हार के ये 5 कारण, अमेरिका में भी लोग थे परेशान... कहा- नहीं चाहिए ट्रंप!

US Midterm Elections Results: अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी और निचले दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार ठहराया. लेकिन चुनाव के बाद आए सर्वे बताते हैं कि अमेरिकी वोटर महंगाई, पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च से भी परेशान थे.

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अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. (Photo: ITG) अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. (Photo: ITG)

दीपक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:53 AM IST

अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी को ऐसा झटका लगा है, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट (अमेरिकी कांग्रेस के निचले और ऊपरी सदन), दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत हो गया है. अमेरिका में लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और जीवनयापन के बढ़ते खर्च से परेशान थे. ईरान युद्ध ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं. शायद इसीलिए मिडटर्म इलेक्शन में लोगों ने ट्रंप को आईना दिखाया और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा. आखिर अमेरिकी जनता ट्रंप की नीतियों से क्यों नाराज हुई और हार के पीछे कौन-से 5 कारण रहे? आइए जानते हैं...

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को मिडटर्म इलेक्शन में अपनी रिपब्लिकन पार्टी की हार की सबसे बड़ी वजह बताया है. लेकिन सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी वोटर सिर्फ युद्ध से नाराज नहीं थे. महंगाई, पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतें, रोजमर्रा का बढ़ता खर्च और सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष भी राष्ट्रपति ट्रंप की पार्टी पर भारी पड़ा. मिडटर्म इलेक्शन में हार के बाद जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अपनी ही सरकार की ईरान नीति पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की हार की असली वजह ईरान युद्ध है. वेंस के मुताबिक, 2024 में ट्रंप और उन्हें वोट देने वाले कई मतदाताओं ने इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का साथ दिया. इन मतदाताओं की नाराजगी के पीछे युद्ध, महंगाई, अमेरिका को प्राथमिकता देने की मांग और इजरायल के साथ अमेरिकी रिश्ते जैसे कई मुद्दे थे. वेंस ने यहां तक कहा कि अगर कोई यह मानता है कि ईरान युद्ध के लिए सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत गंवाना सही कीमत थी, तो वह ऐसा तर्क दे सकता है.

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राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों से जेडी वेंस बना रहे दूरी?

जेडी वेंस का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान युद्ध को सही ठहराते रहे हैं. वेंस पहले भी विदेशों में लंबे सैन्य अभियानों को लेकर संयम बरतने की बात करते रहे हैं. ऐसे में चुनावी हार के बाद उनका यह रुख ट्रंप से दूरी बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. 2028 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की वेंस की संभावित दावेदारी के बीच उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चाएं तेज कर दी हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने भी माना कि ईरान युद्ध और उससे जुड़ी ईंधन की कीमतों ने चुनाव पर असर डाला. हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए ऐसा करना जरूरी था. ट्रंप का कहना है कि दोबारा मौका मिलने पर वह फिर यही फैसला लेते.

महंगाई और रोजमर्रा का खर्च बना सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिकी वोटरों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजहों में महंगाई और जीवनयापन का बढ़ता खर्च शामिल रहा. पेट्रोल-डीजल से लेकर किराने के सामान तक की कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ा. लोगों को लगने लगा कि अर्थव्यवस्था को लेकर किए गए वादों के बावजूद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में राहत नहीं आई है. इस साल अगस्त में हुए Reuters/Ipsos सर्वे में 47 फीसदी रजिस्टर्ड वोटरों ने कहा था कि मिडटर्म इलेक्शन में उनका सबसे अहम मुद्दा रोजमर्रा का खर्च होगा. इसी सर्वे में 71 फीसदी अमेरिकी वयस्कों ने महंगाई और जीवनयापन के खर्च को संभालने के ट्रंप के तरीके पर असंतोष जताया था.

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मिडटर्म इलेक्शन के बाद सामने आए ABC News Voter Poll के शुरुआती आंकड़े भी इसी तरफ इशारा करते हैं. सर्वे में 49 फीसदी वोटरों ने कहा कि जीवनयापन का खर्च उनके कांग्रेस चुनाव में वोट देने के फैसले के लिए बेहद अहम था. वहीं, 55 फीसदी ने सरकारी भ्रष्टाचार को अहम मुद्दा बताया. इसके मुकाबले 34 फीसदी वोटरों ने ईरान युद्ध को अपने वोट के लिए बेहद अहम बताया. यानी युद्ध ने नाराजगी जरूर बढ़ाई, लेकिन महंगाई और सरकार पर भरोसे का सवाल भी मतदाताओं के लिए बड़ा था.

ईरान युद्ध की वजह से पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा

ईरान के साथ युद्ध का असर सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा. इसका सीधा असर तेल बाजार और अमेरिकी नागरिकों के खर्च पर पड़ा. युद्ध के दौरान ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित की. यह रास्ता दुनिया के तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के कारोबार के लिए बेहद अहम है. सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और अमेरिका में पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ. यानी विदेश में चल रहे युद्ध की कीमत अमेरिकी परिवारों को ईंधन भरवाते समय चुकानी पड़ी. ट्रंप प्रशासन के लिए यह मुश्किल इसलिए भी बना क्योंकि मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) से पहले ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट की नीति और विदेशी युद्धों से दूरी बनाने का संदेश दिया था.

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ऐसे में ईरान के साथ लंबे संघर्ष ने उनके समर्थकों के बीच भी सवाल खड़े किए. मध्यावधि चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद बुधवार को तेल बाजार में उलटा रुख दिखा. जेडी वेंस के बयान और डेमोक्रेट्स की जीत के बाद बाजार में यह उम्मीद बनी कि अब अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ तनाव कम करने की दिशा में बढ़ सकता है. इसी संभावना के बीच अमेरिकी क्रूड ऑयल 'वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट' (WTI) की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली गई. हालांकि, तेल की कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि युद्ध खत्म हो गया है. बाजार की चाल आगे भी अमेरिका-ईरान के रिश्तों और होर्मुज में हालात पर निर्भर करेगी.

रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप की अलोकप्रियता भारी

मिडटर्म इलेक्शन में वोटरों ने सिर्फ उम्मीदवारों के कामकाज पर फैसला नहीं दिया, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप के दो साल के कार्यकाल का भी आकलन किया. ट्रंप ने चुनाव प्रचार में खुद को रिपब्लिकन उम्मीदवारों के अभियान का केंद्र बनाया था. लेकिन जब महंगाई और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर नाराजगी बढ़ी, तो इसका असर पार्टी के उम्मीदवारों पर भी पड़ा. द वाशिंगटन पोस्ट (TWP) और नेशनल पब्लिक ओपिनियन रिसर्च सेंटर (NORC) के 90 हजार से ज्यादा वोटरों के सर्वे के मुताबिक, अर्थव्यवस्था और रोजगार मतदाताओं के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल थे. सर्वे में यह भी सामने आया कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों को अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह मानने वाले वोटरों ने बड़ी संख्या में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया.

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हिस्पैनिक और अश्वेत वोटरों का रुख भी बदला

2024 के राष्ट्रपति चुनाव में कुछ हिस्पैनिक और अश्वेत वोटरों का समर्थन रिपब्लिकन पार्टी की तरफ बढ़ा था. लेकिन इस बार इन समुदायों के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समर्थन मिलता दिखा. टेक्सास के हिस्पैनिक बहुल इलाकों में डेमोक्रेट्स की जीत और कई पारंपरिक रिपब्लिकन क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन इस बदलाव की ओर इशारा करता है. इसके पीछे महंगाई के अलावा ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति भी एक मुद्दा रही. अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर अमेरिका में विरोध और असंतोष देखने को मिला. जेडी वेंस ने भी चुनाव के बाद अपनी पोस्ट में कहा कि इमिग्रेशन कानून लागू करने के तरीके पर फिर से विचार किया जा सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अवैध मजदूरों को काम देने वाले कारोबारों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने अवैध रूप से रह रहे लोगों को माफी देने का समर्थन नहीं किया.

डेमोक्रेट उम्मीदवारों की रणनीति भी आई काम

रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की रणनीति भी अहम रही. उन्होंने महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर लगातार बात की. कई उम्मीदवारों ने अपने-अपने राज्यों की स्थानीय समस्याओं को चुनाव प्रचार का केंद्र बनाया. इससे उन इलाकों में भी उन्हें समर्थन मिला, जहां पहले रिपब्लिकन पार्टी मजबूत मानी जाती थी. अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों से यह संदेश मिलता है कि विदेश नीति और युद्ध जैसे बड़े मुद्दे भी तब ज्यादा राजनीतिक कीमत वसूलते हैं, जब उनका असर आम लोगों की जेब पर पड़ने लगे. ईरान युद्ध ने तेल और ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाई, जबकि महंगाई ने पहले से परेशान परिवारों का गुस्सा और बढ़ाया. ट्रंप ने युद्ध को जरूरी बताया, लेकिन चुनावी नतीजों ने दिखा दिया कि मतदाताओं के लिए रोजमर्रा का खर्च, अर्थव्यवस्था और सरकार की जवाबदेही भी उतनी ही अहम है.

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