संभल हिंसा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा... सियासी दुश्मनी, तुर्क और पठानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई और भड़काऊ बयानबाजी बनी वजह

संभल हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में सांसद जियाउर रहमान बर्क, एडवोकेट जफर अली, मशहूद अली फारूकी और सोहेल इकबाल को हिंसा की साजिश और भीड़ भड़काने के लिए जिम्मेदार बताया गया है. पढ़ें आयोग की रिपोर्ट के खुलासे.

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कमीशन की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे शामिल हैं (फोटो-ITG) कमीशन की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे शामिल हैं (फोटो-ITG)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा को लेकर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे किए गए हैं. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि पहले से तैयार की जा रही थी. रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, तुर्क और पठानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई, भड़काऊ बयानबाजी और भीड़ में शामिल अपराधी तत्वों ने पूरे घटनाक्रम को हिंसक बना दिया. आयोग ने यह भी साफ कर दिया कि हिंसा में मारे गए चार लोगों की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई थी.

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सांसद समेत ये लोग जिम्मेदार
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में संभल के सांसद जियाउर रहमान बर्क के साथ-साथ शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट जफर अली, सचिव मशहूद अली फारूकी और स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल को हिंसा की साजिश रचने और लोगों को भड़काने के लिए जिम्मेदार ठहराया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लोगों ने मस्जिद के सर्वे का विरोध करने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को मस्जिद की सुरक्षा के नाम पर इकट्ठा होने का आह्वान किया था. इससे इलाके में तनाव लगातार बढ़ता चला गया.

बयानों से बढ़ा आक्रोश
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, लोगों के बीच यह संदेश फैलाया गया कि मस्जिद खतरे में है और इसे अयोध्या की तरह उनसे छीन लिया जाएगा. 'मस्जिद को हर हाल में बचाया जाएगा' और 'अयोध्या की तरह मस्जिद नहीं छिनने देंगे' जैसे बयानों ने मुस्लिम समुदाय में गुस्सा और असुरक्षा की भावना पैदा की. रिपोर्ट में कहा गया है कि अदालत के आदेश की वास्तविक स्थिति लोगों से छिपाई गई और यह प्रचार किया गया कि सर्वे के बहाने मस्जिद पर कब्जा कर उसे ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है. इससे प्रशासन और पुलिस के प्रति अविश्वास का माहौल बन गया.

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19 नवंबर से ही रची जा रही थी साजिश
रिपोर्ट में कहा गया है कि 19 नवंबर 2024 को कोर्ट की ओर से सर्वे की कार्रवाई अधूरी रहने के बाद से ही हिंसा की योजना बनाई जाने लगी थी. लोगों के बीच लगातार यह भ्रम फैलाया गया कि सर्वे का मकसद मस्जिद पर कब्जा करना है. आयोग के अनुसार, इसी रणनीति के तहत समुदाय के लोगों को भावनात्मक रूप से भड़काया गया और उन्हें मस्जिद की रक्षा के नाम पर एकजुट होने के लिए प्रेरित किया गया. यही माहौल आगे चलकर हिंसा का कारण बना.

व्हाट्सएप ग्रुप से भीड़ जुटाने का आरोप
जांच आयोग की रिपोर्ट में सोशल मीडिया की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक 21 नवंबर 2024 को सांसद जियाउर रहमान बर्क के नाम से संचालित एक व्हाट्सएप ग्रुप में लोगों से शाही मस्जिद में नमाज अदा करने की अपील की गई. यही संदेश दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप में भी तेजी से प्रसारित किया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास इकट्ठा होने लगे. आयोग का मानना है कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भीड़ जुटाने के लिए किया गया.

ऐसे बयान के बाद बिगड़ा माहौल
रिपोर्ट के अनुसार, अगले दिन सांसद जियाउर रहमान बर्क का बयान आया- 'मस्जिद है, मस्जिद थी और मस्जिद रहेगी.' यह बयान सार्वजनिक होने के बाद इलाके का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया. आयोग का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी ने पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाया. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और हालात तेजी से हिंसक रूप लेते चले गए.

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भीड़ ने पुलिस पर किया हमला
आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसक भीड़ ने पुलिस और प्रशासन को निशाना बनाया. रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ की ओर से 'सर तन से जुदा' जैसे नारे लगाए गए और पुलिस बल पर हमला किया गया. हिंसा के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीन ली गई और उसी से फायरिंग की गई. इस फायरिंग में सात पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि पूरे घटनाक्रम में कुल 28 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ में बड़ी संख्या में आपराधिक तत्व भी शामिल थे, जिन्होंने सुनियोजित तरीके से पुलिस को निशाना बनाया.

पुलिस की गोली से नहीं हुई मौत
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष देते हुए कहा है कि संभल हिंसा में जान गंवाने वाले चार लोगों की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई. आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक तथ्यों और अन्य जांच सामग्री के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है. यह रिपोर्ट उस दावे से अलग तस्वीर पेश करती है, जिसमें पुलिस फायरिंग को मौतों की वजह बताया जा रहा था.

राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई भी बनी वजह
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सांसद जियाउर रहमान बर्क और सोहेल इकबाल दोनों अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव और वर्चस्व को बनाए रखना चाहते थे. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष पुलिस और प्रशासन को बदनाम करने के लिए लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहे थे. आयोग ने यह भी कहा है कि दोनों के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तथा तुर्क और पठान समुदायों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने भी हिंसक माहौल को और भड़काने में अहम भूमिका निभाई. यही कारण था कि तनाव धीरे-धीरे व्यापक हिंसा में बदल गया.

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