देश में अगले साल संभावित 15 अगस्त से बुलेट ट्रेन रेल ट्रैक पर दौड़ती हुई नजर आने लगेगी. 2017 में बुलेट ट्रेन परियोजना लाई गई थी और अब एक दशक बाद ये सपना पूरा होने वाला है. भारत की पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलेगी. लेकिन इसके साथ ही प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन (Delhi to Siliguri Bullet Train) कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण चरण में एंट्री कर चुका है. इस रूट पर बुलेट ट्रेन के जरिए अब तक लगने वाला 20 घंटे का समय घटकर महज 6 घंटे के आसपास का रह जाएगा.
885 Km रेल रूट को लेकर सौंपी रिपोर्ट
ताजा अपडेट के मुताबिक, राष्ट्रीय हाई स्पीड ट्रेन कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने वाराणसी और पटना होते हुए 865 किलोमीटर लंबे दिल्ली-सिलीगड़ी रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने से जुड़ी एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) रेल मंत्रालय को सौंप दी है. Delhi-Varanasi-Patna-Siluguri बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से इस यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है.
ऐसे घटता जाएगा यात्रा का समय
बुलेट ट्रेन के नए रूट के प्रस्ताव के मुताबिक, दिल्ली-वाराणसी के बीच लगभग 756 किलोमीटर की दूरी को तय करने में बुलेट ट्रेन से लगभग 3 घंटे 50 मिनट का समय लगेगा, जो अब तक करीब 11-12 घंटे लगता है.
इसके अलावा प्रस्तावित वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो लगभग 744 किलोमीटर लंबा है. इसमें वाराणसी-सिलीगुड़ी की यात्रा के समय को लगभग 2 घंटे 55 मिनट तक कम कर सकता है, जबकि पटना-सिलीगुड़ी की यात्रा में लगभग 2 घंटे लग सकते हैं.
कुल मिलाकर, हाई-स्पीड रेल लिंक दिल्ली-पटना की यात्रा को लगभग 12-14 घंटे से घटाकर लगभग 4 घंटे 41 मिनट तक, जबकि दिल्ली-सिलीगुड़ी के सफर में लगने वाला करीब 20-24 घंटे का टाइम बुलेट ट्रेन से घटकर लगभग 6 घंटे 45 मिनट तक हो सकता है. इससे उत्तरी, पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आ सकता है.
बिहार की रेल कनेक्टिविटी में बड़ा चेंज
दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर बिहार की कनेक्टिविटी को बदलने का काम करेगा. इसे Bihar के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वाराणसी से राज्य में एंट्री के बाद बुलेट ट्रेन सिलीगुड़ी की ओर बढ़ने से पहले बक्सर, आरा और पटना जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी.
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन लाइन पूर्वी भारत में संपर्क के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है और इससे पूर्वोत्तर तक पहुंच भी आसान होगी. सिर्फ इतना ही नहीं, यात्रा के समय में कमी से बिहार में आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क