भारत ने चार साल बाद गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है. सरकार ने सोमवार को वीट एक्सपोर्ट पॉलिसी (Wheat Export Policy) को तत्काल प्रभाव से 'प्रोहिबिटेड' से 'फ्री' कर दिया. इस फैसले के दायरे में ड्यूरम गेहूं के अलावा आटा, मैदा, सूजी और होलमील आटा भी शामिल हैं. सरकार का कहना है कि रिकॉर्ड उत्पादन, पर्याप्त बफर स्टॉक और घरेलू बाजार में कम कीमतों को देखते हुए यह फैसला किसानों के हित में लिया गया है.
भारत ने मई 2022 में घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी. इससे पहले सरकार ने लाइसेंस के जरिए 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी. हालांकि, 60 लाख टन की मंजूरी के बावजूद इस अवधि में सिर्फ करीब 2.5 लाख टन गेहूं और गेहूं उत्पाद ही शिप हो पाए. निर्यात पर रोक से पहले रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक गेहूं सप्लाई प्रभावित हुई थी.
फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद रूस और यूक्रेन से शिपमेंट प्रभावित होने लगीं और अंतरराष्ट्रीय कीमतें करीब 14 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं. ऐसे में वैश्विक खरीदार भारत की तरफ मुड़े. घरेलू बाजार में गेहूं और गेहूं उत्पादों की कीमतों में भी तेजी आई. ईंधन की बढ़ती लागत और हीटवेव की चिंता के बीच सरकार ने निर्यात पर रोक लगा दी.
अब क्यों हटाई गई रोक?
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, निर्यात पर रोक हटाने का फैसला किसानों के हित में किया गया है. उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं. ऐसे में निर्यात की अनुमति मिलने से बाजार भाव में सुधार हो सकता है और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है.
सरकार को उम्मीद है कि बेहतर कीमतों से अगले रबी सीजन में गेहूं की बुआई को भी प्रोत्साहन मिलेगा. साथ ही सरकार का कहना है कि घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त गेहूं मौजूद है और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता कीमतों में तेज बढ़ोतरी को रोकने की गुंजाइश भी बनी हुई है.
रिकॉर्ड उत्पादन और बड़ा बफर स्टॉक
सरकार के इस फैसले के पीछे देश में गेहूं का मजबूत उत्पादन और पर्याप्त स्टॉक भी बड़ी वजह है. 2025-26 फसल वर्ष में भारत में करीब 120.65 मिलियन टन गेहूं पैदा हुआ, जो पिछले साल के 117.94 मिलियन टन से ज्यादा है. वहीं, फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के पास करीब 49 मिलियन टन गेहूं का बफर स्टॉक मौजूद है. अमेरिकी कृषि विभाग को भी 2026-27 के अंत तक भारत में रिकॉर्ड स्टॉक और निर्यात योग्य सरप्लस रहने की उम्मीद है.
घरेलू बाजार में गेहूं-आटा के दाम स्थिर
सरकार के मुताबिक, घरेलू बाजार में गेहूं और आटे की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ी तेजी नहीं है. देश में सोमवार को गेहूं का औसत खुदरा भाव करीब ₹31.46 प्रति किलो रहा. वहीं, आटे की औसत कीमत करीब ₹37.30 प्रति किलो थी. दोनों कीमतें एक साल पहले की तुलना में लगभग स्थिर हैं. यही वजह है कि सरकार को लगता है कि निर्यात खोलने के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतों पर तुरंत बड़ा दबाव नहीं आएगा.
ब्लैक सी रीजन में सप्लाई संकट बढ़ा
भारत ने ऐसे समय गेहूं निर्यात खोला है जब रूस और यूक्रेन से होने वाली सप्लाई एक बार फिर दबाव में है. ब्लैक सी रीजन में बंदरगाहों और कारोबारी जहाजों पर हमलों से अनाज की शिपमेंट प्रभावित हुई है. कई अनाज टर्मिनल बंद हुए हैं और पीक एक्सपोर्ट सीजन में कुछ कार्गो टले या रद्द हुए हैं. जुलाई से सितंबर डिलीवरी के लिए एशियाई खरीदारों ने ब्लैक सी क्षेत्र से करीब 20 से 25 लाख टन गेहूं बुक किया था. यह उनकी कुल आयात जरूरत का लगभग 30 से 50 फीसदी हिस्सा था.
भारत को मिल सकता है नया बाजार
ब्लैक सी रीजन से सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ने के बीच कुछ खरीदार अब ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उत्तरी अमेरिका और दूसरे बाजारों की तरफ भी देख रहे हैं. 2026 की पहली छमाही में दुनिया के सबसे बड़े गेहूं आयातक मिस्र ने अपनी जरूरत का 82 फीसदी से ज्यादा गेहूं रूस और यूक्रेन से खरीदा था. इंडोनेशिया जैसे बड़े खरीदार भी सप्लाई में अनिश्चितता के बीच दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं. हालांकि, ब्लैक सी का गेहूं अभी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले सस्ता है. ऐसे में भारत से कितनी मात्रा में गेहूं का निर्यात होगा, यह कीमत और एक्सपोर्ट-क्वालिटी गेहूं की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क