अमेरिका के प्रमुख शहरों में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है. एक तरफ जहां देश के सबसे गरीब किराएदार अपने सिर छिपाने के लिए एक छोटा सा कमरा तक नहीं ढूंढ पा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 'अफोर्डेबल' यानी किफायती श्रेणी में दर्ज हजारों मकान खाली पड़े धूल फांक रहे हैं. इस विडंबना ने अमेरिकी हाउसिंग मॉडल की उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है, जहां सरकारी मदद से बने मकान भी बेहद गरीब तबके की पहुंच से कोसों दूर हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्सस के ऑस्टिन शहर में लगभग 4,500 किफायती घर खाली पड़े हैं, जो कुल किफायती हाउसिंग स्टॉक का करीब 16% है. आम तौर पर 5% की रिक्ति दर को सामान्य माना जाता है. यही स्थिति डेनवर और पोर्टलैंड जैसे शहरों की भी है, जहां 60% से 80% एरिया मीडियन इनकम (AMI) वाले समूहों के लिए बने 12% से 21% तक घर खाली पड़े हैं.
इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि इन तथाकथित किफायती मकानों का किराया और बाजार दर के किराए में अब कोई खास अंतर नहीं रह गया है. उदाहरण के लिए, पोर्टलैंड में 60% AMI वाले किफायती घर का किराया लगभग $1,444 प्रति माह है, जबकि सामान्य एक-बेडरूम का औसत किराया $1,581 है. लोग कागजी कार्रवाई और लंबे इंतज़ार से बचने के लिए थोड़ा अधिक किराया देकर सामान्य फ्लैट्स में रहना पसंद कर रहे हैं.
कागजी कार्रवाई का मकड़जाल
किफायती मकानों के खाली रहने की एक बड़ी वजह सख्त नियम भी हैं. डेवलपर्स को आय सत्यापन के लिए आवेदकों के हर बैंक स्टेटमेंट, पे-चेक और यहां तक कि लेनदेन तक की जांच करनी पड़ती है. इस जटिल प्रक्रिया के कारण किराएदारों को अप्रूवल मिलने में महीनों लग जाते हैं, जबकि मार्केट-रेट अपार्टमेंट में दो मिनट में अप्रूवल मिल जाता है.
नीतियों का दोष और गरीब किराएदार
नेशनल लो इनकम हाउसिंग कोएलिशन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 1.1 करोड़ कम आय वाले परिवार हैं, जिनके लिए सिर्फ 40 लाख किफायती घर उपलब्ध हैं, इन परिवारों की सालाना आय $16,000 से भी कम है. लो-इनकम हाउसिंग टैक्स क्रेडिट योजना के तहत बनने वाले अधिकांश मकान उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं, जो क्षेत्र की औसत आय (AMI) का 50% या उससे अधिक कमाते हैं.
डेवलपर्स का गणित और समाधान की कमी
डेवलपर्स का तर्क है कि बिना भारी सब्सिडी के सबसे गरीब वर्ग के लिए घर बनाना आर्थिक रूप से संभव नहीं है. निर्माण और रखरखाव के खर्च इतने अधिक हैं कि केवल किराए से लागत निकालना मुश्किल है.
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