₹1.46 लाख की ओर फिसला सोना... ये अमेरिकी आंकड़े तय करेंगे आगे की चाल

सोने की कीमतों में नरमी के बीच निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले रुख पर है. डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती सोने पर दबाव बढ़ा रही है. दूसरी ओर, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और मध्य पूर्व में तनाव भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं.

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सोने की कीमतों में नरमी के बीच निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले रुख पर. (File Photo) सोने की कीमतों में नरमी के बीच निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले रुख पर. (File Photo)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:29 AM IST

सोने की कीमतों में इन दिनों नरमी देखने को मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की चाल कमजोर बनी हुई है. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर है. एमसीएक्स गोल्ड मंगलवार को ₹1,46,247 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था. इसमें करीब 0.15% की गिरावट थी. यानी सोने की कीमत पर फिलहाल दबाव बना हुआ है. अगर आप सोना खरीदने या इसमें निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर फैसला करना ठीक नहीं होगा.

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सोने की कीमतों को समझने के लिए तीन चीजों पर नजर रखना जरूरी है- डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों का रुख. जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न यानी यील्ड बढ़ती है और डॉलर मजबूत होता है, तो निवेशकों के लिए सोने की तुलना में दूसरे विकल्प ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं. इसका असर सोने की कीमतों पर दबाव के रूप में दिख सकता है.

ऑगमोंट की डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, फिलहाल बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले का असर समझने में लगा है. उन्होंने कहा कि फेड ने 16 सितंबर को दरों को 3.75% से 4.00% तक बढ़ाया था. यह तीन साल में पहली बढ़ोतरी थी. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और भू-राजनीतिक तनाव ने भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है. महंगाई बढ़ने की आशंका में ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं, जिसका असर सोने पर पड़ता है.

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तेल की कीमतों और ईरान युद्ध का असर

मध्य पूर्व में तनाव भी बाजार के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर निवेशकों की नजर है. आम तौर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर फायदा मिल सकता है, लेकिन इस बार इसका असर सीधा नहीं दिख रहा है. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया, जबकि डब्ल्यूटीआई करीब 92 डॉलर पर बना रहा. तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई की चिंता बढ़ती है. इससे बॉन्ड यील्ड और डॉलर को भी सहारा मिल सकता है, जो सोने पर दबाव बढ़ाने वाला फैक्टर बन जाता है. इसका मतलब ये है कि अभी सोने की चाल सिर्फ सोने की मांग से तय नहीं हो रही. अमेरिका की ब्याज दरें, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, महंगाई और मध्य पूर्व का तनाव मिलकर इसकी दिशा तय कर रहे हैं.

अब किन आंकड़ों पर नजर?

आने वाले दिनों में अमेरिका के कई अहम आर्थिक आंकड़े सोने की दिशा तय कर सकते हैं. इनमें जॉब ओपनिंग्स, एडीपी रोजगार रिपोर्ट, पीसीई प्राइस इंडेक्स और नॉन-फार्म पेरोल्स शामिल हैं. इन आंकड़ों से यह संकेत मिलेगा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है और आगे ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख क्या हो सकता है. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं, तो बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की तरफ दबाव बना रह सकता है. ऐसी स्थिति सोने की कीमतों के लिए भी चुनौती बढ़ा सकती है. वहीं, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेड अधिकारियों की टिप्पणियां और ईरान से जुड़ी बातचीत के घटनाक्रम भी सोने की छोटी अवधि की चाल को प्रभावित कर सकते हैं.

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अगर आपने पहले से सोने में निवेश कर रखा है, तो सिर्फ एक-दो दिन की गिरावट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. सोने की कीमत कई अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर एक साथ प्रतिक्रिया करती है, इसलिए छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. वहीं, अगर आप अभी नया निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय खरीदारी को अलग-अलग हिस्सों में बांटना एक तरीका हो सकता है. इससे किसी एक स्तर पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम किया जा सकता है. फिलहाल सोने की अगली बड़ी चाल के लिए डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व के संकेत अहम रहेंगे. इसके साथ ही ईरान वार्ता और मध्य पूर्व के घटनाक्रम भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज की ओर से दिए गए विचार, राय, सुझाव और सिफारिशें उनके अपने हैं और ये आजतक के विचार नहीं हैं. निवेश या ट्रेडिंग से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले क्वालिफाइड ब्रोकर या फाइनेंशियल एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें.)

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