आमतौर पर मुंबई की सड़कों की हालत खराब होने और गड्डों में तब्दील होने में मानसून की पहली बारिश का कम से कम एक हफ्ता लग जाता है. टायर गड्ढों में गायब होने लगते हैं, डामर पुरानी वॉलपेपर की तरह उखड़ने लगता है, और वाहन चालकों को ट्रैफिक सिग्नल से ज्यादा गड्ढों की जगह याद होने लगती है. लेकिन इस साल मुंबई ने एक हैरान कर देने वाला काम कर दिखाया है.
गोरेगांव में 6 जून को जिस नए फ्लाई ओवर का उद्घाटन हुआ, उसने बारिश के आने का इंतजार भी नहीं किया. अपने भव्य उद्घाटन के कुछ ही दिनों भीतर 248 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मृणालताई गोरे फ्लाई ओवर विस्तार समय से पहले ही खराब हो गया है.
मैं शायद ही कभी गोरेगांव जाता हूं, लेकिन इतने हंगामे के बाद मैंने वहां जाने का फैसला किया. जब मैं 9 जून की सुबह अपनी बाइक से इस पुल पर गया, तो आधुनिक शहर के यातायात को आसान बनाने के लिए बना यह ढांचा ऐसा लग रहा था मानो इसने कई मानसून और एक हल्का भूकंप झेल लिया हो. यह फ्लाई ओवर विस्तार उतना ही थका हुआ लग रहा है, जितने कि यहां के वे रोज़ाना यात्रा करने वाले लोग हैं जो बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड जैसे ट्रैफिक का सामना तो करते हैं, लेकिन यह स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं क्योंकि 'स्पिरिट ऑफ मुंबई' उन्हें ऐसा करने नहीं देती.
सड़क पर धंस गए टायर
सड़क की सतह पर टायरों के निशान गहराई तक धंसे हुए थे, जो शायद इसे बनाते समय इस्तेमाल की गई भारी मशीनों और ट्रकों के होंगे. एक हिस्से के पास, 'लोकमत टाइम्स' के एक पत्रकार ने अपनी बाइक पार्क की, तो देखा कि बाइक का स्टैंड धीरे-धीरे सड़क के अंदर धंस रहा था, मानो बाइक रेत पर खड़ी की गई हो. यह वही प्रोजेक्ट है जिसका कई सालों की देरी और बार-बार डेडलाइन बढ़ाए जाने के बाद बड़े राजनीतिक ढोल-नगाड़ों के साथ उद्घाटन किया गया था.
शायद लोगों के गुस्से की वजह भी यही है. यह फ्लाई ओवर मुंबई में एक के बाद एक बड़ी प्रोजेक्ट घोषणाओं और उनके खराब क्रियान्वयन का जीता-जागता प्रतीक बन गया है.
विपक्ष ने उठाया सवाल
750 मीटर लंबा यह विस्तार राम मंदिर, एसवी रोड, लिंक रोड और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे कॉरिडोर के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए 2018 में शुरू हुआ था और इसे दो साल में पूरा होना था, इसके बजाय, यह लगभग आठ साल तक खींचता रहा और इसकी लागत करीब 170 करोड़ रुपये से बढ़कर 248 करोड़ रुपये हो गई.
उद्घाटन के 24 घंटे के भीतर ही असमतल सतह, दिखाई देने वाले जोड़ों और पैचवर्क के वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने लगे, विपक्ष ने तुरंत इस पर हमला बोल दिया, कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने बीएमसी (BMC) के नुकसान की भरपाई करने के प्रयास का मजाक उड़ाते हुए एक्स (ट्विटर) पर लिखा, "मृणालताई गोरे फ्लाई ओवर विस्तार की ज़मीन से ली गई क्लोज़-अप फोटो के बजाय हवाई फोटो पोस्ट की गई है, लेकिन इतनी ऊंचाई से भी घटिया काम और असमतल सतह साफ दिखाई दे रही है, शर्मनाक!"
सामाजिक कार्यकर्ता और टिप्पणीकार जोरू भटेना ने अपने खास अंदाज में कहा, "वे किस बात का जश्न मना रहे हैं? इस बात का कि वे इसे 8 साल लगाने के बाद पूरा कर पाए? सामान्य इंसान तो शर्म से सिर झुका लेता. लेकिन यह बीएमसी है. वे अपनी अक्षमता का जश्न मना रहे हैं." सबसे तीखा राजनीतिक हमला एनसीपी-एसपी (NCP-SP) प्रवक्ता अनीश गवाने ने किया, जिन्होंने इस विवाद को उस महान हस्ती की विरासत से जोड़ा जिनके नाम पर यह पुल बना है.
सोशल मीडिया पर लोग उठा रहे सवाल
अनीश गवाने ने कहा, "इस फ्लाई ओवर का नाम महान मृणालताई गोरे के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इसलिए लड़ाई लड़ने में बिता दिया ताकि आम मुंबईकरों को सम्मानजनक जीवन मिल सके. सात साल, तीन बार लागत बढ़ाए जाने और ठेकेदार पर रोजाना जुर्माना लगाने के बाद क्या वे उनके सम्मान में बस यही बना पाए?"
मृणालताई गोरे के नाम का ज़िक्र होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सिर्फ़ एक ऐसी नेता नहीं थीं जिनके नाम पर इंफ्रास्ट्रक्चर का नाम रख दिया गया. 'पानीवाली बाई' के नाम से याद की जाने वाली दिग्गज समाजवादी नेता ने उपनगरीय मुंबई में बुनियादी नागरिक अधिकारों, खासकर गोरेगांव में पानी की पहुंच के लिए लड़कर अपनी पहचान बनाई थी.
एक पूर्व कॉर्पोरेटर और विधायक के रूप में, वे मजदूरों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और शहरी गरीबों के लिए महाराष्ट्र की सबसे निडर जमीनी आवाजों में से एक बनीं. वरिष्ठ पत्रकार धवल कुलकर्णी ने भी एक्स पर लोगों को याद दिलाया कि मृणालताई गोरे, जॉर्ज फर्नांडिस और शोभनाथ सिंह जैसे समाजवादी पार्षदों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने ही बीएमसी को दशकों पहले अंग्रेजी की जगह मराठी को अपनी आधिकारिक भाषा बनाने के लिए मजबूर किया था.
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बीएमसी की सफाई
उनकी वह महान विरासत अब घटिया काम के आरोपों से घिरे इस फ्लाई ओवर के नीचे असहज महसूस कर रही है. इस बीच, बीएमसी ने इस ढांचे का बचाव किया है. एक स्पष्टीकरण में कहा कि दिखाई देने वाले जोड़ तकनीकी निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा थे. पुल विभाग के अनुसार, इस्तेमाल किया गया मैस्टिक डामर शुरुआत में खुरदरा और पैची दिखाई दे सकता है, खासकर जहां हाथों से काम हुआ हो, लेकिन जैसे-जैसे वाहन सड़क का उपयोग करना शुरू करेंगे, यह समतल हो जाएगा.
हालांकि, यह स्पष्टीकरण आलोचकों को आश्वस्त नहीं कर पाया है, खासकर तब जब ऐसी खबरें आईं कि बीएमसी के खुद के विजिलेंस विभाग ने सालों पहले इसके ढांचागत मुद्दों पर चेतावनी दी थी.
जून 2021 में तैयार की गई एक आंतरिक विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने पहले ही खुलने के बाद सड़क की सतह पर दरारें आने की संभावना के बारे में चेतावनी दे दी थी. इस रिपोर्ट ने, जो इस विवाद के बीच फिर से सामने आई है, प्रोजेक्ट के काम में कई अन्य चिंताओं की ओर भी इशारा किया था.
यह पहली बार नहीं है जब मुंबई में घटिया इंफ्रास्ट्रक्चर का काम देखा गया है. विपक्षी नेता अब स्वतंत्र गुणवत्ता जांच की मांग कर रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने कंक्रीट और सड़क की परतों की गुणवत्ता की जांच के लिए कोर टेस्ट, यूपीवी टेस्ट और रीबाउंड हैमर टेस्ट सहित तीसरे पक्ष से जांच कराने की मांग की है. फिर भी, मुंबईकरों के लिए सबसे निराशाजनक बात यह है कि यह पूरी घटना कितनी जानी-पहचानी लगती है.
अभी इसी साल की शुरुआत में, मीरा-भायंदर में नए बने 100 करोड़ रुपये के डबल-डेकर फ्लाई ओवर ने भारी जन आक्रोश पैदा किया था, जब उसकी चार-लेन की सड़क अचानक संकरी होकर दो-लेन की रह गई थी. दो साल पहले, गोखले ब्रिज और सीडी बर्फीवाला फ्लाई ओवर अपनी ऊंचाइयों और एलाइनमेंट के आपस में मेल न खाने के कारण बदनाम हुए थे.
यहां तक कि भारत के सबसे लंबे समुद्री पुल और देश के सबसे बड़े प्रतिष्ठा वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक, 'अटल सेतु' भी उद्घाटन के तुरंत बाद मरम्मत के काम को लेकर सुर्खियों में आया था, नवी मुंबई में बंदरगाह के पार, तुर्भे में एक नए बने फ्लाई ओवर की सड़कें एक मानसून भी नहीं टिक सकीं.
मृणालताई गोरे फ्लाई ओवर विस्तार पर, वाहन चालकों के पास इस पुल का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि, मुंबई में लोगों के पास परफेक्ट होने का इंतजार करने की सहूलियत बहुत कम ही होती है.
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आनंद सिंह