Gen Z को पैसों की टेंशन! जॉब से लेकर घर में बदलने पड़ रहे फैसले

Gen Z के लिए अब बड़े फैसले सिर्फ पसंद और जरूरत से तय नहीं हो रहे. नौकरी कहां करनी है, किस शहर में रहना है या कब कोई बड़ा फैसला लेना है, इन सब पर कमाई और खर्च का असर पड़ रहा है. बढ़ती महंगाई और महंगे शहरों के बीच अब हर बड़े सपने के साथ एक सवाल जुड़ गया है-क्या इसे अफॉर्ड किया जा सकता है?

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क्या जेन जी पैसे के रीजन से टल रहे बड़े फैसले? क्या जेन जी पैसे के रीजन से टल रहे बड़े फैसले?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

आज की Gen Z के लिए जिंदगी के बड़े फैसले सिर्फ पसंद, जरूरत या करियर के हिसाब से तय नहीं हो रहे है. इन फैसलों को तय करने के लिए पैसा और आर्थिक स्थिति भी जरूरी हिस्सा बन गई है. एक व्यक्ति कितना कमाता है उसका सीधा असर इस बात पर पड़ता है कि वो किस शहर में कितने BHK के घर में रह रहा है और उसका लिविंग स्टैंडर्ड क्या है.

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और ये तो बस एक उदाहरण है एक व्यक्ति के लाइफ की हर एक चॉइज इस चीज से जुड़ी है कि वो कमाता कितना है और उतनी कमाई में क्या वो अपने पूरे शौक और जरूरतें पूरी कर पाएगा. डेलॉयट इंडिया की 2026 जेन जी और मिलेनियल सर्वे बताती है कि आर्थिक दबाव युवाओं के फैसलों और फ्यूचर की प्लानिंग को प्रभावित कर रहा है.

पैसे के रीजन से टल रहे बड़े फैसले

डेलॉयट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 54% जेन जी और 44% मिलेनियल्स ने माना कि उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति की वजह से जिंदगी के बड़े फैसले टाले हैं.

इसका मतलब है कि नौकरी बदलने, घर लेने, शादी करने या फ्यूचर से जुड़े दूसरे बड़े फैसलों पर अब सिर्फ मर्जी या जरूरत से फैसला नहीं हो रहा. यंगस्टर्स पहले अपनी फायनेंशियल कंडिशन और आगे के खर्चों को भी देख रहे हैं.

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घर की कीमत तय कर रही करियर की डायरेक्शन

फायनेंशियल प्रेशर का असर सिर्फ बड़े खर्चों तक सीमित नहीं है. भारत में 60% से ज्यादा जेन जी और मिलेनियल्स का कहना है कि घर की अफॉर्डिबिलिटी उनके करियर से जुड़े फैसलों  को प्रभावित करती है.

यानी नौकरी चुनते टाइम सिर्फ सैलरी मायने नहीं रखती. यह भी देखा जा रहा है कि उस कमाई में किस शहर में रहा जा सकता है, किराया कितना होगा और रोजमर्रा के खर्च कितने बढ़ेंगे.

डेलॉयट के मुताबिक दुनियाभर में जेन जी के बीच ये आंकड़ा करीब तीन-चौथाई तक पहुंचता है. ऐसे में घर खरीदने का सामर्थ्य युवाओं के लिए सिर्फ घर से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि करियर की प्लानिंग का हिस्सा भी बन रहा है.

रिपोर्ट ये भी बताती है कि भारत में 20% जेन जी और 13% मिलेनियल्स को हर महीने अपने रहने के खर्च को पूरे करने में परेशानी होती है. जेन जी और मिलेनियल्स ग्लोबल लेवल पर ये आंकड़ा दोनों के लिए 34% है.

इसका मतलब है कि भारत की जेन जी पर पैसे को लेकर दबाव दुनिया के दूसरे देशों की Gen Z के मुकाबले कम है, लेकिन फिर भी पैसों की चिंता उनकी जिंदगी के बड़े फैसलों को प्रभावित कर रही है.

पैसे के साथ बन रही है फ्यूचर की प्लानिंग

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डेलॉयट की रिपोर्ट से एक बड़ी पिक्चर सामने आती है-Gen Z के लिए  करियर, हाउसिंग और पर्सनल लाइफ अब फायनेंशिल प्लानिंग से अलग नहीं हैं. नौकरी कहां करनी है, किस शहर में रहना है और कौन-से बड़े फैसले कब लेने हैं, इन सबके पीछे आपका बजट एक जरूरी फैक्टर बनता जा रहा है.

यानी जेन जी के बड़े ड्रीम्स के साथ अब एक और सवाल जुड़ गया है- 'क्या मैं इसे अफॉर्ड कर सकता हूं?'
 

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