चीन की महिला ने 20 करोड़ में खरीद ली 196 पार्किंंग, किराया दोगुना किया तो कोर्ट पहुंचे लोग

विवाद सुलझाने के लिए सरकारी मध्यस्थता की कोशिश भी की गई थी, लेकिन इससे कोई समाधान नहीं निकला, इसके बाद मामला अदालत पहुंचा.

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चीन के इस मामले की चर्चा क्यों? (Photo-ITG) चीन के इस मामले की चर्चा क्यों? (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:45 PM IST

चीन के चांग्शा शहर में एक महिला ने रिहायशी इलाके में 196 पार्किंग की जगहें खरीद लीं, करीब 1.4 करोड़ युआन यानी लगभग 20 करोड़ रुपये में हुई इस खरीद के बाद महिला ने कुछ पार्किंग स्थलों को किराये पर देना शुरू किया, जब उसने किराया बढ़ाकर पहले से लगभग दोगुना कर दिया, तो परिसर में रहने वाले लोगों ने उसके खिलाफ अदालत का रुख किया, हालांकि, अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसकी खरीद को कानूनी ठहराया. इस मामले ने रिहायशी परिसरों में पार्किंग जैसी जरूरी सुविधाओं के निजी स्वामित्व को लेकर बहस छेड़ दी है.

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला की पहचान केवल उसके उपनाम वू (Wu) से हुई है, उसने वर्ष 2018 में चांग्शा के एक रिहायशी परिसर में एक ही सौदे के तहत 196 पार्किंग की जगहें खरीदी थीं. ये जगहें परिसर की कुल पार्किंग क्षमता का करीब 40 फीसदी थीं. इस खरीद के बाद परिसर की पार्किंग व्यवस्था के बड़े हिस्से पर उसका नियंत्रण हो गया.

पार्किंग की जगहें खरीदने के बाद वू ने उन पर ताले लगवा दिए, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति बिना अनुमति उनका इस्तेमाल न कर सके, बाद में इलाके में पार्किंग की मांग बढ़ने पर उसने कुछ जगहें किराये पर देना शुरू कर दिया.

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किराया बढ़ाकर 500 युआन महीना किया

रिपोर्ट के अनुसार, वू एक पार्किंग की जगह के लिए हर महीने 500 युआन किराया ले रही थीं. यह रकम करीब 7,258 रुपये या 75 अमेरिकी डॉलर के बराबर बताई गई. यह किराया वर्ष 2018 में डेवलपर की ओर से तय की गई शुरुआती दर से लगभग दोगुना था.

रिहायशी परिसर के लोगों ने किराया घटाकर 300 युआन यानी करीब 4,334 रुपये प्रति माह करने की मांग की, लेकिन वू ने इसे स्वीकार नहीं किया. इसके अलावा, कुछ पार्किंग की जगहों को करीब 1 लाख युआन यानी लगभग 14 लाख रुपये में बेचने के लिए भी सूचीबद्ध किया गया, कुछ जगहों की कीमत उनकी शुरुआती कीमत से 80 फीसदी तक अधिक बताई गई.

पार्किंग की कमी से परेशान लोगों ने दायर किया मुकदमा

किराया बढ़ने और पार्किंग की जगहों की उपलब्धता कम होने से नाराज होकर परिसर के कुछ निवासियों ने समूह बनाया और मुकदमा दायर किया, निवासियों ने अदालत से वू और डेवलपर के बीच हुए खरीद समझौते को रद्द करने की मांग की. उनका तर्क था कि पार्किंग रिहायशी परिसर की एक जरूरी सुविधा है और इस पर किसी एक व्यक्ति का इतना बड़ा नियंत्रण उचित नहीं है.

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अदालत ने महिला के पक्ष में सुनाया फैसला

फरवरी 2024 में चांग्शा की एक स्थानीय अदालत ने वू के पक्ष में फैसला सुनाया और पार्किंग की जगहों की खरीद को कानूनी ठहराया, अदालत ने कहा कि डेवलपर ने शुरुआत में ये जगहें रिहायशी परिसर के लोगों को खरीदने के लिए पेश की थीं, लेकिन उस समय उन्होंने इन्हें नहीं खरीदा. अदालत ने यह भी पाया कि किसी व्यक्ति को कई पार्किंग की जगहों का मालिक बनने से रोकने वाला कोई कानून लागू नहीं था.

अदालत के मुताबिक, वू ने निवेश के लिए धन की व्यवस्था की थी, अपनी पूंजी लगाई थी और उससे जुड़े वित्तीय जोखिम भी उठाए थे, इसलिए केवल इस आधार पर उनकी खरीद को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उन्होंने बड़ी संख्या में पार्किंग की जगहें खरीदी हैं.

फैसले के बाद फिर छिड़ी बहस

इस मामले के फैसले ने चीन के सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या रिहायशी परिसरों में पार्किंग जैसी जरूरी सुविधाओं पर किसी एक व्यक्ति को बड़े पैमाने पर स्वामित्व रखने की अनुमति होनी चाहिए, एक ओर निजी संपत्ति के अधिकार और कानूनी खरीद का मुद्दा है, तो दूसरी ओर परिसर में रहने वाले लोगों की जरूरतों और पार्किंग की उपलब्धता का सवाल है, यह मामला निजी स्वामित्व और सामुदायिक सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है.

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