कहां हैं बशीर जेब बलोच? BLA के नेतृत्व परिवर्तन के बाद उनकी मौत और जहर देने की कोशिश के दावों से सस्पेंस

BLA ने बशीर जेब बलोच को कमांडर-इन-चीफ पद से हटाने का ऐलान किया है. उनकी मौत, जहर देने की कोशिश और पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से जुड़े दावों की पुष्टि नहीं हुई है. जानें क्या है ये पूरा मामला?

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बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) में यह बड़ा परिवर्तन है (फोटो-ITG) बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) में यह बड़ा परिवर्तन है (फोटो-ITG)

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सक्रिय सशस्त्र संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन हुआ है. संगठन ने अपने कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलोच के पद छोड़ने का ऐलान किया है. नए कमांडर की नियुक्ति होने तक संगठन की कमान वरिष्ठ कमांड काउंसिल संभालेगी. लेकिन इस घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बशीर जेब बलोच कहां हैं और उन्होंने अचानक संगठन के सर्वोच्च पद से दूरी क्यों बनाई है?

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BLA के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी स्थिति को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. पाकिस्तान समर्थक कुछ सैन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स और टेलीग्राम चैनलों पर उनकी मौत और हत्या की कोशिश से जुड़ी खबरें प्रसारित की गई हैं. हालांकि, इन दावों की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है. BLA ने भी अपने आधिकारिक बयान में बशीर जेब की मौजूदा स्थिति या उनके ठिकाने के बारे में कुछ नहीं बताया है.

बशीर जेब बलोच की स्थिति को लेकर सामने आए दावों में सबसे ज्यादा चर्चा कंधार में उन्हें जहर देने की कथित कोशिश की है. पाकिस्तान समर्थक कुछ टेलीग्राम चैनलों ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से दावा किया कि कंधार में उनके किसी करीबी ने उन्हें जहर देने की कोशिश की थी. इस घटना के बाद उनकी हालत बिगड़ने और उन्हें एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराए जाने की बात भी कही गई.

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इसके अलावा कुछ अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दावा किया गया कि सितंबर में अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तानी सेना की एयरस्ट्राइक में बशीर जेब बलोच मारे गए थे. हालांकि, जहर देने की कोशिश और एयरस्ट्राइक में मौत, दोनों ही दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. न तो इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक सबूत सामने आया है और न ही BLA ने इन पर कोई स्पष्टीकरण दिया है.

बशीर जेब बलोच BLA के बड़े सैन्य अभियान 'ऑपरेशन हेरोफ' के दौरान संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे थे. इस अभियान के दौरान जारी किए गए कुछ वीडियो में उन्हें बिना किसी सुरक्षा घेरे के मोटरसाइकिल चलाते हुए देखा गया था. इन वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों का ध्यान उनकी गतिविधियों पर गया था.

ऑपरेशन हेरोफ के दौरान बशीर जेब की मौजूदगी और उनकी भूमिका को लेकर काफी चर्चा हुई थी. वह संगठन के सैन्य नेतृत्व में अहम स्थान रखते थे. ऐसे में उनके कमांडर-इन-चीफ पद से हटने की घोषणा को BLA के संगठनात्मक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस फैसले के पीछे उनकी व्यक्तिगत स्थिति या किसी सुरक्षा संबंधी वजह का जिक्र संगठन ने नहीं किया है.

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BLA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि संगठन की वरिष्ठ कमांड काउंसिल के फैसले के बाद बशीर जेब बलोच अब कमांडर-इन-चीफ के पद पर नहीं रहेंगे. नए कमांडर की नियुक्ति होने तक संगठन की प्रशासनिक, सैन्य और नीतिगत जिम्मेदारियां वरिष्ठ कमांड काउंसिल संभालेगी. यह काउंसिल संगठन का सर्वोच्च निकाय है और नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने का अधिकार रखती है.

संगठन के मुताबिक, 16 अक्टूबर को BLA के शीर्ष निकायों की संयुक्त बैठक हुई थी. इस बैठक में संगठन के संविधान, नेतृत्व व्यवस्था और भविष्य की रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई. BLA ने दावा किया है कि बैठक में सभी कमांडरों ने सर्वसम्मति से नेतृत्व परिवर्तन का फैसला किया. संगठन के अनुसार, इस फैसले का मकसद उसकी गतिविधियों को नई गति देना और नेतृत्व व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत करना है.

BLA ने यह भी स्पष्ट किया है कि नेतृत्व परिवर्तन का असर उसकी सैन्य गतिविधियों पर नहीं पड़ेगा. संगठन के मुताबिक, नए कमांडर की नियुक्ति होने तक वरिष्ठ कमांड काउंसिल सभी मोर्चों पर गतिविधियों की निगरानी करेगी. संगठन ने दावा किया है कि उसके सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान जारी रहेंगे. हालांकि, नेतृत्व परिवर्तन के दौरान बशीर जेब की भूमिका क्या होगी, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

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BLA ने अपने बयान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को संगठन के 2018 के पुनर्गठन से जोड़ा है. संगठन के मुताबिक, उस समय उसके संस्थापक उस्ताद असलम बलोच ने संगठन में वंशवाद और आजीवन नेतृत्व की व्यवस्था खत्म करने का फैसला किया था. इसके बजाय योग्यता, पारदर्शिता और संस्थागत व्यवस्था को आधार बनाने का सिद्धांत अपनाया गया था.

BLA के दावे के मुताबिक, उस्ताद असलम बलोच ने स्पष्ट किया था कि संगठन में कोई भी कमांडर कितना भी प्रभावशाली या वरिष्ठ क्यों न हो, वह जीवनभर कमांडर-इन-चीफ के पद पर नहीं रह सकता. इसी सोच के तहत संगठन के संविधान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शामिल की गई थी. इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर बिना आंतरिक संघर्ष के नए नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपना था.

संगठन ने दावा किया है कि बलूच प्रतिरोध आंदोलन के इतिहास में यह पहली बार है, जब किसी सशस्त्र संगठन ने आंतरिक टूट या संघर्ष के बिना संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए अपने शीर्ष नेतृत्व में बदलाव किया है. BLA का कहना है कि इस व्यवस्था के तहत नेतृत्व का चयन किसी एक व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि संगठन के संस्थागत फैसले से होता है.

BLA ने दावा किया है कि नेतृत्व परिवर्तन के फैसले को संगठन के सभी क्षेत्रीय कमांडरों, कैंप कमांडरों और विशेष इकाइयों का समर्थन मिला है. संगठन के मुताबिक, इस बदलाव से उसकी सैन्य रणनीति, कमान व्यवस्था और अभियानों की निरंतरता प्रभावित नहीं होगी. वरिष्ठ कमांड काउंसिल फिलहाल सभी प्रशासनिक और सैन्य जिम्मेदारियां संभालेगी.

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संगठन ने यह भी दावा किया है कि उसके सभी मोर्चों पर गतिविधियां जारी हैं और पाकिस्तानी सेना पर उसका दबाव बना हुआ है. BLA के अनुसार, नेतृत्व परिवर्तन की अगली प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए कमांडर-इन-चीफ के नाम की घोषणा की जाएगी. हालांकि, संगठन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि नया कमांडर कौन होगा और उसके चयन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी.

BLA में नेतृत्व परिवर्तन का ऐलान केवल एक कमांडर के पद छोड़ने तक सीमित नहीं है. यह संगठन के भीतर सत्ता हस्तांतरण और कमान व्यवस्था के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है. संगठन का दावा है कि यह बदलाव बिना किसी आंतरिक टकराव, टूट या संघर्ष के हुआ है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व संगठन के भीतर अपनी स्वीकार्यता कैसे स्थापित करता है और मौजूदा कमांडरों के साथ तालमेल कैसे बनाए रखता है.

इस विषय पर 2021 में मिनी एम. जू और बुम्बा मुखर्जी का एक अकादमिक अध्ययन प्रकाशित हुआ था. 'Rebel Command and Control, Time, and Rebel Group Splits' नाम के इस अध्ययन में 1980 से 2014 के बीच दुनिया के अलग-अलग विद्रोही संगठनों का विश्लेषण किया गया था. शोध के मुताबिक, अध्ययन में शामिल करीब दो-पांचवें संगठनों में किसी न किसी समय टूट हुई थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन संगठनों में फैसले लेने की पूरी शक्ति एक ही नेतृत्व के पास केंद्रित रहती है, उनमें समय के साथ बिखराव का खतरा बढ़ सकता है.

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इसके उलट, जिन संगठनों में फैसले लेने की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं और निकायों के बीच बांटी जाती है, उनमें टूट की आशंका तुलनात्मक रूप से कम देखी गई. इस अध्ययन के निष्कर्षों के लिहाज से BLA की वरिष्ठ कमांड काउंसिल को अस्थायी रूप से कमान सौंपने का फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि, किसी शोध के आधार पर BLA में भविष्य के नेतृत्व या संगठन की स्थिरता को लेकर निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.

साल 2024 में मार्क यंगमैन और सेरविन मूर ने भी सशस्त्र संगठनों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर एक अध्ययन किया था. 'Replacing the Standard Bearer: Theorising Leadership Transition in Insurgencies' नाम के इस शोध में विद्रोही संगठनों के नेतृत्व परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण किया गया था. इसमें बताया गया कि किसी संगठन के प्रमुख के बदलने के बाद नए नेतृत्व के सामने अपनी स्वीकार्यता स्थापित करना बड़ी चुनौती होती है.

शोध के मुताबिक, नए कमांडर को संगठन के भीतर मौजूद अलग-अलग गुटों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संबंध बनाए रखने होते हैं. इसके अलावा सैन्य और प्रशासनिक कामकाज की निरंतरता सुनिश्चित करना भी जरूरी होता है. नेतृत्व परिवर्तन के दौरान संगठन की एकजुटता बनाए रखना और नए प्रमुख के प्रति भरोसा कायम करना भी अहम होता है. BLA में अब इन चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी नए कमांडर और वरिष्ठ कमांड काउंसिल पर होगी.

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फिलहाल BLA ने केवल बशीर जेब बलोच के कमांडर-इन-चीफ पद से हटने और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया की जानकारी दी है. उनकी मौजूदा लोकेशन, पद छोड़ने की असली वजह और आगे संगठन में उनकी भूमिका क्या होगी, इन सवालों पर स्थिति साफ नहीं है. सोशल मीडिया पर उनकी मौत और जहर देने की कोशिश से जुड़े दावे भी अब तक अपुष्ट हैं.

BLA ने नए कमांडर की नियुक्ति जल्द करने की बात कही है. ऐसे में आने वाले दिनों में संगठन के नए नेतृत्व के नाम के साथ बशीर जेब बलोच की स्थिति को लेकर भी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बशीर जेब ने अपनी मर्जी से पद छोड़ा है या इसके पीछे कोई ऐसी वजह है, जिसका खुलासा संगठन ने अभी तक नहीं किया है.

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