भारत के रुपया ने दिखाया दम... US डॉलर के मुकाबले 2 महीने के हाई पर पहुंचा! RBI की ये स्कीम रही हिट

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 2 महीने से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. रुपये की मजबूती के पीछे RBI की फॉरेक्स स्कीम से आया बड़ा फॉरेन रिजर्व इंफ्लो भी अहम माना जा रहा है. इस योजना से 31 अगस्त तक 136.37 अरब डॉलर जुटाए गए हैं.

Advertisement
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 2 महीने से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया: (Image: AI generated) भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 2 महीने से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया: (Image: AI generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:46 AM IST

भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 2 महीने से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में रुपया 94.27 प्रति डॉलर तक पहुंचा. यह 29 जून के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर है. बुधवार को रुपया 94.98 पर बंद हुआ था. यानी एक दिन में रुपये की स्थिति में अच्छी मजबूती देखने को मिली. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में करीब 0.74% की मजबूती आई और यह 94.2712 तक पहुंच गया.

Advertisement

हालांकि, बाद में यह मजबूती थोड़ी कम हुई और करीब 0.5% रह गई. अब डॉलर के मुकाबले 94 रुपये का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अगर डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट 94 से नीचे जाता है और वहां बना रहता है, तो निर्यातक अपनी हेजिंग बढ़ा सकते हैं. ऐसी स्थिति में रुपया और मजबूत होकर 92.50 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है. इसलिए आने वाले दिनों में बाजार की नजर 94 के स्तर पर रहेगी.

RBI की स्कीम से मिला बड़ा फायदा

रुपये की मजबूती की एक बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से की गई डॉलर की बिक्री और देश में आया बड़ा फॉरेन रिजर्व इंफ्लो माना जा रहा है. RBI ने कुछ महीने पहले विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए एक खास योजना, फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट शुरू की थी. आरबीआई ने 31 अगस्त तक कुल 136.37 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रवासी भारतीयों के जमा पैसे का रहा.

Advertisement

आंकड़ों के मुताबिक, FCNR(B) डिपॉजिट से 127.2 अरब डॉलर आए. इसके अलावा विदेश से ली गई विदेशी मुद्रा उधारी से 5.26 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बारोविंग (ECB) से 3.89 अरब डॉलर मिले. खास बात यह है कि शुरुआत में इस योजना से सिर्फ 50-60 अरब डॉलर आने का अनुमान था. बाद में इसे बढ़ाकर 80 अरब डॉलर किया गया, लेकिन वास्तविक रकम इससे काफी ज्यादा रही.

यह भी पढ़ें: RBI की स्ट्रेटजी हुई सुपरहिट! NRI ने भर दिया भारत का 'डॉलर खजाना', समय से पहले बंद करनी पड़ी विंडो

क्यों शुरू की गई थी यह योजना?

RBI ने 8 जून को यह खास विदेशी मुद्रा योजना शुरू की थी. उस समय रुपये पर दबाव बढ़ रहा था. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमत और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी जैसे कारणों से रुपये को नुकसान हो रहा था. ऐसे समय में RBI ने बैंकों और दूसरे माध्यमों से विदेशी मुद्रा जुटाने की सुविधा दी, ताकि देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़े और रुपये को सहारा मिले. ऐसे माहौल में RBI ने NRI से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई.

फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) अकाउंट NRI के लिए एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट होता है. इसमें NRI अपनी विदेशी कमाई को भारत में विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं. उन्हें रकम को पहले भारतीय रुपये में बदलने की जरूरत नहीं होती. इस खाते की खासियत यह है कि मूलधन और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलते हैं. ऐसे में NRI को रुपये में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता.

Advertisement

रुपये के लिए ये 3 बातें फायदेमंद

कोटक सिक्योरिटीज के FX एनालिस्ट अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपये को इस समय तीन चीजों से फायदा मिल रहा है. पहला, RBI की योजना से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आई है. इससे RBI के पास रुपये को संभालने की ज्यादा क्षमता है. दूसरा, भारत की GDP के मजबूत आंकड़ों से अर्थव्यवस्था को लेकर बाजार का भरोसा बढ़ा है. तीसरा, बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त पैसा मौजूद है. इससे आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा मिल रहा है. बनर्जी का अनुमान है कि RBI की इस योजना से कुल फॉरेन रिजर्व इंफ्लो करीब 145 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

यह भी पढ़ें: 7.8% vs 2.6% में कौन सा सही? GDP पर सुभाष गर्ग और गौरव वल्लभ का हुआ आमना-सामना

FCNR(B) विंडो बंद, बाकी सुविधाएं जारी

RBI की इस योजना के तहत FCNR(B) में नए जमा लेने की सुविधा 31 अगस्त को बंद हो गई. इसे तय समय से करीब एक महीने पहले बंद किया गया है. इसका मतलब है कि इस सुविधा को उम्मीद से ज्यादा अच्छा रिस्पॉन्स मिला. हालांकि, इस योजना के तहत RBI के साथ विदेशी मुद्रा स्वैप की सुविधा 11 सितंबर तक जारी रहेगी. वहीं ECB और OFCB से जुड़ी सुविधा 31 दिसंबर तक खुली रहेगी. CareEdge Ratings के मुताबिक, इस योजना के तहत बड़ी रकम आने से बैंकिंग सिस्टम में पैसे की उपलब्धता बढ़ी है. इससे बैंकों को आने वाले समय में फंडिंग जुटाने में कुछ राहत मिलेगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »