'भारत के ₹25 लाख के आगे US का ₹1 Cr भी कम', NRI का छलका दर्द

India Salary vs America Salary: अमेरिका में करीब ₹1 करोड़ सालाना कमाने वाले नितिन मल्होत्रा ने अपनी कमाई और बचत का ऐसा हिसाब बताया है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. उनका दावा है कि भारत में कम कमाई के बावजूद वह ज्यादा पैसे बचा पाते थे.

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अमेरिका में ₹1 करोड़ कमाने वाले नितिन मल्होत्रा ने बताया कि भारत में ₹25 लाख के पैकेज में वह ज्यादा पैसे बचा पाते थे. (Photo: Insta/@desidadinamerica) अमेरिका में ₹1 करोड़ कमाने वाले नितिन मल्होत्रा ने बताया कि भारत में ₹25 लाख के पैकेज में वह ज्यादा पैसे बचा पाते थे. (Photo: Insta/@desidadinamerica)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

भारत में अक्सर माना जाता है कि विदेश, खासकर अमेरिका जैसे विकसित देशों में नौकरी करने पर कमाई कई गुना बढ़ जाती है. लेकिन ज्यादा सैलरी का मतलब हमेशा ज्यादा बचत नहीं होता. वहां आय के साथ घर का किराया, टैक्स, इंश्योरेंस, खाने-पीने और बच्चों की देखभाल जैसे खर्च भी काफी ज्यादा होते हैं. ऐसे में संभव है कि भारत में कम सैलरी के बावजूद बचत ज्यादा हो, जबकि अमेरिका में मोटी कमाई के बाद भी हाथ में कम पैसा बचे. अमेरिका में करीब ₹1 करोड़ सालाना पैकेज पाने वाले नितिन मल्होत्रा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

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नितिन का कहना है कि अमेरिका में तमाम खर्चों के बाद वह हर महीने सिर्फ $1,000-$1,200 ही बचा पाते हैं. इसके मुकाबले भारत में ₹25 लाख सालाना पैकेज पर वह हर महीने इससे ज्यादा पैसे बचा लेते थे. अमेरिका में 15 साल से रह रहे नितिन मल्होत्रा ने एक इंस्टाग्राम वीडियो में अपनी कमाई और खर्च का हिसाब शेयर किया, जिसके बाद उनके पोस्ट पर भारत-अमेरिका की सैलरी, खर्च और लाइफस्टाइल को लेकर बहस छिड़ गई.

नितिन मल्होत्रा के मुताबिक, अमेरिका में उनका सालाना पैकेज करीब ₹1 करोड़ है, जो लगभग $8,000 मंथली के बराबर बैठता है. उन्होंने अपने पुराने सैलरी पैकेज से इसकी तुलना करते हुए कहा कि भारत में ₹25 लाख सालाना कमाने के दौरान उनकी बचत ज्यादा होती थी. उनके मुताबिक, अमेरिका में कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स और घर से जुड़े खर्चों में चला जाता है. उन्होंने बताया कि करीब $2,500 हर महीने होम मॉर्गेज में जाते हैं, जबकि लगभग $1,500 टैक्स के तौर पर कटते हैं. इन कटौतियों के बाद उनके पास करीब $4,000 बचते हैं.

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इंश्योरेंस और खाने-पीने पर भी बड़ा खर्च

नितिन ने अपने हर महीने के खर्चे का हिसाब भी बताया. उनके मुताबिक, दो कारों के इंश्योरेंस पर करीब $500 खर्च होते हैं. इसके अलावा वह, उनकी पत्नी और बच्चे के हेल्थ इंश्योरेंस पर लगभग $500 महीना खर्च होता है. खाने-पीने पर उनका परिवार करीब $1,000-$1,200 खर्च करता है. मेडिकल खर्च और दवाओं समेत दूसरे खर्चों पर $500-$800 तक चले जाते हैं. इसके अलावा फोन और इंटरनेट जैसे बिल भी अलग हैं. इन सभी खर्चों के बाद उनके मुताबिक हर महीने करीब $1,000-$1,200 ही बच पाते हैं.

डेकेयर का खर्च जोड़कर बचत और कम

नितिन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मौजूदा हिसाब में डेकेयर का खर्च शामिल नहीं है. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी फिलहाल काम नहीं कर रही हैं. अगर वह नौकरी शुरू करती हैं, तो बच्चे की डेकेयर और उससे जुड़े खर्च भी परिवार के बजट में जुड़ जाएंगे. यानी उनकी मौजूदा बचत और भी कम हो सकती है. यही वजह है कि नितिन मल्होत्रा के मुताबिक, अमेरिका में ज्यादा सैलरी मिलने के बावजूद खर्चों के कारण वास्तविक बचत भारत के मुकाबले कम रह जाती है.

भारत में सैलरी कम थी, पर बचत ज्यादा

नितिन ने इसके बाद भारत में अपनी पुरानी कमाई का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि भारत में उनका सालाना पैकेज करीब ₹25 लाख था, यानी लगभग ₹2-2.5 लाख महीना. उनके मुताबिक, करीब ₹30,000 किराए पर खर्च करने और खाने-पीने समेत दूसरे खर्चों के बाद वह आसानी से ₹1-1.25 लाख हर महीने बचा लेते थे. इस तरह कम सालाना पैकेज के बावजूद उनकी बचत अमेरिका की मौजूदा बचत से ज्यादा थी.

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नितिन मल्होत्रा के वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर भारत और अमेरिका में कमाई, खर्च और क्वालिटी ऑफ लाइफ को लेकर अलग-अलग राय सामने आईं. कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई, जबकि कुछ ने कहा कि अमेरिका में ज्यादा खर्च के बदले बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाएं और क्वालिटी ऑफ लाइफ मिलती है. एक यूजर ने कहा कि वह ज्यादा कमाई के बजाय बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता देता है.

वहीं, एक अन्य यूजर ने अमेरिका में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कम भ्रष्टाचार और फास्ट इमरजेंसी सर्विस को फायदे के तौर पर गिनाया, लेकिन साथ ही नौकरी जाने के डर और महंगे लाइफस्टाइल का भी जिक्र किया. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत में कम आय में भी जीवन चलाना अपेक्षाकृत आसान है, जबकि अमेरिका में घर, हेल्थ इंश्योरेंस, कार, खाने और बच्चों की देखभाल जैसे खर्च तेजी से बढ़ जाते हैं.

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