रियल एस्टेट में निवेश की बात आते ही एक पुरानी धारणा अक्सर सुनने को मिलती है जमीन कभी घाटे का सौदा नहीं होती. लेकिन आज के बदलते रियल एस्टेट बाजार में यह बात हर निवेशक और हर लोकेशन पर लागू हो, जरूरी नहीं. प्लॉट जहां आपको जमीन पर मालिकाना हक, निर्माण की आजादी और लंबे समय में बेहतर एप्रिसिएशन का मौका दे सकता है, वहीं उसमें एक बड़ी कमी भी है, जब तक उस पर निर्माण या कोई दूसरा उपयोग न हो, तब तक उससे नियमित आमदनी नहीं होती.
दूसरी तरफ फ्लैट किराये के जरिए नियमित कैश फ्लो दे सकता है, लेकिन उसके साथ मेंटेनेंस, रिपेयर और समय के साथ बिल्डिंग की उम्र बढ़ने जैसी लागतें भी जुड़ी होती हैं. इसलिए प्लॉट और फ्लैट के बीच सही चुनाव सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि किसकी कीमत ज्यादा बढ़ सकती है. लोकेशन, किराये की मांग, भविष्य का डेवलपमेंट, कानूनी स्थिति, मेंटेनेंस खर्च और आप कितने लंबे समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं. इन सभी पहलुओं को साथ देखकर फैसला करना जरूरी है.
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प्लॉट या फ्लैट किसमें क्या फायदा?
प्लॉट निवेशक को सबसे बड़ी आजादी देता है, आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से भविष्य में घर या दूसरी संरचना बना सकते हैं. अच्छी लोकेशन और तेजी से विकसित हो रहे इलाके में प्लॉट की कीमत लंबे समय में बढ़ सकती है, लेकिन जब तक जमीन का इस्तेमाल नहीं होता, तब तक वह आमतौर पर कोई नियमित किराये की आय नहीं देती.
फ्लैट में इसका उल्टा फायदा मिलता है, अगर प्रॉपर्टी ऐसी जगह है जहां किराये की मजबूत मांग है, तो पजेशन मिलने के बाद उसे किराये पर देकर नियमित आय शुरू की जा सकती है. हालांकि इसमें सोसायटी मेंटेनेंस, समय-समय पर होने वाली मरम्मत और बिल्डिंग के पुराने होने का असर रिटर्न पर पड़ सकता है.
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लोकेशन ही असली गेमचेंजर
महंगी या प्रीमियम दिखने वाली प्रॉपर्टी भी खराब निवेश साबित हो सकती है, अगर उसके आसपास का इलाका अपेक्षित रफ्तार से विकसित न हो. प्लॉट हो या फ्लैट, सड़क, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्कूल, अस्पताल, ऑफिस हब और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी निवेश की क्षमता को काफी प्रभावित करते हैं.
किसी इलाके को सिर्फ इसलिए फ्यूचर हॉटस्पॉट मान लेना कि वहां कोई बड़ा प्रोजेक्ट आने वाला है, जोखिम भरा हो सकता है. निवेश से पहले यह जांचना जरूरी है कि प्रस्तावित सड़क, मेट्रो, एक्सप्रेसवे या कमर्शियल डेवलपमेंट वास्तव में किस चरण में है और उसकी आधिकारिक स्थिति क्या है.
जमीन खरीदने में कानूनी पेच ज्यादा
प्लॉट खरीदते समय कानूनी जांच को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. खरीदार को मालिकाना हक, जमीन के रिकॉर्ड, लैंड यूज, एन्कम्ब्रेंस यानी किसी तरह के कर्ज या दावे, सर्वे डिटेल और स्थानीय मंजूरियों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए. सिर्फ इसलिए कि जमीन सस्ती मिल रही है या लोकेशन आकर्षक है, तुरंत पैसा लगा देना बाद में महंगा पड़ सकता है. पेमेंट करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच कराना बेहतर है.
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कितने साल के लिए पैसा रोक सकते हैं?
आखिर में फैसला आपकी होल्डिंग पीरियड और वित्तीय जरूरत पर भी निर्भर करता है. अगर आप लंबे समय तक इंतजार कर सकते हैं और भविष्य में जमीन पर अपनी पसंद के मुताबिक निर्माण करना चाहते हैं, तो प्लॉट आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर आपका लक्ष्य प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करने के साथ-साथ किराये से नियमित आमदनी हासिल करना है, तो सही लोकेशन वाला फ्लैट ज्यादा व्यावहारिक साबित हो सकता है.
यानी प्लॉट बनाम फ्लैट की लड़ाई में कोई एक स्थायी विजेता नहीं है. सही निवेश वही है जो आपकी लोकेशन, बजट, रिस्क लेने की क्षमता, कैश फ्लो की जरूरत और निवेश की अवधि से मेल खाता हो.
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