किराये ने रुलाया! महिलाओं ने कहा- अब घर खरीदना पहला वित्तीय गोल है, क्योंकि...

खास बात ये है कि घर खरीदने की चाहत महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. 40 फीसदी महिलाओं ने घर खरीदने को अगले 5 साल की प्राथमिकता बताया है.

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घर खरीदने की चाहत में महिलाएं आगे. (Photo: ITG) घर खरीदने की चाहत में महिलाएं आगे. (Photo: ITG)

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:36 PM IST

अपना घर होना हर भारतीय की बड़ी ख्वाहिशों में शामिल होता है. ईंट-ईंट जोड़कर बनने वाला ये आशियाना परिवार को सुरक्षा और अपनेपन का एहसास देता है. होम क्रेडिट इंडिया की रिपोर्ट 'द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026' के मुताबिक अब लोअर-मिडिल-क्लास भारतीयों के लिए घर खरीदना सबसे बड़ा फाइनेंशियल गोल बनकर उभरा है. वहीं जीएसटी 2.0 (GST 2.0) के लागू होने के बाद भारतीय घरेलू बजट में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं.

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घर खरीदने की चाहत में महिलाएं आगे
बढ़ती महंगाई के बावजूद लोगों का अपने वित्तीय लक्ष्यों पर भरोसा बढ़ा है. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि घर खरीदने का सपना अब तेजी से प्राथमिकता बन रहा है. 31 फीसदी लोअर-मिडिल-क्लास भारतीय अगले 5 साल में घर खरीदने को अपनी सबसे बड़ी वित्तीय प्राथमिकता मानते हैं. पिछले साल के मुकाबले इस आंकड़े में 8 परसेंटेज पॉइंट का इजाफा हुआ है. खास बात ये है कि घर खरीदने की चाहत महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. 40 फीसदी महिलाओं ने घर खरीदने को अगले 5 साल की प्राथमिकता बताया है, जबकि पुरुषों में ये आंकड़ा 29 परसेंट रहा है. 85 फीसदी लोगों को अगले 5 साल में अपने फाइनेंशियल गोल पूरे होने का पूरा भरोसा है.

किराने पर राहत, लेकिन किराये ने बढ़ाया बोझ
घरेलू बजट की बात करें तो 2026 में लोगों को रोजमर्रा के खर्चों में थोड़ी राहत मिली है. लेकिन मकान के किराये ने जेब ढीली कर दी है. आंकड़ों और सर्वे के मुताबिक 2026 में भी किराने का सामान घरेलू खर्चों का सबसे बड़ा मासिक हिस्सा बना हुआ है, जो औसतन 8,505 रुपये (कुल खर्च का 25%) है. हालांकि 2025 की तुलना में इसमें 8% की गिरावट आई है. वहीं मकान के किराये में 21% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. किराया अब औसतन 6,965 प्रति माह हो गया है, जो कुल बजट का 21% हिस्सा है. बच्चों की शिक्षा पर परिवार प्रति माह 6,604 (20%) खर्च कर रहे हैं, जो पिछले साल से 12% ज्यादा है. इसके अलावा आवागमन (Commute) पर 5,094 (15%) और मेडिकल खर्चों पर 2,802 (8%) खर्च हो रहे हैं. 

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GST 2.0 से कहां मिली सबसे ज्यादा राहत?
जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद कई कैटेगरीज में परिवारों ने कीमतों में कमी दर्ज की है. आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग सेक्टर्स में लोगों को बड़ी राहत मिली है. सबसे ज्यादा 26% उपभोक्ताओं ने टू-व्हीलर्स और 25% ने कारों की कीमतों में कमी की बात कही है. स्मार्टफोन और होम अप्लायंसेज में भी 22% लोगों को राहत महसूस हुई है. दवाओं और हेल्थकेयर में 21%, जबकि खाने-पीने और किराने के सामान में 19% उपभोक्ताओं ने कीमतें कम होने की जानकारी दी है. घर बनाने के सामान (Housing Material) के मामले में भी 18% लोगों को कीमतों में कमी दिखी है. राहत के बावजूद लोग फिजूलखर्ची नहीं कर रहे हैं, बल्कि इस बचे हुए पैसे का इस्तेमाल बेहतर भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बचत पर कर रहे हैं.

प्रॉपर्टी की कीमतों में भी लगातार तेजी
घर खरीदने की ये चाहत ऐसे वक्त में बढ़ रही है, जब प्रॉपर्टी की कीमतें भी तेजी से ऊपर जा रही हैं. RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में ऑल इंडिया हाउस प्राइस इंडेक्स पिछली तिमाही के मुकाबले 1.1 फीसदी बढ़ा है. सालाना आधार पर भी हाउस प्राइस इंडेक्स में 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. चंडीगढ़, जयपुर, कानपुर, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में ज्यादा उछाल देखने को मिला है. यानी घर खरीदना लोगों की सबसे बड़ी वित्तीय प्राथमिकता जरूर बन रहा है. लेकिन बढ़ती कीमतों के बीच इस सपने को पूरा करने के लिए बचत, इनकम की स्थिरता और होम लोन की EMI का सही संतुलन बनाना बेहद जरूरी होगा.

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