नौकरी छूटी, EMI के लिए उबर बाइक चलाने को मजबूर मार्केटिंग मैनेजर

अपनी बेटी के जन्म के ठीक बाद नौकरी खोने वाले इस मार्केटिंग मैनेजर के लिए गुरुग्रामे में घर चलाना मुश्किल हुआ तो परिवार को पालने के लिए उसने गुड़गांव की सड़कों पर उबर बाइक चलाना शुरू कर दिया.

Advertisement
 10 साल का अनुभव रखने वाला मैनेजर चलाने लगा उबर बाइक (Pexels) 10 साल का अनुभव रखने वाला मैनेजर चलाने लगा उबर बाइक (Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

कॉर्पोरेट जगत की चकाचौंध के पीछे कई बार ऐसी कहानियां छिपी होती हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं. यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने अपनी कंपनी के लिए खून-पसीना एक कर दिया, लेकिन अंत में उसे कंपनी की बेरुखी का सामना करना पड़ा और उस शख्स को घर का किराया भरने के लिए गुरुग्राम की सड़कों पर उबर बाइक चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा. 

Advertisement

Reddit पर अपनी कहानी शेय़र करते हुए उस शख्स ने लिखा- 'गुरुग्राम के कॉर्पोरेट जगत में 4 साल बिताने के बाद. आज जिंदा रहने के लिए मुझे उबर बाइक चलानी पड़ रही है. अपनी कॉर्पोरेट यात्रा को बयां करते हुए उसने लिखा, "एक दिन आप कंपनी के लिए कैंपेन, वेबसाइट, वेबिनार, इवेंट्स, एसईओ (SEO), और ग्राफिक्स जैसी तमाम जिम्मेदारियां संभालते हैं और खुद को कंपनी की रीढ़ समझते हैं और कुछ ही महीनों बाद, आप आधी रात को सड़क पर बाइक दौड़ा रहे होते हैं, बस इस उम्मीद में कि कुछ सवारी मिल जाए ताकि आप समय पर घर का किराया और ईएमआई भर सकें.

उस शख्स ने बताया कि जब 2021 में उसने कंपनी जॉइन की थी, तब आईटी विभाग के एक कर्मचारी ने उसे आगाह किया था: "यहां मार्केटिंग के लोग 6-8 महीने से ज्यादा नहीं टिकते." इस बात को गलत साबित करने की ठानकर वह लगभग चार साल तक वहां टिका रहा, उसने एक 'वन-मैन आर्मी' की तरह काम किया और सीधे सीईओ (CEO) को रिपोर्ट करता रहा. बाद में जब एक अनुभवी मार्केटिंग हेड आए, तो उन्होंने मिलकर 8 लोगों की एक खुशहाल टीम खड़ी की.

Advertisement

यह भी पढ़ें: घर खरीदना निवेश या सिरदर्द, कहीं आप तो नहीं कर रहे ये बड़ी गलती!

लेकिन कहानी तब पलटी जब फाउंडर का बेटा अमेरिका से वापस लौटा और कंपनी में शामिल हो गया. रातों-रात कंपनी के समीकरण बदल गए, उस अनुभवी मार्केटिंग हेड ने एक ऐसे 23 साल के लड़के के नीचे काम करने से मना कर दिया, जिसे अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि सिर्फ 'सरनेम' की वजह से ताकत मिली थी. नतीजे के तौर पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और टीम बिखर गई. 

घर होम टाउन लौटने को मजबूर 

उस शख्स ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले ही उसकी शादी हुई थी और घर में एक नन्ही बच्ची का जन्म हुआ था. नौकरी जाने के बाद उसे गुड़गांव जैसे महंगे शहर की बेरहम हकीकत समझ आई. उसने नई नौकरी पाने की जी-तोड़ कोशिश की, लेकिन एचआर (HR) विभाग ने उसके आवेदनों पर कोई जवाब नहीं दिया. धीरे-धीरे जमा-पूंजी खत्म होने लगी और तब 10 साल का मार्केटिंग अनुभव रखने वाले इस शख्स ने अपने परिवार को पालने के लिए उबर बाइक चलाने का फैसला किया.

अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में उसने बताया, "जिंदगी तो चलती ही रहती है, मैं किसी तरह इस मुश्किल वक्त से बाहर निकला. फ्रीलांसिंग के काम से काफी मदद मिली और अब मैं अपने गृहनगर के पास शिफ्ट हो गया हूं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement