भारत के रियल एस्टेट बाजार में पिछले कुछ सालों में बड़े घरों की मांग में आई है. 2 BHK और 3 BHK घर खरीदारों की पसंद में आगे हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट्स में 1 BHK की हिस्सेदारी सीमित होती जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के शहरों में 1 BHK फ्लैट धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं? आंकड़े बताते हैं कि तस्वीर इतनी सीधी नहीं है. 1 BHK की मांग अब भी मौजूद है, लेकिन कई बाजारों में इसकी उपलब्धता मांग के मुकाबले कम है.
Magicbricks के अप्रैल-जून 2026 के PropIndex के मुताबिक, भारत के हाउसिंग मार्केट में 1 BHK की हिस्सेदारी कुल खरीदार मांग में 13% थी, जबकि उपलब्ध आवासीय इन्वेंट्री में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 5% रही. यानी जिस अनुपात में खरीदार 1 BHK तलाश रहे हैं, उस अनुपात में बाजार में ऐसे घर उपलब्ध नहीं हैं.
इसके मुकाबले 2 BHK की खरीदार मांग 42% और उपलब्ध इन्वेंट्री में हिस्सेदारी 32% थी. वहीं 3 BHK की मांग 37% रही, जबकि कुल उपलब्ध इन्वेंट्री में इसकी हिस्सेदारी 46% थी. 3 BHK और उससे बड़े घरों की सप्लाई भी मांग की तुलना में ज्यादा दिखाई दी.
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 1 BHK बाजार से गायब नहीं हुआ है, बल्कि नई सप्लाई में इसकी उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है.
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बड़े घरों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं खरीदार?
ANAROCK के H1 2026 Consumer Sentiment Survey में भी बड़े घरों की ओर खरीदारों के झुकाव की तस्वीर सामने आती है. जनवरी से जून 2026 के बीच 14 शहरों में 8,320 लोगों पर किए गए सर्वे में 48% लोगों ने 3 BHK को अपनी पसंद बताया, जबकि 38% ने 2 BHK को प्राथमिकता दी. वहीं 1 BHK को पसंद करने वाले खरीदारों की हिस्सेदारी ANAROCK के सर्वे में करीब 9% रही. यानी 1 BHK की मांग जरूर बड़े घरों से कम है, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
बड़े घरों की मांग के पीछे घर से काम करने की जरूरत, बच्चों के लिए अलग जगह, माता-पिता के लिए अतिरिक्त कमरा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर घर खरीदने जैसे कारण बताए जा रहे हैं. इससे खरीदार सिर्फ मौजूदा जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि लंबे समय के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर भी घर चुन रहे हैं.
फिर 1 BHK की सप्लाई क्यों घट रही है?
डेवलपर के लिए किसी अपार्टमेंट का आकार छोटा करने का मतलब यह नहीं है कि पूरा प्रोजेक्ट उसी अनुपात में सस्ता हो जाएगा. जमीन की कीमत उतनी ही रहती है. प्रोजेक्ट के लिए जरूरी मंजूरियां लेनी होती हैं. लिफ्ट, सुविधाएं और कॉमन एरिया भी बनाने पड़ते हैं.
वहीं, बड़ा अपार्टमेंट ज्यादा कीमत पर बेचा जा सकता है, जिससे डेवलपर को हर यूनिट पर ज्यादा रकम मिलती है और पूरे प्रोजेक्ट से बेहतर कमाई की संभावना बनती है. राइज इन्फ्रावेंचर्स के वाइस प्रेसिडेंट सुमित चौधरी कहते हैं, “बड़े घर से डेवलपर को ज्यादा टिकट साइज मिलता है और इससे प्रोजेक्ट से मजबूत राजस्व हासिल करने की संभावना बढ़ती है. वहीं जमीन, मंजूरी, सुविधाओं और कॉमन एरिया जैसी लागतें अलग-अलग आकार के फ्लैट में मोटे तौर पर समान रहती हैं.”
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बड़े फ्लैट बनाने का एक और फायदा यह है कि बाजार में इनकी मांग भी मजबूत है. कई शहरों में खरीदार 2 BHK और 3 BHK घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे ऐसे प्रोजेक्ट्स की बिक्री भी तेजी से हो सकती है.
अग्रशील इंफ्रा की सीईओ प्रेक्षा सिंह के मुताबिक, “कई बाजारों में 2 BHK और 3 BHK घरों की मजबूत मांग है, जिससे इनकी बिक्री तेजी से होती है. पूरे प्रोजेक्ट की अर्थव्यवस्था को देखें तो बड़े आकार के फ्लैट डेवलपर्स के लिए ज्यादा आकर्षक विकल्प साबित होते हैं.”
यानी डेवलपर्स के लिए 1 BHK की जगह बड़े फ्लैट बनाना सिर्फ लागत का सवाल नहीं है. ज्यादा कीमत, बेहतर राजस्व क्षमता और मजबूत मांग तीनों बड़े कॉन्फिगरेशन को प्राथमिकता देने की वजह बन रहे हैं.
लेकिन कुछ शहरों में 1 BHK की मांग अब भी मजबूत
अगर पूरे भारत के आंकड़ों को देखकर यह मान लिया जाए कि 1 BHK की मांग खत्म हो गई है, तो यह तस्वीर अधूरी होगी. शहरों के हिसाब से खरीदारों की पसंद में काफी अंतर है. ANAROCK के H1 2026 सर्वे के मुताबिक, 1 BHK की मांग मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR में 18% रही. पुणे में यह आंकड़ा 10% और बेंगलुरु में 9% रहा. दूसरी तरफ, अहमदाबाद, हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली-NCR जैसे बाजारों में 3 BHK को 50% से अधिक खरीदारों ने प्राथमिकता दी.
इससे पता चलता है कि 1 BHK का बाजार खासतौर पर उन शहरों और इलाकों में अब भी महत्वपूर्ण है, जहां कॉम्पैक्ट और अपेक्षाकृत किफायती घरों की जरूरत बनी हुई है.
मुंबई में कॉम्पैक्ट घरों की तस्वीर अलग
MMR में 1 BHK की अपेक्षाकृत मजबूत मांग के साथ-साथ छोटे घरों की सप्लाई भी देखने को मिलती है. ANAROCK के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र में 2025 के दौरान लॉन्च हुई कुल 42,643 आवासीय इकाइयों में स्टूडियो, 1 BHK और 2 BHK का संयुक्त हिस्सा करीब 60% था. यानी देश के सभी बाजारों में एक जैसा ट्रेंड नहीं है. जहां कुछ शहरों में बड़े घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं मुंबई जैसे महंगे बाजारों में कॉम्पैक्ट घरों की जरूरत बनी हुई है.
पहली बार घर खरीदने वालों के लिए 1 BHK क्यों अहम?
1 BHK अभी भी उन खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो पहली बार घर खरीदना चाहते हैं और शुरुआती निवेश तथा EMI को सीमित रखना चाहते हैं. खासकर ऐसे बाजारों में जहां जमीन और संपत्ति की कीमतें ज्यादा हैं, छोटा घर घर खरीदने का अपेक्षाकृत सुलभ रास्ता बन सकता है.
हालांकि, बढ़ती कीमतों के बीच खरीदारों का एक वर्ग अब छोटा घर खरीदने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा बड़ा घर लेने की कोशिश कर रहा है. ANAROCK के सर्वे में 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की कीमत वाली संपत्तियां सबसे पसंदीदा बजट सेगमेंट रहीं, जिन्हें 34% उत्तरदाताओं ने चुना.
तो क्या 1 BHK खत्म हो रहा है?
आंकड़ों के आधार पर इसे खत्म होता हुआ बाजार कहना सही नहीं होगा. बल्कि भारत के रियल एस्टेट बाजार में 1 BHK की भूमिका बदलती हुई दिखाई दे रही है. ANAROCK के सर्वे में करीब 9% खरीदारों ने 1 BHK को प्राथमिकता दी और MMR, पुणे तथा बेंगलुरु जैसे बाजारों में इसकी मांग अपेक्षाकृत मजबूत रही.
इसलिए कहानी 1 BHK के खत्म होने की नहीं, बल्कि बड़े घरों की बढ़ती मांग और छोटी यूनिट्स की सीमित होती नई सप्लाई के बीच बढ़ते अंतर की है. आने वाले समय में 1 BHK की मांग इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि डेवलपर्स किस कीमत और किस लोकेशन पर कॉम्पैक्ट घर उपलब्ध कराते हैं और खरीदारों की affordability किस दिशा में जाती है.
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