'इलायची के नाम पर पान मसाला का प्रचार', शाहरुख, अजय, टाइगर को नोटिस, HC पहुंचा मामला

विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. कंपनी पीबी एग्रो ने महाराष्ट्र एफडीए के शो कॉज नोटिस को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है. ये नोटिस शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी किए गए थे.

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विमल इलायची विज्ञापन मामले में अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ और शाहरुख खान (L-R) को महाराष्ट्र FDA ने कारण बताओ नोटिस नोटिस भेजा है. (Photo: ITG) विमल इलायची विज्ञापन मामले में अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ और शाहरुख खान (L-R) को महाराष्ट्र FDA ने कारण बताओ नोटिस नोटिस भेजा है. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:59 AM IST

विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. कंपनी पीबी एग्रो ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की ओर से जारी शो-कॉज नोटिस (कारण बताओ नोटिस) को रद्द करने की मांग की. ये नोटिस अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को जारी किए गए थे. मामला विमल इलायची के विज्ञापन में प्रोडक्ट की गलत पेशकश और इसे सरोगेट विज्ञापन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के आरोपों से जुड़ा है.

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महाराष्ट्र FDA का आरोप है कि विज्ञापन में विमल इलायची के नाम पर अप्रत्यक्ष रूप से विमल पान मसाला का प्रचार हो रहा है. इसी आधार पर FDA ने विज्ञापन से जुड़े फिल्म एक्टर्स को नोटिस जारी किए हैं. नोटिस में एक्टर्स से ऐसे दस्तावेज पेश करने को कहा गया है, जिनसे यह साबित हो सके कि विज्ञापन में प्रमोट किया जा रहा विमल इलायची प्रोडक्ट प्रतिबंधित पान मसाला प्रोडक्ट से अलग है. FDA ने प्रमोशनल कैंपेन रोकने और डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंधित विज्ञापन सामग्री हटाने के निर्देश भी दिए हैं.

कंपनी ने क्या दलील दी?

पीबी एग्रो ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि कंपनी विमल ब्रांड के तहत इलायची प्रोडक्ट का प्रचार करती है और इसके लिए नामी कलाकारों की सेवाएं ली गई हैं. कंपनी का दावा है कि उसका विज्ञापन लागू कानून और नियमों का पूरी तरह पालन करता है. कंपनी के वकील ने अदालत में दलील दी कि 11 अगस्त 2026 का शो कॉज नोटिस सीधे कंपनी को नहीं, बल्कि विज्ञापन में नजर आने वाले कलाकारों को भेजा गया था.

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पीबी एग्रो के वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की कार्रवाई का वास्तविक असर कंपनी के कारोबार और विज्ञापन पर पड़ेगा. कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया.

अधिकार क्षेत्र पर भी विवाद

मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल अदालत के अधिकार क्षेत्र का है. कंपनी का कहना है कि महाराष्ट्र FDA के पास इस तरह के विज्ञापन को रोकने का अधिकार नहीं था. वहीं, केंद्र सरकार और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में कहा गया कि कंपनी को अपनी याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर करनी चाहिए थी, क्योंकि संबंधित शो कॉज नोटिस महाराष्ट्र सरकार के नियामक ने जारी किया है.

पीबी एग्रो ने याचिका में सरोगेट एडवरटाइजिंग के आरोपों को बेबुनियाद बताया है. कंपनी का कहना है कि विमल पान मसाला का प्रोडक्शन या बिक्री महाराष्ट्र में साल 2001 से नहीं की गई है. साथ ही, कंपनी ने दावा किया कि तंबाकू वाले पान मसाला पर साल 2013 से देशभर में सुप्रीम कोर्ट की रोक लागू है.

सरोगेट एडवरटाइजिंग क्या है?

सरोगेट एडवरटाइजिंग (Surrogate Advertising) या अप्रत्यक्ष विज्ञापन मार्केटिंग की एक ऐसी रणनीति है, जिसमें कानून द्वारा प्रतिबंधित या सीमित उत्पादों (जैसे शराब, सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला) का सीधे प्रचार करने के बजाय उसी ब्रांड के नाम, लोगो या रंग-रूप वाले किसी वैध (कानूनी रूप से स्वीकृत) अन्य उत्पाद का विज्ञापन किया जाता है.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल बेंच ने फिलहाल मामले में अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से जुड़े सवाल पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. यानी अदालत पहले यह तय करेगी कि इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में होनी चाहिए या किसी अन्य हाई कोर्ट में. अधिकार क्षेत्र पर फैसला आने के बाद ही कंपनी की ओर से महाराष्ट्र FDA के शो कॉज नोटिस रद्द करने की मांग पर आगे की कार्यवाही की दिशा स्पष्ट होगी.

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