अब रेस्टोरेंट जबरन नहीं वसूल सकता है सर्विस चार्ज, नई गाइडलाइंस जारी, यहां पढ़ें

केंद्र सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट में खाना खाने पर लगने वाले सर्विस चार्ज पर सख्त निर्देश जारी किए हैं. इसके मुताबिक अब कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूल नहीं कर पाएगा.

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कस्टमर की मर्ज़ी होगी, तो वह वेटेर को टिप देगा कस्टमर की मर्ज़ी होगी, तो वह वेटेर को टिप देगा

हिमांशु मिश्रा / रीमा पाराशर

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 11:48 PM IST

केंद्र सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट में खाना खाने पर लगने वाले सर्विस चार्ज पर सख्त निर्देश जारी किए हैं. इसके मुताबिक अब कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूल नहीं कर पाएगा.

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री मंत्री रामविलास पासवान ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने सर्विस चार्ज के लिए गाइडलाइन को मंजूरी दे दी है. इसके अनुसार, अब रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज देना ग्राहकों की मर्जी पर होगा.

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पासवान ने बताया, 'हमने पीएमओ के निर्देश पर नहीं लेने का दिशानिर्देश सभी राज्यों और सभी रेस्टोरेंट संस्थाओं को भेज दिया है. अब कोई भी रेस्टोरेंट यह तय नहीं कर पाएगा कि कस्टमर को कितना सर्विस चार्ज देना है. होगी, तो वह वेटेर को टिप देगा. अगर नहीं देना चाहे तो उस पर इसकी कोई बाध्यता नहीं होगी.

जबरन चार्ज वसूले जाने की आ रही थी शिकायतें
इससे पहले उपभोक्ता मंत्रालय ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट का हवाला देते हुए कहा था कि रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से वैकल्पिक है और ग्राहकों की रजामंदी के बगैर इसे नहीं वसूला जा सकता है. पिछले कई महीनों से मंत्रालय को रेस्टोरेंट द्वारा जबरन सर्विस चार्ज वसूले जाने पर लगातार शिकायत मिल रही थी. शिकायत के मुताबिक टिप के ऐवज में रेस्टोरेंट 5-20 फीसदी तक सर्विस चार्ज ग्राहकों से वसूल रहे हैं. ग्राहकों को यह चार्ज रेस्टोरेंट में कैसी भी सर्विस मिलने पर देना पड़ रहा था.

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होटल-रेस्टोरेंट पर होगी कार्रवाई
केंद्र सरकार के मुताबिक कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट 1986 के मुताबिक अगर कोई कारोबारी अपनी सेल बढ़ाने अथवा किसी उत्पाद को सप्लाई करने के लिए गैरकानूनी या भ्रम का फायदा उठाता है तो उसे अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस माना जाएगा. इस स्थिति में उक्त कारोबारी के खिलाफ कदम उठाया जाएगा. इस ऐक्ट के मुताबिक ग्राहकों ज्वारा कंज्यूमर अफेयर्स विभाग को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है.

गौरतलब है कि लगातार ग्राहकों से शिकायत मिलने के बाद कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय ने होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से सफाई मांगी थी. एसोसिएशन ने सरकार को लिखित जवाब में कहा है कि सर्विस चार्ज देना पूरी तरह से ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर है. ग्राहक अगर रेस्टोरेंट और होटल में दी गई सुविधा से संतुष्ट नहीं है तो वह इस चार्ज को बिल से हटाने के लिए कह सकता है. हालांकि इसके बावजूद होटलों और रेस्टोरेंट्स ने बिल में सर्विस चार्ज जोड़ना बंद नहीं किया था. इस पर पासवान ने साफ किया कि अभी तक सभी रेस्टोरेंट गलत तरीके से सर्विस टैक्स ले रहे थे. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अब रेस्टोरेंट इस गाइडलाइन के बाद सर्विस टेक्स लेगा.'

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