बात बैंक की करेंगे, आज के दौर में कोई जेब में कैश रखे या न रखे. लेकिन मोबाइल में बैंकिंग ऐप जरूर रखते हैं. सब्जी वाले को UPI करने से लेकर होम लोन लेने तक बैंक हर इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसकी शुरुआत कब हुई? जब न कागज के नोट थे और न ही कंप्यूटर, तब लोग अपना पैसा कहां रखते थे? यानी बैंक की शुरुआत कैसे हुई? (Photo: Getty)
दुनिया में पहले बैंक की शुरुआत
आइए एक आम आदमी के नजरिए से समझते हैं कि बैंकिंग की शुरुआत दुनिया और फिर भारत में कैसे हुई. आज आप हम जिसे बैंक कहते हैं, उसका इतिहास बेहद दिलचस्प है. इस सफर की शुरुआत इंसानी सभ्यता जितनी ही पुरानी है. (photo: Getty)
अनाज और सोने की रखवाली
करीब 4000 साल पहले मेसोपोटामिया यानी मौजूदा समय का इराक और बेबीलोन में लोग अपनी कीमती फसलें, अनाज और सोने-चांदी को मंदिरों (धार्मिक स्थलों) में सुरक्षित रखते थे. मंदिर के पुजारी इन चीजों का हिसाब रखते थे और जरूरत पड़ने पर लोगों को कर्ज भी देते थे. यह बैंकिंग का सबसे शुरुआती और धार्मिक स्वरूप था. (Photo: Getty)
'बैंक' शब्द कैसे बना?
आधुनिक बैंकिंग की असली शुरुआत इटली से हुई. मध्यकाल में इटली के व्यापारी बाजार के चौराहों पर एक लंबी बेंच लगाकर बैठते थे. इस बेंच को इतालवी भाषा में बैंको (Banco) कहा जाता था. ये व्यापारी इसी बेंच पर बैठकर अलग-अलग देशों के सिक्कों की अदला-बदली करते थे और लोगों को ब्याज पर पैसे देते थे. (Photo: Getty)
मजेदार बात यह है कि मौजूदा समय में जिसे बैंकिंग सिस्टम में दिवालिया (Bankrupt) कहते हैं, इस तरह का सिस्टम बैंक के शुरुआती दौर में भी था. उस समय अगर कोई व्यापारी कंगाल हो जाता या पैसे लेकर भाग जाता था, तो लोग गुस्से में उसकी बेंच तोड़ देते थे. इतालवी में बेंच टूटने को 'Banca Rotta' कहा जाता था, जिससे हम आप अब दिवालिया के नाम से जानते हैं. (Photo: Getty)
दुनिया का सबसे पहला अधिकारिक बैंक
समय के साथ बदलाव हुआ और दुनिया का पहला आधुनिक बैंक 1472 में इटली के सिएना शहर में खुला था, जिसका नाम 'बांका मोंटे देई पास्ची दी सिएना (Siena)' था. यह बैंक आज भी काम कर रहा है और इसे दुनिया का सबसे पुराना बैंक माना जाता है. दुनिया में औपचारिक रूप से बैंकिंग की शुरुआत यहीं से हुई थी. (photo: wikipedia)
भारत में बैंकिंग की शुरुआत
भारत में पैसों के लेन-देन का इतिहास बहुत पुराना है. हमारे यहां सदियों से साहूकार, महाजन और सर्राफ बैंकिंग का काम करते आ रहे थे. लोग अपनी जरूरत के लिए इन्हीं के पास जाते थे और गिरवी रखकर कर्ज लेते थे. लेकिन अंग्रेजों के भारत आने के बाद यहां यूरोपीय तर्ज पर बैंकिंग की शुरुआत हुई.
आज के बैंकों की नींव कैसे पड़ी?
साल 1770 में कोलकाता में पहले बैंक की स्थापना हुई, जिसका नाम 'बैंक ऑफ हिंदुस्तान' (Bank of Hindostan) था. हालांकि कुछ दशकों बाद यह बैंक बंद हो गया. फिर अंग्रेजों ने भारत में व्यापार संभालने के लिए तीन बड़े बैंक बनाए, जिन्हें 'प्रेसिडेंसी बैंक' कहा जाता था, और इनके नाम बैंक ऑफ बंगाल (1806),
बैंक ऑफ बॉम्बे (1840) और बैंक ऑफ मद्रास (1843) हैं.
फिर आगे चलकर साल 1921 में इन तीनों को मिलाकर 'इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया' बना दिया गया. आजादी के बाद 1955 में इसी बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ और इसका स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रखा गया, जिसे आज भारत का हर नागरिक जानता है, और देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक है.
पूरी दुनिया में लगभग 44 हजार बैंक और क्रेडिट यूनियन्स (सहकारी समितियां) सक्रिय हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा बैंक और क्रेडिट यूनियन्स अमेरिका में हैं, जहां इनकी संख्या करीब 11,000 से भी अधिक है. वहीं भारत की बात करें तो हमारे यहां लगभग 12 सरकारी बैंक, 21 निजी बैंक, 40 से अधिक विदेशी बैंक और हजारों की संख्या में क्षेत्रीय ग्रामीण व सहकारी बैंक काम कर रहे हैं.