अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपने ही देश के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक को धमकाने लगे हैं. फेडरल रिजर्व बैंक पर दबाव बनाते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को कम नहीं करता है तो वह उन देशों के साथ व्यापार रोक देंगे जिनका संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार घाटा चल रहा है.
ट्रंप ने शुक्रवार, 4 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर अपने एक पोस्ट में लिखा, 'ब्याज दर कम करो वरना मैं उन देशों के साथ कारोबार बंद कर दूंगा, जिनके साथ हमारा घाटा है' उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका की उच्च ब्याज दरें देश को अनुचित नुकसान पहुंचाती हैं और कहा कि अमेरिका को दुनिया में सबसे कम उधार लागत वाला देश होना चाहिए.
अगर सच में अमेरिकी राष्ट्रपति व्यापार घाटे वाले देश से कारोबार बंद कर देते हैं तो इसका असर टैरिफ के असर से भी ज्यादा गंभीर होगा, क्योंकि अमेरिका ऐसे देशों पर ज्यादा निर्भर है और वहां से व्यापार बंद होने का मतलब है कि आपूर्ति रुक जाएगी, जिस कारण अचानक से महंगाई में उछाल आएगा. जिस कारण अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव होगा.
दुविधा में फंसे केविन वॉर्श
ट्रंप के इस बयान के बाद फेडरल बैंक रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श दुविधा में पड़ गए हैं. अगर वे ब्याज दर में कटौती करते हैं तो भी पॉलिसी के खिलाफ होगा और आगे अमेरिका के लिए चिंता वाली बात होगी, जबकि दूसरी ओर, अगर ट्रंप की बात नहीं मानते हैं तो ट्रंप के गुस्से का सामना करना पड़ेगा. फेडरल रिजर्व बैंक की बैठक 15-16 सितंबर को होने वाली है.
अमेरिका का रोजगार डेटा मजबूत
यह धमकी अमेरिका की उम्मीद से बेहतर रोज़गार रिपोर्ट के कुछ घंटों बाद आई, जिसने तत्काल ब्याज दर में कटौती की संभावना को और जटिल बना दिया है. अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 162,000 नौकरियां जोड़ी गईं, जो अर्थशास्त्रियों के लगभग 53,000-55,000 नौकरियों के अनुमान से कहीं अधिक है. बेरोजगारी दर 4.1% पर बनी रही. इस रिपोर्ट के बाद व्यापारियों ने इस बात पर दांव बढ़ा दिया कि फेडरल रिजर्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें बढ़ा सकता है.
ट्रंप क्यों कह रहे ब्याज दर घटाने की बात?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि उधार लेने की लागत कम होने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, विकास को बढ़ावा मिलेगा और देश की स्थिति में सुधार होगा. रोजगार रिपोर्ट के बाद, उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक विकास से महंगाई का डर खुद पैदा नहीं होगा. उनका तर्क है कि जरूरी नहीं है कि मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए सख्त पॉलिसी की आवश्यकता होती है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अमेरिका, एक मजबूत कर्ज होने के नाते, काफी कम ब्याज दरों पर काम करने में सक्षम होना चाहिए.
चीन, मेक्सिको और वियतनाम से ज्यादा व्यापार घाटा
इस खतरे के व्यापक परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका का अपने कई सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार घाटा है. पिछले साल अमेरिका के व्यापार घाटे में सबसे बड़ा योगदान चीन का रहा, जो 200 अरब डॉलर से अधिक था. इसके बाद मेक्सिको और वियतनाम का स्थान रहा. कुल मिलाकर, पिछले साल अमेरिका ने अपने सभी व्यापारिक साझेदारों के साथ लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा दर्ज किया.
आजतक बिजनेस डेस्क