दिशा सालियान की मौत का मामला करीब सवा छह साल बाद एक बार फिर सुर्खियों में है. 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया था. कोर्ट ने CBI को एक वरिष्ठ और अनुभवी जांच अधिकारी नियुक्त करने, सतीश सालियान का बयान दर्ज करने और उसके आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था. साथ ही कोर्ट ने साफ किया था कि जांच में पर्याप्त आधार मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा.
कोर्ट के इसी आदेश के बाद 11 सितंबर को CBI ने सतीश सालियान का बयान दर्ज किया. उनके वकील के मुताबिक, कई घंटे तक चले इस बयान में उन्होंने अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए. सतीश सालियान का दावा है कि दिशा के साथ गैंगरेप हुआ, फिर उसकी हत्या की गई और उसके बाद कथित तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश हुई. ये आरोप फिलहाल जांच का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि CBI की जांच में होनी बाकी है. इसके करीब 48 घंटे बाद, 13 सितंबर 2026 को CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर ली.
FIR में आदित्य ठाकरे, रोहन रॉय, डीनो मौर्या, सूरज पंचोली, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, रिया का भाई शौविक चक्रवर्ती, पुलिस अफ़सर सचिन वाज़े, तत्काली पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, डीसीपी विशाल ठाकुर, उद्धव ठाकरे, तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख, एपीआई अशोक देवाड़े, पीआई जगदेव कलापड़, पीआई शैलेंद्र नागरकर, पीआई चीमाजी आधव, पीआई अर्जुन राजने, मालवानी पुलिस स्टेशन के संबंधित पुलिस अफसर, देरी से पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर एंड स्टाफ, करीना एफएसएल के डॉक्टर संजय जाधव, एनपी भाले तत्कालीन संबंधित पीआई और अन्य पुलिस अफसर, रिजन गैलेक्सी बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम, प्रीती राणे, प्रवीण राणे, अंकिता सातुर, इंद्रनील वैद्या, दीप अजमेरा, हिमांशु शिखारे, रेशा पड़वाल, सतवंत सिंह, नवेद मुजावर, प्रियेश राणे साथ ही एसआईटी के सभी सीनियर पुलिस अफसर और बाक़ी अज्ञात लोगों के नाम भी दर्ज हैं.
लेकिन यहां एक बेहद अहम बात समझना जरूरी है. FIR में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह व्यक्ति आरोपी है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इन नामों को जांच के दायरे में लाया गया है. 2 सितंबर के अपने आदेश में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिया था कि जांच अधिकारी को पर्याप्त सामग्री से उचित संदेह पैदा होने तक किसी को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए. यानी FIR में नाम और आरोपी बनाए जाने के बीच कानूनी अंतर है.
दरअसल, सतीश सालियान के वकील का कहना है कि CBI के सामने दर्ज कराए गए बयान में जिन लोगों और घटनाओं का जिक्र किया गया, उन्हें FIR में शामिल किया गया है. इसलिए FIR में दर्ज नामों की लंबी सूची को सीधे-सीधे आरोपियों की सूची मानना सही नहीं होगा. अब इन सभी नामों और उनके कथित रोल की जांच CBI करेगी और जांच के दौरान सामने आने वाले सबूत ही तय करेंगे कि किस व्यक्ति के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाती है.
क्या दिशा की मौत हत्या थी?
दिशा सालियान के पिता लंबे समय से अपनी बेटी की मौत को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. साल 2025 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और मामले की दोबारा जांच की मांग की. उनके वकील की ओर से अदालत में यह दावा किया गया कि दिशा के साथ पहले यौन हिंसा हुई और उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि मामले को दबाने के लिए प्रभावशाली लोगों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका रही. इन आरोपों की पुष्टि अभी CBI की जांच का विषय है.
दूसरी तरफ, दिशा सालियान की मौत की शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की थी. पुलिस की जांच में उनकी मौत को आत्महत्या माना गया था. मार्च 2025 में सामने आई मुंबई पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में भी दिशा की मौत को आत्महत्या बताया गया था और उनकी मानसिक परेशानी का जिक्र किया गया था. यानी अब CBI के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुराने निष्कर्षों से अलग कोई नया और ठोस सबूत सामने आता है.
सुशांत सिंह राजपूत की मौत से क्या कनेक्शन?
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी, जबकि सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को हुई. दोनों घटनाओं के बीच सिर्फ छह दिन का अंतर था. दिशा कुछ समय के लिए सुशांत की मैनेजर भी रही थीं. इसी वजह से सोशल मीडिया पर दोनों मौतों को जोड़कर कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं. सतीश सालियान भी अपनी बेटी और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच कनेक्शन होने की बात कहते रहे हैं.
उनका दावा है कि दिशा के पास कुछ ऐसी जानकारी थी, जिसे उन्होंने सुशांत के साथ साझा किया था और इसी वजह से दोनों मामलों को जोड़कर देखा जाना चाहिए. लेकिन यह दावा जांच के स्तर पर साबित नहीं हुआ है. सुशांत की मौत की जांच कर चुकी CBI ने मार्च 2025 में अदालतों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि उपलब्ध जांच में उनकी मौत में किसी साजिश या फाउल प्ले का सबूत नहीं मिला.
यही वजह है कि दिशा और सुशांत की मौत के कथित कनेक्शन को लेकर अब CBI की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है. अगर जांच में दोनों मामलों के बीच कोई ठोस कड़ी मिलती है तो वह जांच का हिस्सा बनेगी. लेकिन सिर्फ छह दिन के अंतर और दिशा के कुछ समय तक सुशांत की मैनेजर रहने के आधार पर दोनों घटनाओं को एक ही साजिश का हिस्सा मान लेना जांच के निष्कर्ष से पहले सही नहीं होगा.
क्या हुआ था उस रात?
8 और 9 जून 2020 की दरमियानी रात मुंबई के मलाड इलाके में स्थित रीजेंट गैलेक्सी सोसायटी की 14वीं मंजिल पर दिशा अपने मंगेतर रोहन रॉय के घर पर थीं. वहां रोहन रॉय के अलावा चार अन्य दोस्त भी मौजूद थे. पुलिस के मुताबिक, देर रात दिशा घर की खिड़की से नीचे गिर गईं और उनकी मौत हो गई.
शुरुआती जांच में पुलिस ने पार्टी में मौजूद लोगों और दिशा के परिवार के सदस्यों से पूछताछ की थी. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में किसी ने दिशा की मौत को लेकर किसी व्यक्ति पर संदेह नहीं जताया था. पुलिस ने उस समय यह भी कहा था कि दिशा कुछ प्रोजेक्ट को लेकर परेशान थीं और इसी वजह से उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती थी. हालांकि अब CBI इस पूरी घटना की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच कर रही है.
दिशा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक अलग कहानी सामने आई. इसमें दावा किया गया कि पार्टी में कई प्रभावशाली लोग मौजूद थे, दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई और बाद में उनकी लाश नीचे फेंकी गई. सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया कि दिशा ने अपनी मौत से पहले सुशांत सिंह राजपूत को कुछ बताया था और इसी वजह से दोनों मामलों को जोड़ा गया. इन दावों की पुष्टि उस समय की पुलिस जांच में नहीं हुई थी और अब इनके संबंध में भी CBI को सबूतों की जांच करनी है.
CCTV और जांच रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
मुंबई पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात के CCTV फुटेज जांच का हिस्सा थे और उनमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला था, जिससे दिशा की मौत को लेकर हत्या की आशंका साबित हो. अब CBI पुराने CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल और फोरेंसिक सामग्री, पोस्टमॉर्टम से जुड़े दस्तावेजों और उस रात मौजूद लोगों के बयानों समेत तमाम पहलुओं की दोबारा जांच कर सकती है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में जांच का दायरा सिर्फ किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रखा है. अदालत ने CBI को दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने को कहा है. साथ ही यह भी साफ किया कि अगर जांच में कोई पर्याप्त सामग्री नहीं मिलती है, तो CBI को अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने दाखिल करनी होगी.
CBI के सामने सबसे बड़ा सवाल?
अब इस केस की जांच CBI की अधिकारी सीमा पाहुजा की निगरानी में है. सीमा पाहुजा CBI की दिल्ली स्पेशल क्राइम यूनिट में SP हैं और उनका नाम हाथरस, उन्नाव, हिमाचल प्रदेश के गुड़िया मामले और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले जैसी चर्चित जांचों से जुड़ा रहा है. दिशा सालियान मामले में उनके सामने करीब छह साल पुराने घटनाक्रम, पुराने बयानों और उपलब्ध सबूतों की दोबारा पड़ताल की चुनौती है.
फिलहाल इस केस में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि CBI ने FIR दर्ज कर दी है और जांच शुरू हो चुकी है. FIR में कई चर्चित लोगों के नाम होने का मतलब यह नहीं है कि वे सभी आरोपी घोषित हो चुके हैं. बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश इस मामले में साफ है कि पर्याप्त सामग्री मिलने से पहले किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा. अब जांच में सामने आने वाले सबूत ही तय करेंगे कि दिशा सालियान की मौत की रात वास्तव में क्या हुआ था और क्या उनके पिता की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं.
aajtak.in