बेंगलुरु को मिलेगा जाम से निजात, बनेगा 47 KM टनल, डीके शिवकुमार का मेगा प्लान

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि ऐसी जगहों पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और इसके लिए कानूनी प्रावधान तैयार किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य अगले 18 महीनों में इन योजनाओं का वास्तविक असर जमीन पर दिखाना है.

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बदलने वाला बेंगलुरु, लोगों को मिलेगा जाम से आराम (Photo-ITG) बदलने वाला बेंगलुरु, लोगों को मिलेगा जाम से आराम (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

बेंगलुरु में ट्रैफिक और खराब सड़कों की समस्या को लेकर 'इंडिया टुडे कर्नाटक राउंडटेबल' में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अगले 15-18 महीनों के लिए सरकार की योजनाओं पर बात की. उन्होंने माना कि सिर्फ सड़कों पर डामर बिछाना या उन्हें पक्का करना स्थायी समाधान नहीं है, उनके मुताबिक, शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव से निपटने के लिए बड़े और भविष्य को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा.

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शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु में करीब 1.35 करोड़ वाहन हैं और शहर की मौजूदा संरचना दिल्ली जैसे सुनियोजित शहरों की तरह नहीं है. ऐसे में ट्रैफिक और मोबिलिटी की समस्या का समाधान आसान नहीं है. उन्होंने बताया कि सरकार ने शहर में करीब 150 किलोमीटर फ्लाईओवर और 47 किलोमीटर टनल बनाने की योजना तैयार की है. 

फिलहाल इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है, उन्होंने कहा कि कुछ सांसद और अन्य लोग इन योजनाओं की आलोचना कर रहे हैं, लेकिन सरकार की योजना को पूरी तरह समझे बिना ऐसी आलोचना की जा रही है. मामले से जुड़े दस्तावेज केंद्र सरकार के पास भी भेजे गए हैं.

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शिवकुमार ने कहा कि मुंबई में भी कई टनल परियोजनाओं पर काम चल रहा है और बेंगलुरु में भी इसी तरह के समाधान तलाशे जा रहे हैं, उनका तर्क है कि जिन लोगों के लिए समय महत्वपूर्ण है और जो यात्रा के लिए भुगतान कर सकते हैं, उनके लिए ऐसे वैकल्पिक मार्ग उपयोगी होंगे.

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निजी जमीन का अधिग्रहण नहीं करने का दावा

फ्लाईओवर और टनल परियोजनाओं के लिए पार्क या कृषि भूमि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने पर शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार निजी संपत्तियों का मनमाने तरीके से अधिग्रहण नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर सड़क निर्माण के लिए जमीन की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की सरकार की कोई योजना नहीं है.

जहां सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए खुली जगह उपलब्ध होगी, वहां उसके एक हिस्से का इस्तेमाल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए किया जा सकता है. 

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