18000 स्‍पेशल ट्रेनें, 700 AI कैमरे... रेलमंत्री ने बताया- भीड़ कैसे हो रही मैनेज?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍ण्‍व ने दिवाली और छठ के लिए स्पेशल ट्रेनों के बारे में बड़ी जानकारी दी है. उन्‍होंने कहा कि पिछले साल त्‍योहारी सीजन में 12000 से ज्‍यादा स्‍पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं और अब इस साल हम 18000 स्‍पेशल ट्रेन चला रहे हैं.

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रेलमंत्री ने कहा कि 18000 स्‍पेशल ट्रेन चलाई जा रही हैं. (Photo: PTI) रेलमंत्री ने कहा कि 18000 स्‍पेशल ट्रेन चलाई जा रही हैं. (Photo: PTI)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने शनिवार को बताया कि दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पर भीड़ को मैनेज करने के लिए रेलवे ने इस साल 18000 स्‍पेशल ट्रेन चलाया है. वहीं पिछले साल त्‍योहारी सीजन के दौरान 12000 स्‍पेशल ट्रेन चलाया था. वैष्णव ने बताया कि यात्रियों को अपनी ट्रेनों का इंतजार आराम से करने में मदद के लिए लगभग 20 रेलवे स्टेशनों पर 'होल्डिंग एरिया' बनाए गए हैं. 

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रेलमंत्री ने आगे जानकारी दी कि टिकट काउंटरों को भी स्टेशन परिसर से हटाकर इन जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया है और सुरक्षा जांच में तेजी लाने व लंबी कतारों को रोकने के लिए अतिरिक्त स्कैनिंग काउंटर लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि भीड़-भाड़ को कंट्रोल करने के उपायों के तहत, रेलवे ने लगभग 700 AI-सक्षम कैमरे भी लगाए हैं. 

कई जगहों पर रखी गई हैं स्‍पेशल ट्रेनें
अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि स्‍पेशल ट्रेनों को कई जगहों पर रखा गया है, जिसमें शकुर बस्‍ती, निज्‍जामुद्दीन, आनंद विहार टर्मिनल और नई दिल्‍ली स्‍टेशन एरिया शामिल हैं. उन्‍होंने आगे कह‍ा कि भारतीय रेलवे ने पिछले फाइनेंशियल ईयर 75,000 स्‍पेशल ट्रेनों को ऑपरेट किया था और यह नंबर इस साल क्रॉस करके 80,000 हो जाएगा. उन्‍होंने कहा कि आज छोट दिवाली के मौके पर ट्रैफिक अब नॉर्मल हो गई है. 

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उन्होंने कहा कि आज छोटी दिवाली के मौके पर भी, सभी जगहों पर ट्रैफिक की स्थिति सामान्य हो गई है. हमारी कोशिश है कि पूरे त्योहारी सीजन के दौरान स्थिति ऐसी ही बनी रहे. ट्रेनों की देरी, नेटवर्क पर दबाव, माल ढुलाई और क्षमता बढ़ाने की दीर्घकालिक परियोजनाओं पर बात करते हुए वैष्णव ने कहा कि अभी हम सबसे ज्यादा दबाव वाले दौर से गुजर रहे हैं. 

माल ढुलाई में काफी हो चुकी है बढ़ोतरी
कोयले और अन्य सामानों की ढुलाई काफी बढ़ गई है. इससे निपटने के लिए, पिछले 10 सालों में 36,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल ट्रैक बिछाए गए हैं. नए ट्रैक बनाना और क्षमता बढ़ाना बहुत जरूरी है. यही एक स्थायी समाधान है. हमें और अधिक ट्रैक बनाने का काम जारी रखना होगा. 

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