केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिवाली से पहले एक बड़ा फैसला लिया है. अक्टूबर महीने के आखिरी दिन जारी फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स या एक्सपोर्ट ड्यूटी को घटाकर जीरो (Petrol Export Duty Zero) कर दिया है. जबकि दूसरी ओर डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में इजाफा किया है, यही नहीं हवाई ईंधन यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी इस टैक्स को बढ़ाया गया है.
वेस्ट एशिया तनाव के बीच बड़ा फैसला
वित्त मंत्रालय द्वारा शनिवार 31 अक्टूबर को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें बताया गया है कि दो हफ्तों के लिए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल गेन टैक्स बढ़ा (Diesel-ATF Tax Hike) दिया गया है. जबकि सरकार ने पेट्रोल शिपमेंट पर लेवी को हटाने का फैसला किया है. सरकार के मुताबिक, ये ताजा बदलाव ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार जारी उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच किए गए हैं.
Petrol पर एक्सपोर्ट ड्यूटी जीरो
सरकार ने इस बलाव के तहत पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में जो चेंज किया है, उसके तहत अब तक इस पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी 2.50 रुपये प्रति लीटर को घटाकर जीरो कर दिया है. सरकार ने साफ किया है कि ये बदले हुए रेट 31 अक्टूबर से लागू होंगे और अगले दो हफ्ते तक लागू रहेंगे.
वहीं सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ATF Export पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को पहले के 10.50 रुपये प्रति लीटर से थोड़ा बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसके अलावा डीजल एक्सपोर्ट पर लेवी में तगड़ा इजाफा किया गया है. एक्सपोर्ट किए गए डीजल पर SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस का मिलाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 11.50 प्रति लीटर कर दिया गया है यानी सीधे 3 रुपये प्रति लीटर टैक्स बढ़ाया गया है.
घरेलू मार्केट में कोई असर नहीं
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंस मिनिस्ट्री ने विंडफॉल टैक्स में बदलाव करने के साथ ही साफ किया है कि घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी रेट में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. ये नए चेंज सिर्फ पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट पर लागू होंगे.
यहां बता दें कि विंडफॉल टैक्स का इस्तेमाल सरकार उन परिस्थितियों में अतिरिक्त कमाई पर कर लगाने के लिए करती है, जब कंपनियों को बाजार की असाधारण स्थितियों के कारण सामान्य से ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना होती है. फ्यूल के मामले में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेश में पेट्रोल और डीजल बेचने से ज्यादा कमाई हो सकती है. ऐसे समय सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर उस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा हासिल करने की कोशिश करती है.
पहली बार 2022 में लगा था ये Tax
भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर Windfall Tax लगाया था. करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया गया. मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे फिर लागू किया. तब से इसकी दरों में बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव किया जा रहा है.
सरकार हर दो हफ्ते में इन टैक्स का रिव्यू करती है, जिसमें इंटरनेशनल फ्यूल की कीमतों में बदलाव और घरेलू रिफाइनर और एक्सपोर्टर को विदेश में बिक्री से होने वाले मुनाफे को ध्यान में रखा जाता है. एक्सपोर्ट पर ड्यूटी लगाकर, सरकार विदेशों में बिक्री को कम आकर्षक बनाना चाहती है और रिफाइनर को घरेलू बाजार में काफी उपलब्धता बनाए रखने के लिए बढ़ावा देना चाहती है.
आजतक बिजनेस डेस्क