दिल्ली पुलिस की साइबर साउथ यूनिट ने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो देश और विदेश में सक्रिय साइबर अपराधियों को बैंक खाते, सिम कार्ड और अन्य संसाधन उपलब्ध कराते थे. इस मामले में पुलिस ने 7.22 लाख रुपये की ठगी का खुलासा किया है.
दिल्ली पुलिस की साइबर साउथ यूनिट को एक महिला एम.एस. की शिकायत मिली थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि साइबर ठगों ने उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर 7.22 लाख रुपये की ठगी कर ली. शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खुद को मुंबई एटीएस पुलिस, आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया था. इसके बाद महिला को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रखकर मानसिक दबाव बनाया गया और आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर करवा ली गई. शिकायत मिलने के बाद साइबर साउथ थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई.
जांच के दौरान पुलिस ने वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण किया. जांच में पता चला कि ठगी की रकम सबसे पहले एक बंधन बैंक खाते में जमा कराई गई थी, जिसे समीरन रॉय और प्रिंस शॉ संचालित कर रहे थे. इसके बाद इस रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर छिपाने की कोशिश की गई. डिजिटल साक्ष्यों की जांच में पुलिस को ऐसे सुराग मिले, जिनसे पता चला कि इस नेटवर्क के तार थाईलैंड और म्यांमार में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं.
तकनीकी जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम ने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी की. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी एक संगठित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे और साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए जरूरी बैंकिंग ढांचा उपलब्ध कराते थे.
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल उपलब्ध कराते थे. इसके बाद साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देते थे. डर और दबाव में आकर पीड़ित लोग आरोपियों के बताए गए बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते थे.
गिरफ्तार आरोपियों में दक्षिण 24 परगना निवासी समीरन रॉय, हावड़ा निवासी प्रिंस शॉ और हावड़ा निवासी समर चटर्जी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, समर चटर्जी इस गिरोह को म्यूल बैंक अकाउंट और बैंकिंग किट उपलब्ध कराने का काम करता था. शुरुआती जांच में तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले से किसी आपराधिक मामले का रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, हालांकि पुलिस इनके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है. इनमें छह मोबाइल फोन, एक एचपी विक्टस लैपटॉप, 18 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, सात चेकबुक, 15 सिम कार्ड, दो रबर स्टैंप और छह आधार कार्ड शामिल हैं. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क से देश और विदेश में सक्रिय कितने अन्य अपराधी जुड़े हुए हैं और उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है.
हिमांशु मिश्रा