शेयर ब्रोकिंग से आगे बढी Zerodha, मर्चेंट बैंकिंग में नई पारी को SEBI की हरी झंडी

जेरोधा अब सिर्फ शेयरों की खरीद-बिक्री कराने वाली ब्रोकिंग कंपनी नहीं रहना चाहती. मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए उसके आवेदन को सेबी से क्लियरेंस मिलना कंपनी की विस्तार रणनीति में अहम कदम है. औपचारिक रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद जेरोधा आईपीओ, एफपीओ, राइट्स इश्यू और अन्य फंडरेजिंग गतिविधियों में उतर सकेगी.

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मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जेरोधा के अप्लीकेशन को सेबी से क्लियरेंस मिल गई है. (File Photo) मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जेरोधा के अप्लीकेशन को सेबी से क्लियरेंस मिल गई है. (File Photo)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:45 AM IST

नितिन कामत (Nithin Kamath) और निखिल कामत (Nikhil Kamath) की कंपनी जेरोधा (Zerodha) की मर्चेंट बैंकिंग कारोबार में एंट्री अब एक कदम और आगे बढ़ गई है. मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी के मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के आवेदन को क्लियर कर दिया है. हालांकि, सेबी के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है.

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जेरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स ने 27 अप्रैल 2026 को मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद कंपनी आईपीओ, एफपीओ, राइट्स इश्यू और अन्य फंडरेजिंग ट्रांजैक्शंस के मैनेजमेंट जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकेगी.

ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़ेगी जेरोधा

मर्चेंट बैंकिंग में एंट्री जेरोधा के लिए उसके पारंपरिक ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़ने की दिशा में बड़ा कदम है. इसके जरिए कंपनी कैपिटल मार्केट में कंपनियों के लिए फंड जुटाने और इश्यू मैनेजमेंट जैसी सेवाएं दे सकेगी. इससे जेरोधा की सीधी प्रतिस्पर्धा देश के स्थापित इन्वेस्टमेंट बैंकों और ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों से हो सकती है. यानी कंपनी की भूमिका सिर्फ रिटेल निवेशकों को ब्रोकिंग सेवाएं देने तक सीमित नहीं रहेगी.

फाइनेंशियल सर्विस में लगातार विस्तार

जेरोधा पिछले कुछ वर्षों में अपने फाइनेंशियल सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है. कंपनी ने जेरोधा कैपिटल के जरिए एसेट मैनेजमेंट और लेंडिंग जैसे कारोबार में कदम बढ़ाया है. इसके अलावा, अपने प्रॉप्राइटरी फंड के जरिए निवेश गतिविधियों में भी सक्रिय रही है. कंपनी को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) से गिफ्ट सिटी में ब्रोकर-डीलर रजिस्ट्रेशन भी मिल चुका है. इससे भारतीय निवेशकों के ओवरसीज इन्वेस्टमेंट से जुड़ी सेवाओं में विस्तार का रास्ता खुलता है.

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मर्चेंट बैंकिंग में कंपनियां ले रहीं दिलचस्पी

देश में प्राइमरी कैपिटल मार्केट की गतिविधियां मजबूत रहने के बीच मर्चेंट बैंकिंग कारोबार में फिनटेक और अन्य फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है. 31 अगस्त 2026 तक सेबी के पास 248 रजिस्टर्ड मर्चेंट बैंकर थे. वहीं, रेगुलेटर के एप्लिकेशन-स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन आवेदन प्रोसेस में थे. इनमें हैतोंग सिक्योरिटीज इंडिया, हूलिहान लोकी एडवाइजरी इंडिया और सोसाइटी जेनराले सिक्योरिटीज इंडिया जैसे नाम शामिल थे.

सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के नियम किए सख्त

जेरोधा की प्रस्तावित एंट्री ऐसे समय हो रही है, जब सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के लिए पूंजी और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियम कड़े किए हैं. Category I मर्चेंट बैंकरों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ कर दी गई है. वहीं, Category II मर्चेंट बैंकरों के लिए यह सीमा ₹10 करोड़ है. Category I मर्चेंट बैंकर मेन-बोर्ड पब्लिक इश्यू मैनेज कर सकते हैं, जबकि Category II को यह अनुमति नहीं होती.

संशोधित नियमों में लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं. इसके अलावा, मर्चेंट बैंकरों की कुल अंडरराइटिंग देनदारी को उनकी लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है. मौजूदा मर्चेंट बैंकरों को नई पूंजी संबंधी शर्तें पूरी करने के लिए समय दिया गया है. हालांकि, नए आवेदकों को शुरुआत से ही लागू नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा.

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