कर्नाटक के वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में कथित करोड़ों रुपये के घोटाले को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद तेज हो गया है. आरोप है कि CBI ने अपनी जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र की भूमिका को बेहद अहम बताया है.
जांच एजेंसी ने तीन अलग-अलग चार्जशीट में नागेंद्र को कथित घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है. CBI ने 2 जून 2026 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल किए जाने को लेकर आधिकारिक प्रेस रिलीज भी जारी की थी.
CBI की चार्जशीट में कथित तौर पर कहा गया है कि बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में हुई अनियमितताओं और आपराधिक साजिश में व्यापक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आरोप है कि उनकी भूमिका सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कथित साजिश के अहम हिस्से थे.
हालांकि, चार्जशीट में आरोपी बनाए जाने का मतलब दोष साबित होना नहीं है. किसी भी आरोपी के खिलाफ अपराध अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही साबित माना जाता है.
अब विवाद इस बात को लेकर है कि CBI की चार्जशीट सामने आने के करीब एक महीने के भीतर ही कांग्रेस हाईकमान ने बी. नागेंद्र को दोबारा मंत्री पद कैसे दे दिया. विपक्ष इसी फैसले को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है.
सवाल किया जा रहा है कि जब जांच एजेंसी ने कथित घोटाले में नागेंद्र की भूमिका को इतना गंभीर बताया है, तो उन्हें फिर से कर्नाटक कैबिनेट में जगह देने के पीछे क्या वजह थी. इससे पहले वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले को लेकर नागेंद्र को मंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था.
इसी मुद्दे पर विपक्ष ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा है. सवाल उठाया जा रहा है कि क्या नागेंद्र को किसी विशेष ‘Payment quota’ के तहत मंत्री बनाया गया और कर्नाटक कैबिनेट के ‘Full Meals’ का फायदा किसे मिला?
इस राजनीतिक हमले में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से जवाब मांगा गया है. फिलहाल, यह मामला CBI की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है, जबकि नागेंद्र को दोबारा मंत्री बनाए जाने के फैसले ने कर्नाटक की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
नागार्जुन