भारत में अक्सर हाउसिंग सोसायटी में देर रात तक बजता डीजे, पार्किंग को लेकर पड़ोसियों में कहासुनी, इधर-उधर बिखरा कचरा या लिफ्ट-पार्क जैसी संपत्तियों को पहुंचाया गया नुकसान बड़ी बहस का कारण बन जाता है. ऐसी स्थिति में सोसायटी का रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने में देर नहीं लगाता.
लेकिन असली पेंच तब फंसता है, जब नियम तोड़ने वाला कोई किरायेदार हो! ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस पेनल्टी या जुर्माने की भरपाई कौन करेगा, मकान मालिक अपनी जेब ढीली करेगा या गलती करने वाला किरायेदार? दरअसल, इस सवाल का जवाब सीधा नहीं है. यह पूरी तरह से उल्लंघन की प्रकृति और एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करता है.
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सोसायटी हमेशा फ्लैट मालिक पर ही क्यों लगाती है जुर्माना?
हाउसिंग सोसायटी का कानूनी संबंध केवल संपत्ति के पंजीकृत मालिक से होता है, न कि वहां रहने वाले किरायेदार से. यही वजह है कि अगर सोसायटी में किसी भी नियम का उल्लंघन होता है, तो जुर्माना सीधे फ्लैट मालिक के नाम पर ही जारी करती है. चाहे गलती किरायेदार की ही क्यों न हो, सोसायटी के बाय-लॉज़ के तहत प्राथमिक जवाबदेही मकान मालिक की ही मानी जाती है.
हालांकि, सोसायटी प्रबंधन किरायेदार को सीधे चेतावनी दे सकता है, लेकिन जुर्माने की वसूली के लिए वह केवल मालिक को ही जिम्मेदार ठहराता है. किरायेदार की गलती का नुकसान मकान मालिक को न उठाना पड़े, इसके लिए रेंट या लीव-एंड-लाइसेंस एग्रीमेंट में स्पष्ट शर्तें होना बेहद जरूरी है.
अगर एग्रीमेंट में यह साफ तौर पर लिखा है कि सोसायटी नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले किसी भी जुर्माने के लिए किरायेदार जिम्मेदार होगा, तो मकान मालिक सोसायटी को भुगतान किए गए जुर्माने की राशि किरायेदार से वसूल कर सकता है. यह राशि या तो किरायेदार से अलग से ली जा सकती है या सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटी जा सकती है. एग्रीमेंट में बना यह क्लॉज मकान मालिक को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है.
वे आम कारण जिन पर सोसायटी लगाती है पेनल्टी
विवादों से बचने के लिए पारदर्शी संवाद जरूरी
किसी भी संभावित विवाद से बचने के लिए मकान मालिक और किरायेदार दोनों को फ्लैट किराए पर देने से पहले ही सोसायटी के बाय-लॉज़ पर खुलकर बात कर लेनी चाहिए. रेंट एग्रीमेंट तैयार करते समय सोसायटी मेंटेनेंस, सुरक्षा नियमों और जुर्मानों की देनदारी से जुड़े सभी बिंदुओं को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाना चाहिए.
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