13 घंटे, 700 KM और खूबसूरत वादियां... अब इस रूट पर दौड़ेगी वंदे भारत

ट्रेन का ये सफर आपको सिर्फ मंजिल तक नहीं पहुंचाएगा, बल्कि ऐसी खूबसूरत वादियों के दीदार का मौका देगा जो जीवनभर की याद बनकर आपके साथ रहेगा. वंदे भारत ट्रेन हरियाली, पहाड़ी रास्ते, झरने जैसी प्राकृतिक खूबसूरती से भरे नजारों के बीच करीब 13 घंटे के इस सफर और खास बनाएगी.

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रेलवे को वेस्टर्न घाट में वंदे भारत ट्रेन चलाने के लिए इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ खास सेफ्टी तैयारियां करनी पड़ीं. (Photo: X/@RailMinIndia) रेलवे को वेस्टर्न घाट में वंदे भारत ट्रेन चलाने के लिए इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ खास सेफ्टी तैयारियां करनी पड़ीं. (Photo: X/@RailMinIndia)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST

बेंगलुरु से गोवा जाना हो तो आपके पास आमतौर पर दो विकल्प होते हैं- जल्दी पहुंचना है तो फ्लाइट और कम खर्च में जाना है तो बस या ट्रेन. लेकिन अगर मंजिल के साथ रास्ते का मजा भी लेना हो, तो बेंगलुरु-गोवा वंदे भारत का सफर अलग अनुभव दे सकता है. रेलवे मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को बेंगलुरु तक बढ़ाने जा रहा है. इसके बाद गोवा और बेंगलुरु के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक प्रीमियम ट्रेन का नया विकल्प मिल जाएगा.

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करीब 13 घंटे की यह यात्रा शहर की भागदौड़ से निकलकर पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ी रास्तों और तटीय कर्नाटक के खूबसूरत नजारों के बीच से गुजरती है. इस सफर में रास्ते के नजारे भी यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. इसमें वंदे भारत जैसी नए जमाने की ट्रेन का साथ मिल जाए तो फिर क्या ही कहने. अभी बेंगलुरु और गोवा के बीच चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों को सफर पूरा करने में करीब 15 घंटे लगते हैं.

मंगलुरु के रास्ते गोवा पहुंचेगी ट्रेन

रेलवे मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मौजूदा मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को यशवंतपुर जंक्शन तक बढ़ाया जाएगा. यानी ट्रेन बेंगलुरु से चलकर मंगलुरु होते हुए गोवा के मडगांव तक जाएगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसी महीने की शुरुआत में सांसद बृजेश चौटा और विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को लिखे पत्र में इसकी जानकारी दी थी. अभी यह ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल और मडगांव के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है. गुरुवार को इसकी सेवा नहीं होती. मंगलुरु से मडगांव के बीच एक तरफ का सफर 6 घंटे से थोड़ा कम समय में पूरा होता है.

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करीब 13 घंटे में पूरा होगा सफर

बेंगलुरु के यशवंतपुर से गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशनों के बीच वंदे भारत का यह सफर करीब 13 घंटे का होगा. बेंगलुरु से गोवा की दूरी करीब 700 किलोमीटर के आसपास है और इस रूट पर ट्रेन को कई पहाड़ी और घुमावदार हिस्सों से होकर गुजरना पड़ता है. अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ जल्दी पहुंचना है, तो फ्लाइट अब भी काफी कम समय लेती है. वहीं रात की बस से सफर करने में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. वंदे भारत ट्रेन इन दोनों के बीच एक ऐसा विकल्प साबित होगी, जिसमें पूरा सफर दिन के समय करते हुए प्राकृतिक सुंदरता से भरे इस पूरे रास्ते को देखने का मौका मिलेगा.

वेस्टर्न घाट की खूबसूरती के दीदीर

इस रूट पर सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड के बीच करीब 55 किलोमीटर का घाट सेक्शन आता है. पश्चिमी घाट का यह इलाका रेल यात्रा के सबसे खूबसूरत हिस्सों में गिना जाता है. ट्रेन यहां पहाड़ियों, हरियाली और घाटियों के बीच से गुजरती है. इलेक्ट्रिफिकेशन और रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे में सुधार के बाद इस सेक्शन पर रेल ऑपरेशन पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन पहाड़ी रास्ता होने की वजह से यहां ट्रेन की रफ्तार मैदानी हिस्सों जैसी नहीं रहती. यही वजह है कि बेंगलुरु से गोवा की पूरी यात्रा में इस हिस्से का असर सफर के समय पर भी पड़ता है.

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किन जगहों से होकर गुजरती है ट्रेन?

यशवंतपुर से निकलने के बाद ट्रेन हासन, सकलेशपुर, सुब्रह्मण्य रोड और मंगलुरु क्षेत्र से होते हुए तटीय कर्नाटक की ओर बढ़ती है. इसके बाद गोवा के मडगांव तक पहुंचती है. यात्रा के दौरान रास्ता लगातार बदलता रहता है. बेंगलुरु के शहरी इलाके से निकलने के बाद हरियाली बढ़ती जाती है और पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्से शुरू हो जाते हैं. इसके बाद तटीय कर्नाटक का इलाका आता है और आखिर में गोवा.

वंदे भारत से और मजेदार होगी यात्रा

वंदे भारत में चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा मिलती है. एग्जीक्यूटिव क्लास में रोटेट होने वाली सीटें और बड़ी खिड़कियां सफर के दौरान बाहर के नजारों को देखने में मदद करेंगी. वंदे भारत एक सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है. इसमें अलग से इंजन नहीं लगा होता बल्कि हर कोच इंजन की तरह काम करता है. इसके चलते सफर के दौरान शोर और झटके पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम महसूस होते हैं. करीब 13 घंटे के दिन के सफर में यह सुविधा खासतौर पर काम आएगी, क्योंकि यात्री रास्ते के नजारों का आनंद लेते हुए आराम भी कर सकेंगे.

ट्रेन में खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध

लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था रहती है. यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में नाश्ता, भोजन और चाय जैसे विकल्प मिलते हैं. ट्रेन में बायो-वैक्यूम टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी हैं. करीब 13 घंटे की इस यात्रा में वंदे भारत की साफ-सफाई और बैठने की सुविधा, पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में यात्रियों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आएगी.

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फ्लाइट, बस और वंदे भारत में फर्क

अगर आपका मकसद बेंगलुरु से गोवा सबसे कम समय में पहुंचना है, तो फ्लाइट का मुकाबला करना वंदे भारत के लिए मुश्किल है. उड़ान का समय करीब डेढ़ घंटे हो सकता है, हालांकि एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन और सुरक्षा जांच में लगने वाला समय अलग है. बस से सफर में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. रात को बस से सफर करने पर पहाड़ी और घुमावदार सड़कों की वजह से कुछ यात्रियों को परेशानी भी हो सकती है. वंदे भारत का फायदा यह है कि सफर आरामदायक तरीके से दिन में पूरा होगा. साथ ही वेस्टर्न घाट और कोस्टल कर्नाटक की प्राकृतिक सुंदरता को देखने का मौका मिलेगा.

फ्लाइट के मुकाबले किराए में अंतर

इस रूट पर यात्रा के लिए अलग-अलग साधनों का खर्च भी अलग है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वंदे भारत चेयर कार का किराया करीब ₹1,500 से ₹1,800 और एग्जीक्यूटिव क्लास का करीब ₹2,800 से ₹3,200 के आसपास हो सकता है. फ्लाइट का किराया तारीख और बुकिंग के समय के हिसाब से करीब ₹4,500 से ₹8,000 या उससे ज्यादा भी हो सकता है. बस का किराया करीब ₹1,200 से ₹2,500 के बीच रह सकता है. हालांकि बस और फ्लाइट का किराया यात्रा की तारीख, सीट और बुकिंग के समय के अनुसार बदल सकता है.

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किसके लिए सही है ट्रेन का सफर?

अगर आपके पास समय कम है और गोवा पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, तो फ्लाइट ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकती है. लेकिन अगर सफर को भी छुट्टी का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो वंदे भारत का विकल्प दिलचस्प है. खासकर उन यात्रियों के लिए जो पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ों और घाटियों के नजारे देखना चाहते हैं. हालांकि एक बात ध्यान रखने वाली है. यह रात की स्लीपर ट्रेन नहीं है. करीब 13 घंटे का पूरा सफर बैठकर करना होगा. इसलिए छोटे वीकेंड ट्रिप पर जाने वाले यात्रियों के लिए यात्रा के समय को ध्यान में रखना जरूरी है.

खिड़की वाली सीट का अलग मजा

अगर आप सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के बजाय रास्ते को भी देखना चाहते हैं, तो खिड़की वाली सीट लेना बेहतर रहेगा. खासकर घाट सेक्शन में बाहर का नजारा इस सफर का सबसे खास हिस्सा हो सकता है. मोबाइल नेटवर्क पहाड़ी और सुरंग वाले हिस्सों में कमजोर हो सकता है, इसलिए लंबी यात्रा के लिए जरूरी सामग्री पहले से डाउनलोड कर लेना बेहतर है. साथ ही करीब 13 घंटे के सफर में बीच-बीच में सीट से उठकर थोड़ा चलना भी आरामदायक रहेगा.

ट्रेन को मिलेगा नया नंबर और नया नाम

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बेंगलुरु और गोवा के बीच वंदे भारत चलाने का प्रस्ताव इस साल फरवरी में सामने आया था. दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR), कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) और दक्षिण रेलवे (SR) की ओर से इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया था. प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन यशवंतपुर से सुबह 6:05 बजे रवाना होकर शाम 7:15 बजे मडगांव पहुंचेगी. शुरुआती प्रस्ताव में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन पर लाए बिना बायपास करने की बात थी. लेकिन अब इस योजना में बदलाव किया गया है. विस्तारित सेवा में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल से होकर चलाने की तैयारी है.

बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर सितंबर में 16 कोच वाली वंदे भारत रेक के साथ दो ट्रायल रन भी किए गए थे. इन परीक्षणों के दौरान ट्रेन ने यह दूरी 7 घंटे से कम समय में पूरी की थी. विस्तार के बाद ट्रेन नए नंबरों के साथ चलेगी. दोनों दिशाओं में इसके लिए 26655 और 26656 नंबर तय किए गए हैं. ये मौजूदा 20646 और 20645 नंबर से अलग होंगे. ट्रेन का नाम भी बदलकर यशवंतपुर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस किया जाएगा. अभी इस ट्रेन सेवा की शुरुआत की तारीख और अंतिम टाइम-टेबल तय नहीं हुआ है. ट्रेन के कितने स्टॉपेज होंगे इसका भी असर पूरी यात्रा के समय पर पड़ेगा.

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