हर नागरिक का होगा अपना घर, किफायती आवास के लिए सरकार बना रही नया सिस्टम

देश में किफायती आवास की तस्वीर बदलने वाली है, सरकार ने योजनाओं से आगे बढ़कर एक टिकाऊ सिस्टम बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर की समस्याओं का हल निकलेगा, इस कदम का सीधा मकसद देश के हर नागरिक के लिए सस्ते, सुरक्षित और सुलभ मकान का रास्ता साफ करना है.

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देश में किफायती घरों की है भारी कमी (Photo-ITG) देश में किफायती घरों की है भारी कमी (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:42 AM IST

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 'किफायती आवास सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन' का आयोजन किया, इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "पुनर्कल्पित किफायती आवास: योजना से टिकाऊ इकोसिस्टम तक" था. इसका सीधा मकसद भारत के रियल एस्टेट सेक्टर की समस्याओं को दूर करना और एक ऐसा आसान और मजबूत सिस्टम बनाना है, जिससे देश के हर नागरिक को सस्ता और बेहतर घर मिल सके.

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सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने जोर देकर कहा कि शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास का दायरा बढ़ाने के लिए भूमि और शहरी नियोजन में बड़े सुधारों की जरूरत है. उन्होंने सुझाव दिया कि किफायती आवास के लिए उपयोग होने वाली जमीन पर 'लैंड-यूज चेंज फीस' माफ की जानी चाहिए और ऐसी आवासीय इकाइयों को स्टाम्प ड्यूटी से छूट मिलनी चाहिए, इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और प्रोजेक्ट्स ज्यादा व्यावहारिक बन सकेंगे.

नीति आयोग और MoHUA की संयुक्त रिपोर्ट "ए कॉम्प्रिहेंशिव फ्रेमवर्क टू प्रमोट अफोर्डेबल हाउसिंग" में सिफारिश की गई है कि मास्टर प्लान में कम से कम 10 प्रतिशत आवासीय भूमि को 'अफोर्डेबल हाउसिंग जोन' के रूप में आरक्षित किया जाना चाहिए. इसके अलावा, ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए फ्लोर एरिया रेशियो को बढ़ाकर 5 या 6 तक करने, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और भूमि बैंक बनाने की बात कही गई है.

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किराए के घरों की बढ़ेगी मांग

बदलते दौर में प्रवासी मजदूरों, युवाओं, छात्रों और औद्योगिक कामगारों के लिए किराए के मकानों की मांग तेजी से बढ़ रही है. राजीव गौबा ने टेनेंसी फ्रेमवर्क में सुधार करते हुए रेंटल हाउसिंग के दायरे को व्यापक बनाने पर जोर दिया, उन्होंने वित्तीय क्षेत्र की बड़ी भागीदारी और अफोर्डेबल सेगमेंट में प्राइवेट कैपिटल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि फंड की कोई कमी न रहे.

नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक अन्ना रॉय ने कहा कि जैसे-जैसे भारत का शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, नीतिगत दृष्टिकोण को केवल व्यक्तिगत आवास योजनाएं चलाने से आगे बढ़कर एक ऐसे व्यापक इकोसिस्टम के निर्माण की ओर ले जाना होगा जो निरंतर किफायती आवासों की आपूर्ति सुनिश्चित कर सके.

PMAY-U और PMAY-U 2.0 की भूमिका

शहरी विकास मंत्रालय के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि किफायती आवास न केवल एक सामाजिक जरूरत है, बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और टिकाऊ शहरीकरण का एक शक्तिशाली इंजन भी है. उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) की पिछले एक दशक की सफलताओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे इस योजना ने देश में महिला स्वामित्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ शहरी आवास के परिदृश्य को बदल दिया है.

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अब PMAY-U 2.0 के जरिए मांग-आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए 1 करोड़ अतिरिक्त पात्र शहरी परिवारों को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, इसमें आधुनिक तकनीक, वित्त तक आसान पहुंच और मजबूत संस्थागत साझेदारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

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तकनीकी सत्र और भविष्य की राह

सम्मेलन के दौरान तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें भूमि और शहरी नियोजन सुधार, रेंटल हाउसिंग का विस्तार, रिक्ति अनलॉक रणनीतियां और पूंजी तक पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर मंथन हुआ.  यह सम्मेलन इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि केंद्र, राज्यों, वित्तीय संस्थानों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के सहयोगात्मक प्रयासों से ही भारत के शहरी क्षेत्रों में एक सुलभ, समावेशी और टिकाऊ आवास इकोसिस्टम की नींव मजबूत हो सकती है.

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