बदलापुर कांड: मजिस्ट्रेट जांच में फेक एनकाउंटर के दावे को ठाणे पुलिस ने किया खारिज

बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी की हिरासत में मौत के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपित ठाणे के दो पुलिसकर्मियों ने सोमवार को इस दावे से इनकार किया कि उसकी हत्या फेक एनकाउंटर में की गई थी. इस मामले से संबंधित सुनवाई में हस्तक्षेप करने की अनुमति मांगने के लिए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है.

Advertisement
बदलापुर यौन उत्पीड़न केस के आरोपी की हिरासत में मौत का मामला. बदलापुर यौन उत्पीड़न केस के आरोपी की हिरासत में मौत का मामला.

aajtak.in

  • ठाणे,
  • 03 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:24 PM IST

बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी की हिरासत में मौत के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपित ठाणे के दो पुलिसकर्मियों ने सोमवार को इस दावे से इनकार किया कि उसकी हत्या फेक एनकाउंटर में की गई थी. इस मामले से संबंधित सुनवाई में हस्तक्षेप करने की अनुमति मांगने के लिए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है.

उन्होंने एक खंडपीठ के समक्ष दायर अपने अंतरिम आवेदन में आरोपी अक्षय शिंदे के पिता के इस दावे को खारिज कर दिया कि पिछले साल 23 सितंबर को ठाणे जिले में फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या कर दी गई थी. उन्होंने कहा कि उनकी सुनवाई के बिना पारित कोई भी आदेश समाज में उनकी प्रतिष्ठा को बहुत ठेस पहुंचाएगा.

Advertisement

इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच हुई थी, जिसमें पांच पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया है. मजिस्ट्रेट ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है. इसमें दावा किया गया कि अक्षय शिंदे को फर्जी मुठभेड़ में मारा था. जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले की खंडपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन किया था.

इसके बाद कहा था कि सरकार इस जांच के आधार पर केस दर्ज करने के लिए बाध्य है. आरोपियों में ठाणे क्राइम ब्रांच के सीनियर इंस्पेक्टर संजय शिंदे, इंस्पेक्टर नीलेश मोरे, हेड कांस्टेबल अभिजीत मोरे, हरीश तावड़े और एक पुलिस ड्राइवर शामिल है. इन सभी के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए निर्देश दिया गया था.

कोर्ट ने कहा था, "मजिस्ट्रेट ने जांच करके अपनी रिपोर्ट पेश की है. इसका निष्कर्ष है कि आरोपी अक्षय शिंदे की मौत के लिए पांच पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं." खंडपीठ ने कहा कि कानून के अनुसार, पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए. इसके खिलाफ जांच की जानी चाहिए. 

Advertisement

कोर्ट ने आगे कहा था, "आप (सरकार) इस मजिस्ट्रेट रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बाध्य हैं. हमें बताएं कि कौन सी एजेंसी इस मामले की जांच करेगी." रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट ने कहा है कि अक्षय शिंदे के साथ वैन में मौजूद चार पुलिसकर्मी स्थिति को संभाल सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. 

इस रिपोर्ट में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के निष्कर्षों पर ध्यान दिया गया है. इसमें कहा गया है कि मृतक की पिस्तौल पर कोई फिंगरप्रिंट नहीं था, जिस पर उसने कांस्टेबल से छीनकर गोली चलाने का आरोप लगाया था. मृतक के हाथों पर गोली का कोई निशान भी नहीं था. हाई कोर्ट ने कहा आरोप सत्य पाए गए हैं. 

मजिस्ट्रेट रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों में पुलिस को किस तरह की सावधानी बरतनी होगी. इसकी एक प्रति अभियोजन पक्ष और अन्ना शिंदे को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया. कोर्ट ने कहा था, "हम मूल रिपोर्ट, उससे जुड़े सभी दस्तावेज और गवाहों के बयान अभी अपने पास रखेंगे.''

बताते चलें कि अक्षय शिंदे (24) को पिछले साल अगस्त में बदलापुर के एक स्कूल के शौचालय में दो नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. वो स्कूल में अटेंडेंट था. 23 सितंबर को तलोजा जेल से पूछताछ के लिए ले जाते समय पुलिस गोलीबारी में उसकी मौत हो गई थी. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »