और एयर डिफेंस को नुकसान पहुंचाया. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी 1000 से ज्यादा गहरी दफन मिसाइलें और लॉन्चर बचे हुए हैं. उसकी उत्पादन क्षमता भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है - वह महीने में दर्जनों मिसाइलें बना सकता है.
ईरान की मिसाइलें पूरे मध्य पूर्व, इजरायल, अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों को कवर करती हैं. हालांकि इंटरसेप्शन से हर हमले में 100% सफलता नहीं मिलती, लेकिन बड़ी संख्या में हमले डिफेंस सिस्टम को थका सकते हैं.
ईरान की भूमिगत मिसाइल सिटी और उसके मिसाइल कार्यक्रम ने दिखाया है कि वह पारंपरिक हवाई हमलों के खिलाफ तैयार है. लेकिन अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के पास एडवांस टेक्नोलॉजी है, जो लगातार इन ठिकानों को ट्रैक कर रही है.
यह संघर्ष दिखाता है कि मिसाइलें आधुनिक युद्ध का मुख्य हथियार बन गई हैं. ईरान के लिए यह रक्षा और प्रतिरोध का प्रतीक है, जबकि पड़ोसी देशों और अमेरिका के लिए यह बड़ा खतरा.
कुल मिलाकर, ईरान की मिसाइल ताकत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. उसके पास अब भी कई रेंज की सैकड़ों मिसाइलें बची हुई हैं, खासकर फतेह, खैबर शेकन, सेज्जिल और फत्ताह परिवार की. भविष्य में तनाव बढ़ने पर ये फिर से इस्तेमाल हो सकती हैं. स्थिति पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि मध्य पूर्व की स्थिरता इससे जुड़ी हुई है.
ऋचीक मिश्रा