दुनिया में कई महंगे और लग्जरी ब्रांड्स हैं, लेकिन 'बर्किन' (Birkin) की बात ही सबसे अलग है, यह सिर्फ एक हैंडबैग नहीं, बल्कि अमीर और रसूखदार महिलाओं के लिए सफलता, पहचान और 'अल्ट्रा-रिच' होने का सबसे बड़ा स्टेट्स सिंबल बन चुका है.
अक्सर कहा जाता है कि दुनिया की सबसे अमीर महिलाएं भी किसी शोरूम में जाकर सिर्फ पैसे देकर बर्किन बैग नहीं खरीद सकतीं. क्योंकि इस खास बैग को हासिल करने के लिए भी लंबी 'वेटिंग लिस्ट' होती है. जब कोई महिला हाथ में बर्किन लेकर किसी महफिल या रेड कारपेट पर कदम रखती है, तो बिना कुछ कहे इस बात का ऐलान होता है कि वे समाज के सबसे विशिष्ट और प्रभावशाली वर्ग का हिस्सा हैं. यही वजह है कि इस नायाब बैग के लिए लाखों-करोड़ों रुपये चुकाने से लेकर महीनों-सालों का इंतजार करने में भी महिलाएं कतराती नहीं हैं.
आज भले ही अपनी दुर्लभता, बेहतरीन कारीगरी और हैरान कर देने वाली कीमतों के कारण यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित लग्जरी हैंडबैग्स में शुमार है, लेकिन इस बैग की कहानी की शुरुआत किसी लग्जरी से नहीं, बल्कि एक साधारण और सस्ती घास की टोकरी से हुई थी जिसे जेन्स बर्किन हमेशा अपने साथ रखती थीं.
सब्जी के लिए होता था इस्तेमाल
जेन इस टोकरी का इस्तेमाल सब्जियां खरीदने, अखबार लाने और यहां तक कि कान्स फिल्म फेस्टिवल और 1972 में पेरिस में हुए एक प्रदर्शन के दौरान भी करती थीं. यह टोकरी काफी बड़ी, व्यावहारिक और हमेशा उनके सामान से भरी रहती थी.
गल्फ न्यूज के अनुसार, 2018 के एक इंटरव्यू में बर्किन ने कहा था, "मैं टोकरी ले जाने के लिए काफी जानी जाती थी. इसलिए मुझे अच्छे से पता था कि लड़कियों को अपने हैंडबैग में ढेर सारा सामान रखना पसंद होता है."
उनकी इसी आदत ने आखिरकार उस हैंडबैग को बनाने के लिए प्रेरित किया जो आगे चलकर उनके नाम से जाना गया और दुनिया भर की महिलाओं के लिए खास बन गया. इस बैग का विचार एयर फ्रांस की एक उड़ान के दौरान आया, जब बर्किन अपनी बेटी शार्लेट के साथ यात्रा कर रही थीं, उनकी टोकरी ओवरहेड लॉकर में रखी थी, लेकिन उसका सारा सामान बिखरकर बगल में बैठे शख्स की गोद में जा गिरा.
वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि लग्जरी ब्रांड 'हर्मीस' (Hermès) को चलाने वाले जीन-लुई ड्यूमा (Jean-Louis Dumas) थे. बर्किन ने उनसे कहा कि उन्हें कोई ऐसा बैग नहीं मिलता जो उनकी जरूरत के हिसाब से काफी बड़ा हो. वे अपने सूटकेस से लगभग आधे आकार का बैग चाहती थीं, ड्यूमा ने उनसे अपना विचार स्केच करने को कहा, और चूंकि वहां कोई कागज नहीं था, इसलिए बर्किन ने प्लेन की पॉकेट में रखी 'सिकनेस बैग' पर ही स्केच बना दिया.
इसका डिजाइन काफी व्यावहारिक रखा गया था, हर्मीस के मुताबिक, इसमें बर्किन के बच्चे की दूध की बोतलों के लिए अलग से जगह भी रखी गई थी. कुछ सालों बाद पहला प्रोटोटाइप बनकर तैयार हुआ. यह अपने आप में इकलौता बैग था, जिसके ताले के नीचे बर्किन के नाम के शुरुआती अक्षर छपे थे.
जेन बर्किन खुद कैसे इस्तेमाल करती थीं अपना 'बर्किन'?
बर्किन का अपने इस बैग के साथ रिश्ता वैसा बिल्कुल नहीं था जैसा आज लोग इस बैग के साथ रखते हैं. उन्होंने 1985 से 1994 तक इस ओरिजिनल बैग का इस्तेमाल लगभग रोज किया. वे इसे अपने सामान से पूरी तरह भर देती थीं, यहां तक कि उस पर नेल क्लिपर भी लटका देती थीं. उन्होंने इस पर 'मेडेसिन्स डु मोंडे' और 'यूनिसेफ' के स्टिकर लगाए और ग्रीस, इजरायल और फिलिस्तीन से जुटाए गए मनकों और मोतियों से इसे सजाया.
बैग का चमड़ा घिसा हुआ, खरोंचदार और दाग-धब्बों से भरा रहता था, उन्होंने कहा था, "जब तक किसी बैग को इधर-उधर पटका न जाए और वह ऐसा न दिखे जैसे उस पर बिल्ली बैठी हो, तब तक बैग का कोई मजा नहीं है और अमूमन मेरी बिल्ली उस पर बैठती भी थी, कभी-कभी तो वह बैग के अंदर भी होती थी." उन्हें बर्किन को एक कीमती लग्जरी चीज की तरह रखने में कोई दिलचस्पी नहीं थी.
उन्होंने एक बार कहा था, "बर्किन बैग बारिश में एक बहुत बढ़िया टोपी का काम करता है, बस अपना बाकी सारा सामान एक प्लास्टिक की थैली में रख लीजिए,"
2017 तक, बर्किन ने बीबीसी को बताया कि वे अब इसका इस्तेमाल बहुत कम करती हैं, क्योंकि रोज़मर्रा के सामान से भरा यह बैग बहुत भारी हो जाता है, उन्होंने कहा, "अब मैं पुरुषों की तरह अपनी जेबें भरती हूं, क्योंकि तब आपको कुछ उठाना नहीं पड़ता."
ओरिजिनल बर्किन बना करोड़ों का 'कलेक्टर आइटम'
1994 में, बर्किन ने एड्स चैरिटी के लिए धन जुटाने के लिए अपना पहला ओरिजिनल बैग दान कर दिया, इसके बाद भी वे एम्नेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के लिए फंड जुटाने हेतु अपने बर्किन बैग्स का इस्तेमाल करती रहीं.
उन्होंने हर्मीस कंपनी को भी चुनौती दी, 2015 में, मगरमच्छ की खाल से बर्किन बैग बनाने के तरीकों के बारे में जानने के बाद, उन्होंने फैशन हाउस से इस वर्जन से अपना नाम हटाने को कहा था, इसके बाद कंपनी ने अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा की थी.
बर्किन बैग के बनने के तीन दशक से भी अधिक समय बाद, इसकी कीमत इसके शुरुआती मकसद से कहीं आगे निकल चुकी थी. 10 जुलाई 2025 को पेरिस में 'सॉथबी' (Sotheby's) की नीलामी में, इसका पहला प्रोटोटाइप 8.6 मिलियन यूरो (फीस मिलाकर लगभग 10.1 मिलियन डॉलर) में बिका.
नीलामी 1 मिलियन यूरो से शुरू हुई और 9 कलेक्टर्स के बीच 10 मिनट तक चली बोली के बाद 7 मिलियन यूरो पर हथौड़ा गिरा. इस बिक्री ने 2021 में एक डायमंड-सेट क्रोकोडाइल केली बैग के लिए दिए गए $513,040 के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
फैशन नीलामी के इतिहास में इससे महंगा सिर्फ 'द विजार्ड ऑफ ओज़' का रूबी स्लिपर ही बिका है. इस बैग को जापान के एक प्राइवेट कलेक्टर ने खरीदा. फैशन इतिहास के इस टुकड़े पर बोली लगाने के बजाय सामान्य रूप से बर्किन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए, कीमतें काफी कम हैं फिर भी लग्जरी दायरे में ही आती हैं.
रिटेल बर्किन की शुरुआती कीमत अब लगभग $10,000 है, जबकि सॉथबी इसे $220,000 तक में री-सेल करता है. 2016 के एक अध्ययन में पाया गया कि इस बैग के रिटर्न ने S&P 500 और सोने दोनों को पीछे छोड़ दिया था, जिससे एक लग्जरी एसेट के रूप में इसकी साख और मजबूत हुई.
एक और पर्सनल बर्किन $2.9 मिलियन में बिका
जेन बर्किन के निजी बैग्स का बाजार यहीं नहीं रुका, दिसंबर में, उनके कलेक्शन का एक और बैग 'ले बर्किन वोयाजुर' (Le Birkin Voyageur), जिसे उन्होंने 2003 से 2007 के बीच रोजाना इस्तेमाल किया था, अबू धाबी में $2.9 मिलियन (लगभग 24 करोड़ रुपये) में बिका.
ये कीमतें यह दर्शाती हैं कि कैसे एक व्यावहारिक हैंडबैग समय के साथ एक ऐसी दुर्लभ वस्तु में बदल गया जिसकी कीमत इसके इतिहास, दुर्लभता और जेन बर्किन के नाम से जुड़ी है.
जुलाई 2023 में 76 वर्ष की आयु में जेन बर्किन का निधन हो गया. उनके द्वारा प्रेरित यह हैंडबैग आज भी लग्जरी फैशन के सबसे पहचाने जाने वाले प्रतीकों में से एक बना हुआ है, भले ही खुद बर्किन ने इसके साथ एक निवेश की वस्तु के बजाय उस साधारण टोकरी जैसा ही व्यवहार किया जिसने इसे जन्म दिया था.
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